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Bhagalpur। राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संरक्षक के. एन. गोविंदाचार्य अध्ययन प्रवास यात्रा क्रम में भागलपुर पहुंचे

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ऐसे समय में जब भारतीय समाज में चारों ओर तत्वनिष्ठा के स्थान पर व्यक्तिनिष्ठा देखा जा रहा है। ऐसे समय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारों में पले-बढे़ श्री गोविन्दाचार्य ने युवा अवस्था में ही भारत माता के श्री चरणों में सेवा का जो व्रत लिया वह आज तक अनवरत जारी है। श्री के.एन. गोविन्दाचार्य एक विचारक , प्रचारक , लेखक तथा प्रखर वक्ता हैं। आप भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव एवं स्वदेशी के प्रणेता ,आर्थिक चिंतक, पर्यावरणविद है। इनका सारा जीवन देश सेवा में बीता हैं।

श्री गोविंदाचार्य जी देव प्रयाग से गंगा सागर तक की अध्ययन प्रवास पर निकले है। इसी दौरान 28 सितंबर सोमवार को इनका आगमन भागलपुर में हुआ। श्री गोविंदाचार्य जी सबसे पहले बाबा वृद्धेश्वरनाथ मंदिर में पूजा अर्चना किये। इसके बाद बरारी सीढ़ी घाट पहुंचे, जहां गंगा विचार मंच के कार्यकर्ताओं के द्वारा गंगा पूजन एवं स्वागत कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इसके बाद श्री गोविंदाचार्य संवाददाता सम्मेलन में लोगों से स्वदेशी सामान के इस्तेमाल की अपील की। उन्होंने कहा कि शहर से देशी, जरूरत से स्वदेशी और मजबूरी में विदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल करें। मजबूरी जितनी कम हो उतना अच्छा है।


उन्होंने कहा कि ‘भारत माता की जय’ और ‘वन्दे मातरम’ कहने से हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है। हमलोगों को आस-पड़ोस के दुख दर्द में हिस्सा लेना चाहिए। गलत तरीके से अमीर बनने का प्रयास बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।
इन्होंने कहा कि बीते 30 वर्षों में उदारीकरण के शोध के बाद पता चला है कि देश में नए आयाम बढ़े है। आर्टिफिशियल टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स व कम्युनिकेशन का बहुत विकास हुआ है। वहीं बाजारवाद व उपभोक्तावाद की चपेट में देश आ रहा है। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानववाद के आधार पर ही देश को आगे बढ़ाया जा सकता है। हमें प्रकृति केंद्रित विकास की अवधारणा को अपनाना होगा।

आनंदराम ढानढ़निया सरस्वती विद्या मंदिर भागलपुर में एक व्याख्यान का आयोजन राष्ट्रीय स्वाभिमान परिषद के द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भागलपुर ने बहुत कुछ सिखाया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक होने के नाते कई महीनों तक भागलपुर में रहे थे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि खुद से बड़ा हमें पार्टी को मानना होगा,वहीं पार्टी से बड़ा देश को मानना होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आत्मनिर्भर भारत की वकालत करती है, लेकिन आत्मा के बिना आत्मनिर्भर भारत कैसे होगा। भारत की आत्मा गंगा और गाय है, जो यहाँ की संस्कृति है। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन में बैठे लोगों को विचार करना चाहिए कि योजनाओं का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे, और हर हाथ को काम मिले।

उन्होंने कहा कि वे आरएसएस के आजीवन स्वयंसेवक रहेंगे, वर्ष 2003 से किसी भी राजनीतिक दल में नहीं रहने का निश्चय ले चुके हैं।


भागलपुर में श्री गोविंदाचार्य जी का स्वागत कई गणमान्य लोगों ने किया। मंच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संघचालक प्रो राणा प्रताप, समाजसेवी बनवारी दलनीया, डॉल्फिन पर शोध करने वाले प्रो सुनील चौधरी उपस्थित थे। मंच संचालन डॉ राजीव सिंह ने किया। प्रस्तावना कार्यक्रम संचालक उत्कर्ष अमृत ने दिया। इस कार्यक्रम में सुरेंद्र पाठक, नभय चौधरी, हरिवंश मणि सहित शहर के दर्जनों सम्मानित लोग उपस्थित थे।

मारूति नंदन मिश्र
भागलपुर

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