
कविता/ हवाओं का रुख बदला है/ अंजलि आहूजा, श्रीनगर गढ़वाल उत्तराखंड
हवाओं का रुख बदला है, सूखे पत्तों को हवाओं से क्या डर ले जायें न जाने किस डगर टूटा जो दरख़्त से कभी रंग बदला,

हवाओं का रुख बदला है, सूखे पत्तों को हवाओं से क्या डर ले जायें न जाने किस डगर टूटा जो दरख़्त से कभी रंग बदला,

लहरें ठंडी ठंडी लहरें, छू कर पैरों को जाती लहरें आती लहरें जाती लहरें लाती कुछ ले जातीं लहरें बलखातीं इठलातीं लहरें क्या कह जातीं

चाय में चीनी सी मीठी समोसे की चटनी सी तीखी कभी टेढ़ी सी कभी सीधी तुमसे ही यारों यारी सीखी वो बचपन की बेवक़ूफ़ियॉ पेंसिलों

ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा के संस्थापक महामना कीर्ति नारायण मंडल की जयंती पर 7 अगस्त, 2020 को महाविद्यालय में एक सादा समारोह का आयोजन किया

विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभाग एवं महाविद्यालय 4 अगस्त, 2020 से सशर्त खुलेंगे।

कोशी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान पार्षद और बीएनएमयू, मधेपुरा एवं टीएमबीयू, भागलपुर के सीनेट एवं सिंडिकेट सदस्य डॉ. संजीव कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश
बहनें ———————-अरुण नारायण हमारी चेतना में जब दाखिल होती हैं बहनें हमेशा पराए हो चुके आत्मीय जगहों की तरह जो पुराने दिनों को लौटा लाती

राखी : कर्मकांड या परंपरा ? 🤔🤔🤔🤔🤔🤔 आम तौर पर प्रगतिशील लोग सभी पुरानी परंपराओं का विरोध करते हैं, जो गलत बात है। नयी परंपराओं

भारत दुनिया में विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठित रहा है। हमें यह प्रतिष्ठा हमारे देश के महान गुरुओं की बदौलत मिली है। हमारे ऋषि-मुनियों, साधकों-योगियों

प्रेमचंद एवं रेणु की स्त्री-दृष्टि एवं प्रेम की अवधारणा काफी व्यापक है। इसे हम किसी एक कृति के आधार पर नहीं देखा जा सकता है।
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