BNMU। भूपेंद्र नारायण मंडल जन्मोत्सव का आयोजन

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भूपेंद्र नारायण मंडल जन्मोत्सव का आयोजन

भूपेंद्र बाबू समाजवाद के जीती-जागती मशाल थे। उनके नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना इस क्षेत्र के लिए गौरव की बात है। इस विश्वविद्यालय के साथ भूपेंद्र बाबू का नाम जुड़ा है, इससे इसकी महत्ता बढ़ जाती है। भूपेन्द्र बाबू के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

यह बात कुलपति प्रोफेसर डॉ. राम किशोर प्रसाद रमण ने कही। वे विश्वविद्यालय प्रेक्षागृह में एक फरवरी को भूपेंद्र नारायण मंडल जन्मोत्सव सह स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन एवं अध्यक्षता कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि भूपेन्द्र बाबू मनसा, वाचा एवं कर्मना तीनों में एक थे। उनके सोच, कथनी एवं करनी में समानता थी। वे जो सोचते थे, वही बोलते थे और वही करते थे। यही उनकी सबसे बड़ी शक्ति थी।

उन्होंने कहा कि बीएनएमयू के विकास में हम सबों को अपनी-अपनी भागीदारी निभानी होगी। हम सभी ईमानदारीपूर्वक अपने-अपने कर्तव्यों का समुचित निर्वहन करेंगे, तो निश्चित रूप से विश्वविद्यालय का विकास होगा।

उन्होंने कहा कि उनका दो मुख्य उद्देश्य है। नैक मूल्याकंन और पठन- पाठन को पटरी पर लाना।

उन्होंने कहा कि हम सबों का यह दायित्व है कि हम विद्यार्थियों को कक्षा तक लाएँ। जिस दिन यह हो जाएगा, उसी दिन हम सबों का सपना पूरा होगा।

मुख्य अतिथि प्रति कुलपति प्रोफेसर डॉ. आभा सिंह ने कहा कि भूपेन्द्र बाबू आजीवन अपनी मातृभूमि को गर्वोन्नत करने हेतु प्रयासरत रहे। वे स्कूली जीवन से ही राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत थे। राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें स्कूल से निष्कासित भी कर दिया गया था।

उन्होंने कहा कि भूपेंद्र बाबू ईमानदारी के प्रतीक थे। उन्होंने राजनीति में भी त्याग का प्रतिमान स्थापित किया। वे लोकसभा एवं राज्यसभा दोनों के सदस्य चुने गए थे। दोनों सदनों में वे अपनी बात को काफी मजबूती से रखते थे।

उन्होंने कहा कि उन्होंने जमींदार परिवार में जन्म लेने के बावजूद जमींदारी उन्मूलन के लिए काम किया। वे हमेशा सदन से लेकर सड़क तक आम लोगों की आवाज को बुलंद करते रहे।

उन्होंने प्रस्ताव दिया कि स्नातक स्तर पर सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को भूपेंद्र नारायण मंडल स्काॅलरशिप प्रदान की जाए।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता राजनीति विज्ञान विभाग, ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. के. एन. ठाकुर ने कहा कि भूपेन्द्र बाबू सादगी एवं ईमानदारी के प्रतिक थे। हमें इन दोनों गुणों को जीवन में अपनाना चाहिए। ईमानदारी की आवश्यकता सभी लोगों को है। ईमानदारी ही समाज एवं राष्ट्र को महान बनाती है।

उन्होंने कहा कि सादगी से भी अधिक इमानदारी का महत्व है। एक लेखक ने व्यंग्य से लिखा है कि ईमानदारी बहुत कीमती चीज है। इसलिए इसका व्यवहार थोड़ा होता है।

उन्होंने कहा कि भूपेंद्र बाबू सभी लोगों के साथ समानता का व्यवहार करते थे और विरोधी विचारों का भी सम्मान करते थे।

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, मधेपुरा के पूर्व प्रति कुलपति प्रोफेसर डॉ. के. के. मंडल ने कहा कि भूपेन्द्र बाबू ने समाजवाद को जमीन पर उतारा। उनका समाजवाद झोपड़ी एवं बैलगाड़ी से निकला है। वे दूसरों के दर्द को पहचानते थे।

उन्होंने कहा कि आज कहीं भी समाजवाद नहीं है। तथाकथित समाजवादियों ने समाजवादी सिद्धांतों को तिलांजलि दे दी है। आज का समाजवाद फाइवस्टार होटल एवं हेलिकॉप्टर से आता है।

पूर्व विधायक परमेश्वरी प्रसाद निराला ने कहा कि भूपेन्द्र बाबू के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत है। इनका जन्मोत्सव बड़े पैमाने पर मनाया जाना चाहिए।

पूर्व प्रधानाचार्य डाॅ. रामभजन मंडल ने कहा कि विश्वविद्यालय को भूपेन्द्र बाबू के विचारों के अनुरूप आगे बढ़ाने की जरूरत है।

स्वागत भाषण देते हुए कुलसचिव डाॅ. कपिलदेव प्रसाद ने कहा कि इस वर्ष से विश्वविद्यालय स्थापना दिवस और भूपेंद्र नारायण मंडल जयंती को वार्षिक कैलेंडर में भी शामिल किया गया है। साथ ही सभी अंगीभूत, संबद्ध एवं निजी महाविद्यालयों और स्नातकोत्तर विभागों को इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजित करने का निदेश दिया गया है।

डाॅ. भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कहा कि भूपेन्द्र बाबू राम मनोहर लोहिया के अत्यंत करीबी थे।

पूर्व प्रधानाचार्य सह पूर्व सिंडिकेट सदस्य डाॅ. परमानंद यादव न विश्वविद्यालय में शैक्षणिक माहौल बनाना ही भूपेन्द्र बाबू के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रशासनिक भवन परिसर में स्थापित भूपेन्द्र नारायण मंडल की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। पुनः मंच पर भूपेंद्र बाबू के चित्र पर पुष्पांजलि भी अर्पित की गई। अतिथियों का अंगवस्त्रम्, पुष्पगुच्छ एवं पाग देकर सम्मानित किया गया। अतिथियों ने दीपप्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अतिथियों के हाथों भूपेन्द्र बाबू की संक्षिप्त जीवनी का भी लोकार्पण किया गया। पार्वती विज्ञान महाविद्यालय, मधेपुरा की डाॅ. हेमा कुमारी एवं उनके सहयोगियों ने स्वागत गान प्रस्तुत किया। सबों ने मिलकर कुलगीत का गायन किया।

इस अवसर पर डीएसडब्लू डाॅ. अशोक कुमार यादव, डाॅ. नरेश कुमार, डाॅ. जवाहर पासवान, डाॅ. अमोल राय, डाॅ. इम्तियाज अंजूम, डाॅ. अशोक कुमार, डाॅ. भावानंद झा, शैलेन्द्र कुमार यादव, डाॅ. एम. एस. पाठक, डाॅ. ललन प्रसाद अद्री, प्रज्ञा प्रसाद, रंजन यादव आदि उपस्थित थे।

कार्यक्रम के आयोजन में आयोजन समिति के संयोजक निदेशक अकादमिक डाॅ. एम. आई. रहमान, सह संयोजक जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर, महाविद्यालय निरीक्षक विज्ञान डाॅ. उदयकृष्ण, वित्त पदाधिकारी रामबाबू महतो, परिसंपदा पदाधिकारी डाॅ. गजेन्द्र कुमार, कुलपति के निजी सहायक शंभू नारायण यादव, केंद्रीय पुस्तकालय के पृथ्वीराज यदुवंशी आदि ने सहयोग किया।

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