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BNMU प्रतिनियोजन रद्द करने की मांग 

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प्रतिनियोजन रद्द करने की मांग 

बीएनएमयू, मधेपुरा के सीनेटर डॉ. सुधांशु शेखर ने बीएनएमयू प्रशासन द्वारा हाल के दिऩों में नव-स्थापित राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में प्रतिनियोजित सभी शिक्षकों का प्रतिनियोजन रद्द करते हुए उनकी सेवा उनके मूल महाविद्यालयों में वापस करने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने 29 अगस्त, 2026 (शनिवार) की देर शाम कुलसचिव को ई. मेल. से पत्र प्रेषित किया है।

उन्होंने कहा है कि लोक भवन पटना का निदेश है कि जहां किसी विषय में एक भी नवनियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर (संविदा) ने योगदान कर लिया है, वहां प्रतिनियुक्ति शिक्षकों को उनके मूल महाविद्यालयों में वापस किया जाए। लेकिन बीएनएमयू में ऐसा नहीं किया गया। यदि शिक्षक दिवस तक इस दिशा में सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो राज्यपाल-सह-कुलाधिपति से शिकायत की जाएगी।

उन्होंने कहा है कि अन्य मामलों की तरह ही नव-स्थापित डिग्री महाविद्यालयों में प्रतिनियोजन के मामले में विश्वविद्यालय का रवैया शिक्षक विरोधी रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने नव-स्थापित राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में प्रधानाचार्य, अर्थपाल एवं शिक्षकों का प्रतिनियोजन करते समय मनमाने ढंग से पीक एंड चूज नीति के तहत कार्य किया। इसके कारण शिक्षकों को बेवजह परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा है कि विश्वविद्यालय के पास प्रतिनियोजन की कोई नीति या रणनीति नहीं है।विश्वविद्यालय प्रशासन ने मान्य नियमों एवं परंपराओं की अनदेखी करते हुए संबंधितों शिक्षकों से विकल्प नहीं लिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतिनियोजन के बहाने पूरे विश्वविद्यालय में भय का माहौल कायम करने की कोशिश की गई।‌ जानबूझकर अधिकांश शिक्षकों को उनके मूल महाविद्यालय के नजदीक वाले कॉलेज की बजाय काफी दूर वाले कॉलेज में प्रतिनियोजित किया। इसकी एक बानगी है कि एल. एन. एम. एस. कॉलेज, वीरपुर में हिंदी के शिक्षक को निर्मली के समीप मरौना और एच. पी. एस. कॉलेज, निर्मली में हिंदी के ही शिक्षक को वीरपुर के पास प्रतापगंज भेज दिया गया। दोनों ने कुलसचिव से मिलकर म्युचुअल स्थानांतरण की गुहार लगाई। फिर भी कुलसचिव ने कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया।

डॉ. शेखर ने बताया कि बीएनएमयू प्रशासन द्वारा डिग्री महाविद्यालयों में प्रधानाचार्य, अर्थपाल एवं शिक्षकों के प्रतिनियोजन में कई गड़बड़ियां की गई हैं।दो-दो विभागाध्यक्षों को दूर-दराज के महाविद्यालयों का प्रभारी बनाया गया है। विश्वविद्यालय के पदाधिकारी एवं सीनेटर और अंगीभूत महाविद्यालयों के अर्थपाल को भी डिग्री महाविद्यालयों में भेज दिया गया। किसी-किसी अंगीभूत महाविद्यालय के एक विषय के सभी शिक्षकों को प्रतिनियोजित कर दिया गया।

उन्होंने मांग किया है कि डिग्री महाविद्यालयों में प्रतिनियोजित सभी शिक्षकों को पांच सितंबर (शिक्षक दिवस) के दिन तक उनके मूल महाविद्यालयों में वापस किया जाए। ऐसा नहीं होने की स्थिति में वे पूरे मामले में विश्वविद्यालय द्वारा की गई मनमानी की राज्यपाल- सह- कुलाधिपति से शिकायत करेंगे।

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