प्रखर स्वतंत्रता सेनानी एवं सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत परम आदरणीय श्री रासबिहारी लाल मंडल जी को उनकी पुण्यतिथि पर सादर नमन। इस अवसर पर हमें अपनी गौरवशाली विरासत को जानने-समझने तथा उसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए एकजुट होकर प्रयास करने का संकल्प लेने की जरूरत है। इस वर्ष वृहत पैमाने पर आयोजित पुण्यतिथि कार्यक्रम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम में अपने-अपने क्षेत्र की कई दिग्गज हस्तियां मौजूद थीं। लेकिन मैं उनमें से सिर्फ एक की चर्चा करना चाहूंगा। ये हैं श्री आनंद मंडल, जो संयोग से श्री रासबिहारी लाल मंडल जी के सुपुत्र श्री बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल (बी. पी. मंडल) के पौत्र हैं। मेरे लिए यह खुशी की बात है कि मुझे सहज ही इनका स्नेह एवं मार्गदर्शन मिलता रहा है।
दरअसल जब मैं तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर में स्नातक का छात्र था, उसी दौरान वहां विश्वविद्यालय गांधी विचार विभाग के शिक्षक (बाद में लंबे समय तक विभागाध्यक्ष भी रहे) मेरे गुरूवर प्रो. विजय कुमार जी ने मेरा परिचय श्री आनंद मंडल जी (आनंद भैया) से कराया था। मैं इनकी सादगी एवं इनके चेहरे पर मौजूद विशिष्ट तेज से आकर्षित रहा हूं। वैसे अपने संकोची स्वभाव तथा तमाम व्यस्तताओं के कारण मैं इनसे अपेक्षाकृत बहुत कम मिल पाता हूं, लेकिन इनसे जब भी मिलता हूं और जब भी इन्हें सुनता हूं कुछ-न-कुछ सीखने को मिलता है। 
कार्यक्रम आयोजित करने के लिए भूपेन्द्र नारायण मंडल विचार मंच परिवार को बहुत-बहुत साधुवाद और आग्रहयुक्त आमंत्रण हेतु संयुक्त सचिव अनुजवर डॉ. हर्षवर्धन सिंह राठौड़ को बहुत-बहुत धन्यवाद। कार्यक्रम के दौरान अपना सुखद सानिध्य देने के लिए मित्रवर भाई डॉ. फिरोज मंसूरी जी तथा विशेष स्नेह देने हेतु अग्रज श्री चिरामणी जी को बहुत-बहुत धन्यवाद। ऐसे सभी आयोजनों में मुझे अपने रथ (स्कूटर) पर बैठाकर ले जाने और मुझे अपने कैमरे (मोबाइल) में जैसे-तैसे कैद करने वाले अनुज डॉ. सौरभ कुमार चौहान जी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
#सुधांशुशेखर














