*लेट्स इंस्पायर बिहार के अंतर्गत लिटरेरी चैप्टर द्वारा अंगिका एवं हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ अमरेंद्र की पुस्तक “सवालों के घेरे में डॉ अमरेंद्र: साक्षात्कार समग्र” का भागलपुर में लोकार्पण सह विचार गोष्ठी*
संतुलन के बिना आलोचना विश्वसनीय नहीं बन सकती। ये बातें वरिष्ठ साहित्यकार *रंजन* ने स्थानीय छोटी खंजरपुर मोहल्ला में स्वयंसेवी संस्था *लेट्स इंस्पायर बिहार लिटरेरी चैप्टर* के तत्वावधान में मंगलवार को *डॉ. ब्रह्मदेव कुमार* द्वारा संपादित पुस्तक ‘सवालों के घेरे में *डॉक्टर अमरेंद्र (साक्षात्कार समग्र)*’ के लोकार्पण समारोह-सह-विचार गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में कही। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक डॉ. अमरेंद्र का जीवन वृत्त नहीं, बल्कि एक साक्षात्कार पुस्तक का आलोचनात्मक अध्ययन है।
सुप्रसिद्ध लेखिका, स्तंभकार तथा लिटरेरी चैप्टर की मुख्य समन्वयक *ज्योति झा* ने कहा कि *वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी विकास वैभव की प्रेरणा* के अंतर्गत *लेट्स इंस्पायर बिहार* अभियान के लिटरेरी चैप्टर साहित्य अध्याय द्वारा आयोजित यह साहित्यिक कार्यक्रम बिहार में सकारात्मक परिवर्तन के परिचालन में साहित्य द्वारा अंग प्रदेश का एक प्रेरक प्रयास है। उन्होंने डॉ. अमरेंद्र को बधाई दी।
*डॉ. अमरेंद्र* ने पुस्तक के बारे में बताया कि यह साक्षात्कार मेरा जिंदगीनामा है। उन्होंने कहा कि यह रस तो है, लेकिन रसायन पहले है। उन्होंने ज्योति झा लिखित *‘आनंदी’* उपन्यास का शीघ्र ही अंगिका अनुवाद करने की बात कही।
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में सेवानिवृत्त शिक्षिका *इंदुबाला* ने कहा कि डॉ. अमरेंद्र ने अपने व्यक्तित्व को कृतित्व में ढाल दिया, जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण अमरेंद्र हैं। वरिष्ठ पत्रकार *दीपक कोचगवे* ने कहा कि इंटरनेट के इस युग में भी डॉ. अमरेंद्र के साहित्य से यह तो पता चलता है कि साहित्य का दरवाजा बंद नहीं हुआ है।
स्नातकोत्तर अंगिका विभाग की व्याख्याता *डॉ. शोभा कुमारी* ने डॉ. अमरेंद्र की साहित्यिक प्रतिभा की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि उनके साहित्य से युवा पीढ़ी हमेशा प्रेरित होती रहेगी।
इंग्लैंड में रह रहीं भागलपुर निवासी *इंदिरा झा* ने कहा कि यहां के साहित्यकारों का अंगिका के प्रति समर्पण प्रशंसनीय है। उन्होंने *लेट्स इंस्पायर बिहार की यूके शाखा* की ओर से डॉ. अमरेंद्र समेत सभी अंगिका साहित्यकारों को बधाई दी।
गीतकार *राजकुमार* ने संचालन के क्रम में पुस्तक का संक्षिप्त परिचय कराया। उन्होंने इस बात की विशेष रूप से प्रशंसा की कि डॉ. अमरेंद्र ने हर विधा में लिखा। ये बैठते तो पीछे हैं, लेकिन साहित्यिक क्षेत्र में सबसे आगे नजर आते हैं।
विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए *डॉ. आभा पूर्वे* ने कहा कि डॉ. अमरेंद्र के व्यक्तित्व और विचार को समझने के लिए यह ‘साक्षात्कार समग्र’ पुस्तक एक खुला दरवाजा है।
*डॉ. प्रेमचंद पांडेय* ने कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से पाठक डॉ. अमरेंद्र के व्यक्तित्व और कृतित्व से अवगत होंगे। नाटककार *सत्यनारायण मंडल* ने कहा कि पुस्तक केवल एक साहित्यकार के उत्तरों का संग्रह नहीं, बल्कि एक युग की साहित्यिक चेतना का दस्तावेज है।
साहित्यकार और फिल्मकार *शीतांशु अरुण* ने कहा कि पुस्तक में जहां साहित्यिक ऊंचाइयों का विश्लेषण है, वहीं भविष्य के संरक्षण के लिए सुझाव भी हैं।
इस अवसर पर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी की सहायक प्राध्यापक *रश्मि ठाकुर* ने यहां की *मंजूषा कला* की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस क्षेत्र की भाषा तथा कला के विकास के लिए अपनी टीम के साथ यहां कुछ काम करने की बात कही। उन्होंने अपनी भावी योजनाओं की भी विस्तार से चर्चा की।
पुस्तक में *द लिटरेरी मिरर* के एडिटर इन चीफ *नीतीश राज* द्वारा डॉ अमरेंद्र का साक्षात्कार भी सम्मिलित और गोष्ठी के दौरान इस साक्षात्कार की भूरी-भूरी प्रशंसा की गई ।
इस अवसर पर *अर्चना झा* ने देवी गीत प्रस्तुत किया। मनोविज्ञान विभाग में हेड ऑफ द डिपार्टमेंट रह चुकीं *मंजूबाला ठाकुर* ने भी डॉ. अमरेंद्र की साहित्यिक प्रतिभा की प्रशंसा की। धन्यवाद ज्ञापन ज्योति झा ने किया।













