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किराए पर मकान….

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किराए पर मकान….


आपका नाम क्या है? अंजुम

पूरा नाम, अंजुम शर्मा

अंजुम तो मुस्लिम नाम है. क्या माँ पिता में से कोई…?

नहीं चाहिए घर! छोड़ दीजिए.

भैया, बुरा मत मानिए लेकिन मकान मालिक का कहना है कि केवल हिंदुओं को घर किराए पर देना है. आपकी बात करवा देंगे अगर घर पसंद है तो.

नहीं करनी बात. हिंदू के बाद जाति पूछेंगे फिर गोत्र…

 

दूसरी जगह : क्या नाम है आपका?

अंजुम

पूरा नाम क्या लिखते हैं?

पूरा नाम बताना ज़रूरी है?

भाई, ठाकुरों का घर है. उसी हिसाब से घर देंगे.

नहीं चाहिए.

 

तीसरी जगह :

नाम क्या है आपका?

अंजुम

पूरा नाम ?

अंजुम शर्मा

अरे! शर्मा हैं! कौन से शर्मा हैं? जिनका मकान है, वे बड़े अधिकारी हैं. यादव हैं. उन्होंने कहा यादवों को ही घर देंगे भले खाली पड़ा रहे.

पहली बार मुझे कहना पड़ा, ब्राह्मणों को भी नहीं.

ब्रोकर ने कहा, उन्हें तो एकदम नहीं. रिटायर्ड आर्मी अफ़सर हैं. बात के पक्के.

 

चौथा अनुभव :

नाम, जाति, गोत्र सब पूछ लिया. फिर कहा. कितने लोग रहेंगे? अच्छा कोई नात-रिश्तेदार बहुत ज़्यादा दिन रहेगा तो हमारा पानी ज़्यादा ख़र्च होगा. मोटर ज़्यादा चलेगी, वो बिल आपको भरना होगा. रात में दस बजे के बाद नहीं आ सकते. बहुत लंबा किसी को रुकना हो तो पहले बता देना.

उधर हाथ जोड़ लिए.

 

पाँचवा :

भैया बुरा मत मानना. मुस्लिम और शेड्यूल कास्ट को सोसाइटी में घर देने से माना किया है. आप अगर इनमें से कोई हैं तो पहले बता दीजिए.

 

छठा :

माँस! मछली! अंडा! लड़की तो नहीं लाएँगे?

पिछले वालों के यहाँ रोज़ कोई न कोई…! और लहसुन प्याज़ चल जाएँगे. दारू, सिगरेट, मीट न खाते, न ऐसों को घर देते.

इतना नियम नहीं पालन कर पाएंगे. नहीं चाहिए.

 

अगली जगह काम पूछा, बताया और आइकार्ड भेजा तो मना कर दिया कि पत्रकारों, पुलिसवालों और हरियाणा वालों को नहीं देंगे.

 

एक का घर पसंद आया तो शिफ्टिंग से तीन दिन पहले उसे बगल वाले से पार्किंग के लिए लड़ते देख लिया. पैसे देकर मना करना पड़ा. उसने एडवांस वापस देने से मना कर दिया.

 

अंततः जो मिला सो मिला.

भरोसा और पुख़्ता हुआ कि बड़े शहर के बड़े मकानों में बहुत छोटे लोग रहते हैं, जो पैसों के लिए बहुत बड़ा मुँह फाड़ते हैं और जाति-धर्म के लिए उससे बड़ा. कमाल की बात यह है कि वे ख़ुद ये सब नहीं कहते, इसके लिए उन्होंने बिचौलिए रखे हैं जो दोनों तरफ़ से पैसा लेते हैं और स्कूटी दौड़ाते हैं. मकान मालिक साफ़ बना रहता है कि हम! हम तो यह सब मानते ही नहीं. वो तो ब्रोकरों ने माहौल बिगाड़ा है जी! वरना हम कहाँ जाति-धर्म में भरोसा रखने वाले हैं.

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