भारतरत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर का 102वां जन्मोत्सव समारोह आयोजित
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बीएनएमयू में याद किए गए भारतरत्न जननायक कर्पूरी
सच्चे समाजवादी थे कर्पूरी ठाकुर : कुलपति
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मधेपुरा। राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), बीएनएमयू, मधेपुरा के तत्वावधान में शनिवार को विश्वविद्यालय प्रेक्षागृह में भारतरत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर का 102वां जन्मोत्सव समारोह मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. बी. एस. झा ने कर्पूरी ठाकुर के साथ बिताए अपने संस्मरणों को याद कर उन्हें नमन किया और उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।

कुलपति ने बताया कि कर्पूरी ठाकुर का जन्म बिहार के दरभंगा (अब समस्तीपुर) जिले के पितौंझिया गाँव (अब कर्पूरी ग्राम) में हुआ था। उन्होंने महात्मा गाँधी के आह्वान पर एक छात्र कार्यकर्ता के रूप में भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। वे अंग्रेज पुलिस द्वारा 1943 में गिरफ्तार कर लिए गए। इस कारण उन्हें उन्होंने 26 महीने जेल में बिताना पड़ा।

उन्होंने बताया कि जेल से रिहा होने के बाद भी ब्रिटिश राज के विरुद्ध और भूमिहीन किसानों के हित में अहिंसक संघर्ष जारी रखा। भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद अपने गांव के स्कूल में शिक्षक के रूप में काम किया।
उन्होंने बताया कि कर्पूरी ठाकुर 1948 में आचार्य नरेंद्र देव एवं जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में गठित सोशलिस्ट पार्टी के प्रांतीय मंत्री चुने गए। वे 1952 में ताजपुर निर्वाचन क्षेत्र से सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के रूप में बिहार विधानसभा के सदस्य बने। फिर वे 1962 के चुनाव में भी विजयी रहे।
उन्होंने बताया कि कर्पूरी ठाकुर 1967 में बिहार के उप- मुख्यमंत्री बने और शिक्षा एवं वित्त मंत्रालयों का प्रभार संभाला। वे दो बार (1970 एवं 1977) बिहार के मुख्यमंत्री रहे। उनका 17 फरवरी, 1988 को निधन हो गया।
कुलपति ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर सादगी एवं सरलता की प्रतिमूर्ति थे। वे सच्चे मायने में समाजवादी नेता थे। उन्होंने अपने जीवन में कभी भी जातिवाद एवं परिवारवाद को बढ़ावा नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने हमेशा आम लोगों को हक एवं न्याय दिलाने के लिए संघर्ष किया और हमेशा धारा के विपरित चलते रहे। यही कारण है कि देश की आजादी के बाद भी उन्हें अठारह बार जेल जाना पड़ा था।
उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर जाति नहीं, जमात की चिंता करते थे। उन्होंने पिछड़ी जातियों, अत्यंत पिछड़ी जातियों के साथ-साथ महिलाओं और गरीब सवर्णों के लिए भी आरक्षण का प्रावधान किया था।
उन्होंने कहा कि वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कर्पूरी ठाकुर के सच्चे अनुयायी हैं। उनके द्वारा मधेपुरा में भी जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज की स्थापना कराई गई है।
मौके पर डीएसडब्ल्यू प्रो. अशोक कुमार ने कहा कर्पूरी ठाकुर केवल पिछड़ों एवं अतिपिछड़ों के प्रतिनिधि नहीं थे, बल्कि वे सर्वसमाज के नेता थे। उन्होंने समाज के सभी वर्गों को आगे बढ़ाने की कोशिश की।
सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. कैलाश प्रसाद यादव ने कहा कि बताया कि कर्पूरी
ठाकुर ने बिहार के शिक्षा मंत्री के रूप में मैट्रिकुलेशन पाठ्यक्रम के लिए अनिवार्य विषय के रूप में अंग्रेजी को हटा दिया था। इससे शिक्षा के क्षेत्र में गरीबों एवं पिछड़ों की भागीदारी बढ़ी।
विषय प्रवेश कराते हुए कुलसचिव प्रो. अशोक कुमार ठाकुर ने बताया कि कुलपति का कर्पूरी के प्रति विशेष सम्मान है। इनके प्रयास से विश्वविद्यालय में कर्पूरी की प्रतिमा स्थापित होने जा रही है।
इसके पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों ने जननायक कर्पूरी ठाकुर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। अतिथियों को अंगवस्त्रम् एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में कुलगीत का और अंत में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् एवं राष्ट्रगान जन का सामूहिक गायन किया गया।
कार्यक्रम का संचालन एनएसएस पदाधिकारी डॉ. सुधांशु शेखर ने किया। धन्यवाद ज्ञापन वित्त पदाधिकारी डॉ. सुनील कुमार ने किया।
इस अवसर पर मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. दीपक कुमार गुप्ता, विभागाध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार सिंह, शिक्षाशास्त्र विभाग के प्रोफेसर इंचार्ज प्रो. सी. पी. सिंह, पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. ललन प्रसाद अद्री, आईक्यूएसी निदेशक प्रो नरेश कुमार, परीक्षा नियंत्रक डॉ. शंकर कुमार मिश्र, परिसंपदा पदाधिकारी शंभू नारायण यादव, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. अमरेंद्र कुमार, माया के अध्यक्ष राहुल यादव, सीनेटर डॉ. रंजन कुमार, डॉ. माधव कुमार, डॉ. अभिषेक कुशवाहा, नेशनल एकेडमी के निदेशक जयराज, के. के. भारती, डॉ. ललन कुमार, आनंद आशीष, विश्वजीत कुमार, संतोष कुमार आदि उपस्थित थे।














