नयागांव (खगड़िया) : गौरवशाली अतीत की यादों को समेटे एक अत्यंत प्राचीन गांव

बिहार राज्यान्तर्गत खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड स्थित एक गांव है नयागांव। ‘नयागांव’ सुनने में ऐसा लगता है कि कोई नया बसा हुआ गांव होगा, लेकिन इस गाँव की पहचान सदियों से रही है, यहां का इतिहास बहुत पुराना है। गाँव में दो पंचायतें है एक जोरावरपुर एवं दूसरा दरियापुर भेलवा। यह गांव खगड़िया जिला मुख्यालय से 38 किलोमीटर, परबत्ता प्रखंड से 5 किलोमीटर और पसराहा रेलवे स्टेशन व राष्ट्रीय राजमार्ग से ग्यारह किलोमीटर दक्षिण दिशा में पवित्र नदी गंगा तट पर अवस्थित है।

गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि नयागांव में सौलहवीं शताब्दी से ही कई मंदिर प्रसिद्ध रहा था। गांव में सवर्प्रथम शिव मंदिर का निर्माण वर्ष 1636 में नयागांव के कमलेश्वरी भगत के दादाजी ने करवाया था। इस मंदिर में शिवलिंग भी स्थापित था। इस मंदिर के बाहरी दीवाल पर एक शिलापट्ट था, जिसमें मंदिर का निर्माण वर्ष अंकित था। बर्ष 1962 के समय इस मंदिर के पुजारी जगत वैद्य थे, जो उत्तर प्रदेश के रहने वाले ब्राह्मण थे। बैद्य इसी शिव मंदिर में रहकर पूजा के अलावा रोगियों का उपचार भी करते थे। इस शिव मंदिर के पास ही ठाकुरवाड़ी था, जहाँ राधा-कृष्ण की भव्य प्रतिमा स्थापित थी।

शिव मंदिर के सामने माँ दुर्गा का मंदिर था, इसे वर्ष 1648 में बनवाया गया था। दुर्गा मंदिर से जुड़ी कई किवदंतियां प्रचलित है। नयागांव के सिरमौर, प्रसिद्ध भजन कीर्तन गायक दिवंगत ज्योतिंद्र महंत जी ईश्वर के प्रति सदैव समर्पित रहे थे। बताया जाता है कि इनकी आंखों की रौशनी चली गई थी। पूरी तरह से दृष्टिहीन हो चुके थे। बिहार से लेकर दिल्ली तक आखों का उपचार करवाये फिर भी सुधार नहीं हो सका। उन्होंने नवरात्रि में अपने शरीर पर जयंती (जौ उगाना) उगाकर दुर्गा माँ की कठिन साधना का व्रत रखा।मंदिर में रहकर ही कठिन साधना किया। फलस्वरूप अष्टमी पूजा के दिन उसकी आंखों की रौशनी लौट आयी, आँख खुलते ही देवी माँ की मूर्ति का दर्शन हुआ। इसके बाद देवी मां के इस भक्त ने सोने से बना हुआ आंख दुर्गा मां के चरणों में चढ़ाया था। पर्व-त्यौहारों के अवसर पर नाटकों का आयोजन किया जाता था, उस वक्त धार्मिक नाटक रामायण, महाभारत, राजा हरिश्चन्द्र इस तरह के नाटक ग्रामीण कलाकारों द्वार अभिनीत किया जाता था।
वर्ष 1978 में आई भीषण बाढ़ के कारण पूरा गांव और यहाँ स्थित प्राचीन मंदिर भी गंगा नदी में समा गया। इसके बाद यहाँ के लोग ऊँचे स्थान बांध पर चले गए। वहाँ श्री राधा कृष्ण और शिव लिंग की पूजा ठाकुर जी के भक्त पंडित शालिग्राम मिश्र अपने घर में रखकर करते थे। जब गांव स्थायी रूप से बसने लगा तब उन्होंने अपने घर पर ही राधा-कृष्ण का मंदिर बनवाया।

गंगा नदी में बाढ़ का पानी कम होने के बाद लोगों ने देखा कि दुर्गा मंदिर का सारा सामान उसी स्थान पर रखा हुआ है। गांव के स्व मेहरबान सिंह को मंदिर बनाने का स्वप्न माता दुर्गा ने दिया था, फिर 1979 में नयागांव शतखुट्टी टोला में ग्रामीणों के द्वारा पक्का का दुर्गा मंदिर बनाया गया। पुनः वर्ष 2010 में वर्तमान विधायक व बिहार सरकार के पूर्व मंत्री रामानंद प्रसाद सिंह जी के प्रयास से भव्य मंदिर का निर्माण किया गया। साथ ही मंदिर के पूरब दिशा में धर्मशाला, पश्चिम दिशा में महावीर जी का मंदिर और दक्षिण दिशा में मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण हुआ। मान्यता है कि इस दुर्गा मंदिर में देवी माँ का दर्शन करने मात्र से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। माँ का कोई भक्त इस मंदिर से निराश होकर नहीं लौटता हैं। दुर्गा मां को प्रसन्न करने के लिए पूजा के नवमी तिथि को भैंसे की बलि और स्वर्ण चढ़ावा दिया जाता है। प्रत्येक वर्ष दुर्गा पूजा का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। देवी के आवाहन के लिये मंदिर के मुख्य द्वार के ऊपर तुतरू बाजा, ढोलक आदि वाद्य बजाया जाता है। यहां की देवी माँ ‘स्वर्ण देवी’ के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। पूर्व में इस मंदिर के पुजारी पंडित राजेन्द्र मिश्र थे उनके निधन के बाद मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित डब्लू मिश्र है। दुर्गा पूजा के अवसर पर मूर्ति बनाने का काम गांव के ही स्व कार्तिक पोद्दार के वंशज करते आये हैं। मां दुर्गा की एक अद्भुत बातें प्रचलित है। कहा जाता है कि विसर्जन के वक़्त श्रद्धालुओं को देवी माँ की आँखों में अश्रु दिखाई देता हैं।

नयागांव में एक और प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर शिरोमणी टोला में स्थित है। यहाँ वर्ष 1937 में खपरैल से बने मंदिर में पूजा शुरु किया गया था। धीरे-धीरे ग्रामीणों के सहयोग से भव्य दुर्गामंदिर का निर्माण किया गया। प्रत्येक वर्ष दुर्गा पूजा के अवसर पर माँ के इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। मंदिर में माता दुर्गा की मूर्ति स्थापित कर पूजा किया जाता है। यहाँ मेले के अलावे अखाड़ा और नाटक का भी आयोजन किया जाता है। इस मंदिर के पास ही भव्य शिव मंदिर का निर्माण ग्रामीणों द्वारा किया गया।  वर्ष 1995 में नयागांव में गांव की सुख व समृद्धि के लिए श्री सीता राम महायज्ञ का आयोजन किया गया था। इसमें गांव वालों के द्वारा लाखों रुपये खर्च किया गया था। इस अवसर पर तीन स्थायी प्रवेश द्वार और स्थायी प्रवचन मंच का निर्माण किया गया था। यज्ञ में देश के कई विद्वान संत व प्रवचनकर्ताओं के प्रवचन से श्रद्धालु लाभान्वित हुए थे।
नयागांव में दो जगहों पर माता काली का मंदिर है। एक शिरियाटोला और दूसरा पचखुट्टी टोला में। इन दोनों जगहों पर काली पूजा में मेला और नाटकों का आयोजन किया जाता हैं। पचखुट्टी टोला में भी भव्य शिव मंदिर का निर्माण ग्रामीणों के द्वारा किया गया। शिवरात्रि के दिन यहाँ शिव विवाह और भंडारा का भी आयोजन किया जाता है।
नयागांव गोढियासी में गंगा तट पर प्रत्येक वर्ष छठ मेला का भव्य आयोजन किया जाता है। इस मेले में छठी मईया और भगवान भास्कर की आकर्षक मूर्तियां बनाई जाती हैं। मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और नाटक प्रतियोगिता का आयोजन सहित मनोरंजन के लिये विभिन्न प्रकार के झूले, मौत का कुआं आदि लगाया जाता है।
वर्ष 1929 से प्रत्येक वर्ष होली के अवसर पर तीन दिवसीय श्री रामयथ संकीर्त सम्मेलन आयोजित किया जाता है। जिसमें रामलीला और रामविवाह ग्रामीण कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। सुंदर सजे हुए रथ पर राम-सीता बने बाल कलाकारों को बिठाकर ग्राम भृमण किया जाता हैं। राम-विवाह के सजीव झांकी व मनोहारी दृश्य को देखकर लोग आनंदित हो जाते हैं।

नयागांव में कई महान विभूति हुए, जिनके गांव के लिए किये गये कार्यो तथा योगदानों को शब्दों में सीमित कर पाना अत्यंत दुर्लभ कार्य है। यहाँ के कई विद्वान व्यक्ति राज्य और देश में लोकशासन, प्रशासन, समाजसेवा, साहित्य, राजनीति, देशसेवा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिये। साहित्यिक क्षेत्र में यहाँ के जनार्दन मिश्र ‘पंकज’ (भूतपूर्व प्राध्यापक, विश्व भारती शांति निकेतन, बंगाल), बीते जमाने के मशहूर कवि व लेखक विष्णुदेव यादव ‘विष्णु’, भूतपूर्व न्यायाधीश उमेश चंद्र शर्मा के नाम विशेष हैं।प्रोफेसर डॉ महेंद्र प्रसाद जयसवाल बिहार लोक सेवा आयोग में कई वर्षों तक सदस्य और  बिहार विश्वविद्यालय,  मुजफ्फफरपुर के कुलानुशासक थे। शिक्षाविद, उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक अनंत बाबू, राष्ट्र कवि अज्ञेय जी के भाई नित्यानंद ‘पंजाबी डॉक्टर’ की कर्मभूमि यह गांव रही हैं। नयागांव के केदार प्रसाद सिंह एक ऐसी विभूति हुये जिन्होंने भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के साथ छात्रावास में रहकर पढ़ाई किये थे। कौशल किशोर सिंह पटना उच्च न्यायालय के नामी गिरामी वकील थे। नयागांव के विभूतियों में इंद्रदेव सिंह, विष्णुदेव नारायण सिंह , गोपी सिंह, जोगी कुंवर, भोला कुंवर, महानंद चौधरी, त्रिवेणी प्रसाद सिंह, यमुना प्रसाद सिंह, जनार्दन सिंह, रामसुभग सिंह, रामसहाय कुंवर, रत्नेश्वर प्रसाद सिंह, अर्जुन प्रसाद सिंह जैसे कई महान विभूति हुए। इन लोगों ने गांव के सांस्कृतिक व शैक्षणिक विकास में सक्रिय योगदान निभाया था।इस गांव में प्रकृति अपने मनोहारी रूप से लोगों को आनन्दित करती हैं। गंगा नदी के तट पर स्थित इस गांव में चारों तरफ हरियाली ही हरियाली दिखती हैं। मुख्यतः कृषि क्षेत्र पर आधारित यह गांव दो पंचायतों और कई टोलों में विभाजित है जिसमें शतखुट्टी, पचखुट्टी, शिरोमणि टोला, यादव टोला, शिरियाटोला, वीरपुर टोला, राजपूत टोला, गोढियासी आदि है। यहाँ मुख्य रूप से केला, मकई, दलहन और गेंहू की खेती की जाती हैं। इस गांव में स्वास्थ्य के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है।शिक्षा के लिये प्राथमिक विद्यालय, मध्य विद्यालय, श्रीकृष्ण उच्च विद्यालय और इंटर कॉलेज भी है। वर्तमान में सरकारी औधोगिक प्रशिक्षण संस्थान कॉलेज का भी निर्माण कार्य चल रहा है। 

आगे नयागांव वासियों को चाहिए कि वे अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लें, संतोषजनक वर्तमान को सजाएं और स्वर्णिम भविष्य की ओर कदम बढ़ाएँ।

मारुति नंदन मिश्र, नयागांव, खगड़िया, बिहार

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B. N. Mandal University, Madhepura, Bihar, India

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