BNMU स्वास्थ युवा ही बना सकते हैं स्वास्थ भारत

*स्वास्थ युवा ही बना सकते हैं स्वास्थ भारत*

स्वास्थ्य मात्र बीमारियों के अभाव का नाम नहीं है। स्वास्थ्य के लिए हमें शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से संतुलित होना जरूरी है।

यह बात विश्वविद्यालय मनोविज्ञान विभाग एवं निदेशक (शै.) प्रो. (डाॅ.) एम. आई. रहमान ने कही। वे ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा के तत्वावधान में आयोजित फिट इंडिया कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे।


उन्होंने कहा कि हमें सिर्फ शारीरिक तंदुरूस्ती पर नहीं, बल्कि मानसिक एवं आध्यात्मिक उन्नति पर भी ध्यान देना चाहिए। हमें अपने मन को शांत रखना चाहिए और आपसी प्रेम एवं सदभाव बनाए रखना चाहिए।

उन्होंन कहा कि आज आधुनिक गलत जीवनशैली के कारण युवा वर्ग चिंता, भय, अवसाद, पैनिक अटैक, पछतावा, अपच, अनिद्रा आदि मनोवैज्ञानिक रोगों से ग्रसित हो गए हैं। उनमें गुस्सा, चिड़चिड़ापन अत्यधिक आने लगा है।

उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति जो अपने परिवार से काफी दूर हैं, वे अत्यधिक मनोविकारों से ग्रसित होने लगे हैं। लोग खाली रहने के कारण अपना अधिकतम समय मोबाइल या लैपटॉप पर दे रहे हैं। इसके कारण वे देर रात तक सो नहीं पाते हैं। जिस तरह से बच्चे किशोर एवं व्यस्क अपने-अपने मोबाइल के स्क्रीन से चिपके रहते हैं, उनमें कंप्यूटर वर्जन सिंड्रोम होने की संभावनाएं बढ़ती जा रही हैं। रोजगार और आय के स्रोत भी कम हो गए हैं।

उन्होंने आज लोगों को पौष्टिक आहार भी नहीं मिल पा रहा है। इससे उनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो रही है। लोगों की सोचने-समझने की क्षमता में कमी आ रही है।

विशिष्ट वक्ता विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली में पीआई डाॅ. विनीत भार्गव ने बताया कि युवावस्था में हम अपने भविष्य-निर्माण की चिंता में खो जाते हैं। भविष्य की चिंता में हमारा वर्तमान ही खतरे में पड़ जाता है। सबसे पहली चीज़ जो इस आपा-धापी में खोता है, वह है आपका स्वास्थ्य। शरीर ही वह माध्यम है जिसके जरिए आप धरती पर उपलब्ध संसाधनों का उपभोग करते हैं। यदि आपका स्वास्थ्य ही ठीक नहीं होगा तो आप सारी दुनिया की संपत्ति ही क्यों न अर्जित कर लें।

उन्होंने कहा कि युवावस्था में भरपूर जोश होता है और होश की कमी होती है। यहीं आपसे चूक हो जाती है। आप या तो किसी प्रकार के नशे में या गलत संगति में या उत्सुकतावश यौनाचार में प्रवेश कर जाते हैं। इससे युवाओं में एचआईवी जैसी संक्रामक बीमारी होने का खतरा बढ़ता है। गलत जीवनशैली व उससे पैदा होने वाली निराशा से युवा और भी कई मानसिक एवं शारीरिक बीमारियों से पीड़ित हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आजकल युवाओं में तनाव एवं अवसाद बढ़ रहे हैं। उनमें बीपी, सूगर एवं थायरॉइड का खतरा भी तेजी से बढ़ता जा रहा है।

उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया कि कोरोना में युवाओं एवं बच्चों में मोबाइल के प्रति अतिरिक्त आकर्षण बढ़ा। उनका यह तकनीकी प्रेम पैथोलॉजिकल लेवल तक पहुंच गया है। आप हम बहुत अधिक सूचनाग्राही हो गए हैं। इतना अधिक कि वह अब अपच के रूप में उभरकर सामने आ रहा है। आपके पास सूचना तो बहुत है, लेकिन आप जानते बहुत कम हैं।

उन्होंने कहा कि हमें अपने परिवार के सदस्यों के साथ अधिक से अधिक समय बिताना चाहिए। घर के छोटे-छोटे कामों में खुद को इन्वॉल्व करना मोबाइल पर समय बिताने से कहीं अच्छा है।

उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने स्लीपिंग और फ़ूड पैटर्न के बारे में भी अधिक सजग रहने की जरूरत है। देर रात तक जगना, जरूरत से ज्यादा भोजन करना व स्वच्छता की अनदेखी ये कुछ ऐसी भूलें जो युवा अक्सर करते हैं। परिणामस्वरूप आपके शरीर का केमिकल कोआर्डिनेशन बिगड़ता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरों की संभावना बढ़ जाती है।

उन्होंने कहा कि स्कूलों एवं कॉलेजों में साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड सर्विसेज़ की शुरुआत होनी चाहिए, इस पर भी जोर दिया। जहाँ बच्चे खुलकर अपनी बातों को साझा कर सकें और उनका समय रहते उचित मार्गदर्शन हो सके।

उन्होंने कहा कि आपका स्वास्थ्य आपके अपने हाथों में है। कोई आपको स्वस्थ नहीं रख सकता। वह आप ही हैं जो खुद को रख सकते हैं।

डाक्टर भी आपसे पूछकर ही आपका निदान एवं उपचार करता हैं। यदि हम स्वयं अपने शरीर के संकेतों को समझ लें और तदनुसार परहेज़ करें तो कम से कम बीमार होंगे।

उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य सिर्फ लंबा नहीं होना चाहिए, बल्कि लम्बे के साथ-साथ स्वस्थतापूर्ण एवं गुणवत्तापूर्ण जीवन जीना भी होना चाहिए। हमें अपने स्वास्थ्य की जिम्मेदारी पहले खुद समझना चाहिए।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि एनएसएस समन्वयक डॉ. अभय कुमार ने कहा कि फिट इंडिया कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों के बीच जागरूकता फैलाना है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने की। संचालन राजनीति विज्ञान विभाग के शोधार्थी सारंग तनय ने किया। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम पदाधिकारी, इकाई-iii डाॅ. स्वर्ण मणि ने किया।

इस अवसर पर के पी काॅलेज, मुरलीगंज के डाॅ. अमरेंद्र कुमार, शोधार्थी द्वय माधव कुमार एवं सौरव कुमार चौहान, पल्लवी कुमारी, शांतुन यदुवंशी, प्रिंस कुमार, तहसिन अख्तर, डेविड यादव, प्रिंस कुमार, अमरेंद्र झा, चन्द्रशेखर मिश्रा, ज्योति कुमारी, नैना आदि उपस्थित थे।

 

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B. N. Mandal University, Madhepura, Bihar, India

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