सिंडिकेट की गरिमा को बचाएं।
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बीएनएमयू, मधेपुरा के वर्तमान कुलपति जी ने सिंडिकेट को मजाक बनाकर रख दिया है। इनके दो वर्ष सात माह के कार्यालय में सिंडिकेट की एक भी विधिवत सामान्य बैठक नहीं हुई है। दो बार सीनेट में बजट पारित करने के निमित्त कुल चार (दो गुणा दो) बैठकें हुई हैं। गत दिनों नए पीएचडी रेगुलेशन को अंगीकृत करने के निमित्त ऑनलाइन बैठक आयोजित हुई थी, जिसमें किसी भी सदस्य को कुछ भी नहीं बोलने दिया गया। इस बार फिर ऑनलाइन बैठक स्नातकोत्तर के सिलेबस को अंगीकृत करने के लिए आयोजित है।
इस तरह सिंडिकेट की बैठक एक मजाक बनकर रह गई है। अतः हम सबों को मिलकर सिंडिकेट की गरिमा को बचाने के लिए प्रयास करने की जरूरत है। हमें हमेशा याद रहे कि कुलपति आएंगे, कुलपति जाएंगे, आज कोई पदाधिकारी है, कल कोई और पदाधिकारी बनेगा, लेकिन सिंडिकेट की गरिमा बची रहनी चाहिए-विश्वविद्यालय का लोकतांत्रिक ढांचा बचा रहना चाहिए।
-सुधांशु शेखर, सदस्य, सीनेट
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