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Bihar। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में परबत्ता (खगड़िया) के क्रांतिकारियों की अहम भूमिका

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भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में परबत्ता (खगड़िया) के क्रांतिकारियों की अहम भूमिका



बिहार राज्यान्तर्गत खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड के दर्जनों क्रांतिकारियों ने देश की आजादी में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिये थे ।
भले ही उन वीर सेनानियों के नाम इतिहास के पन्नों में अंकित नहीं है किंतु आज भी वे अमर है। यहाँ के बुजुर्गों से उनकी वीरता की कहानी आज भी सुनने को मिलती है ।


भारत माँ की सेवा और इसके लिए मर मिटने की भावना परबत्ता के क्रांतिवीरों में कभी कम नहीं हुई । 14 अगस्त 1930 को अगुवानी जहाज घाट पर अंग्रेजों के आगमन को रोकने के लिए सैकड़ो की संख्या में यहाँ के क्रांतिकारी लाठी – भाला लेकर पहुंचे थे । सबडिवीजनल ऑफिसर सार्जेंट और सैनिकों के साथ जहाज से पहुँचे और भीड़ पर गोलियां चलाने लगे । इस घटना में कई क्रांतिकारी घायल हुए थे । ब्रिटिश सरकार के दमन के कारण यहाँ के क्रांतिकारियों ने नारायणपुर और पसराहा के बीच रेल पटरियों को उखाड़े थे।

सन 1921 में तिलक स्वराज फंड के चंदे के क्रम में बिहार केसरी डॉ श्री कृष्ण सिंह जी के साथ कन्हैयाचक गांव के स्वतंत्रता सेनानी स्व सुरेश चंद्र मिश्र और स्व सूर्य नारायण शर्मा जी थे ।जमुना चौधरी

कन्हैयाचक गांव के स्व जमुना चौधरी जी स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में अंग्रेजों से लोहा लेते हुए समाज में देशभक्ति की भावना उत्पन्न किये थे । 16 फरवरी 1943 को मुंगेर न्यायालय के मजिस्ट्रेट द्वारा 9 माह की सश्रम कारावास और 25 रुपये का जुर्माना सुनाया गया था । इस सजा को इन्होंने केंद्रीय कारा भागलपुर में काटे थे ।आप गरीबों के मसीहा के रूप में भी जाने जाते थे ।

परबत्ता प्रखंड के कवेला पंचायत अन्तर्गत डुमरिया खुर्द गांव निवासी स्वतंत्रता सेनानी स्व शालिग्राम मिश्र जी महान क्रांतिकारी थे । चंद्रशेखर आजाद के विचारों से प्रभावित थे । सन 1930 में क्रांतिकारी स्व शालिग्राम मिश्र पिकेटिंग में भाग लेने गये थे तो उनपर अंग्रेजों ने जमकर कोड़े बरसाये थे । उनके मुख से सिर्फ “भारत माता की जय” निकलता रहा था । इन्हें 13 साल की उम्र में छह माह के लिए सश्रम कारावास की सजा सुनाई गयी थी । इस सजा को मुंगेर और पटना जेल में काटे थे । सन 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भी इनकी अहम भूमिका रही थी ।

स्वतंत्रता संग्राम में परबत्ता प्रखंड के भरतखंड गांव निवासी स्व दीनानाथ मिश्र का योगदान रहा था । बताया जाता है कि जयप्रकाश नारायण, डॉ. अरुणा असरफ अली एवं डॉ. राममनोहर लोहिया जब नेपाल के जेल में बंद थे तो उनलोगों को छुड़वाने में दीनानाथ मिश्र ने बड़ी भूमिका निभाई थी। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने नारायणपुर व पसराहा स्टेशन के बीच रेलवे लाइन को उखाड़ फेंका था। इसके लिए अंग्रेजों ने इन्हें जिंदा या मूर्दा पकड़ने पर इनाम भी घोषित किया था। गिरफ्तारी बाद इन्हें भागलपुर सेंट्रल जेल में रखा गया था। बताया जाता है कि इनको साथ देने वाले महेंद्र गोप को फांसी की सजा दी गई थी। भारत सरकार ने इन्हें ताम्रपत्र देकर सम्मानित भी किया था। 15 अगस्त 2006 को इनका निधन हुआ था ।

(संदर्भ व फोटो :- लाइव खगड़िया , दैनिक जागरण )

 

मारूति नंदन मिश्र
नयागांव ,परबत्ता (खगड़िया)

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