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भारतीय दर्शन, संस्कृत साहित्य और अंतर-धार्मिक संवाद की अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विदुषी प्रो. कला आचार्य जी का देवलोकगमन

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शोक सन्देश
भारतीय दर्शन, संस्कृत साहित्य और अंतर-धार्मिक संवाद की अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विदुषी प्रो. कला आचार्य जी का देवलोकगमन अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक है। उनका निधन संपूर्ण सारस्वत जगत, संस्कृत संस्कृति और दर्शन परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति है।

महोदया का इस संस्थान से अटूट बौद्धिक व भावनात्मक संबंध रहा। के. जे. सोमैया भारतीय संस्कृति पीठम् की निदेशक के रूप में कई वर्षों तक अपना अमूल्य मार्गदर्शन प्रदान किया।

वेद, वेदांत, योगशास्त्र और व्याकरण की प्रकांड ज्ञाता के रूप में उन्होंने 14 उत्कृष्ट ग्रंथों का संपादन और 50 से अधिक शोध-पत्रों का लेखन किया। ‘बुद्धानुस्मृति’ और ‘पौराणिक कांसेप्ट ऑफ दान’ जैसी उनकी कृतियाँ शोधार्थियों के लिए आज भी अमूल्य निधि हैं।

वर्ष 2009 में ‘विश्व धर्म संसद’ (Parliament of the World’s Religions) की राजदूत के रूप में उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, जापान और वेटिकन सिटी सहित कई देशों का भ्रमण कर वैश्विक मंचों पर भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और विश्व-बंधुत्व की अलख जगाई। महाराष्ट्र सरकार द्वारा उन्हें ‘संस्कृत पंडिता’, ‘महाकवि कालिदास संस्कृत साधना पुरस्कार’ एवं ‘उत्कृष्ट विश्वविद्यालय शिक्षक पुरस्कार’ से अलंकृत किया गया था।

प्रो. कला आचार्य महोदया केवल एक प्रखर शिक्षाविद ही नहीं, बल्कि ज्ञान, वात्सल्य और मानवीय सद्भाव की साक्षात प्रतिमूर्ति थीं।

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिवार प्रो. कला आचार्य जी के पावन चरणों में अश्रुपूरित श्रद्धासुमन अर्पित करता है। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में उत्तम स्थान प्रदान करे तथा उनके शोकाकुल परिजनों, शिष्यों व प्रशंसकों को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति दे।

ॐ शांतिः! भावपूर्ण श्रद्धांजलि !

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