बिल्कुल आसान था डॉ. कविता भट्ट ‘शैलपुत्री’ श्रीनगर गढ़वाल, उत्तराखंड
बिल्कुल आसान था
नागफनी उगाना
मगर मैं न उगा सकी।
मेहनत का काम था;
फूल उगाना
मगर क्या करूँ ?
मुझे फूलों से प्यार इस क़दर था
कि दिल की ज़मीं सींचने में
मैंने उम्र गुज़ार दी।
मुस्काते फूलों को रौंदकर
वे ख़ुद को बागवान कहते रहे।

डॉ कविता भट्ट ‘शैलपुत्री’
श्रीनगर गढ़वाल, उत्तराखंड
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