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जल प्रबंधन बेहद जरूरी, छोटे-छोट प्रयास से बढ़ाएं कदम : प्रो. विमलेंदु शेखर झा – विश्वविद्यालय स्तरीय रजत जयंती भाषण प्रतियोगिता में बोले कुलपति

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जल प्रबंधन बेहद जरूरी, छोटे-छोट प्रयास से बढ़ाएं कदम : प्रो. विमलेंदु शेखर झा

– विश्वविद्यालय स्तरीय रजत जयंती भाषण प्रतियोगिता में बोले कुलपति

 

– कहा, दैनिक जागरण का यह प्रयास सराहनीय, गांवों तक चलाना होगा जागरूकता अभियान

– अगर समय रहते नहीं चेते तो जल संकट को लेकर होगा तीसरा विश्व युद्ध

 

जागरण संवाददाता, मधेपुरा : चारों ओर बिछ रहे कंक्रीट के जाल व प्रकृति से दूर हाेने का दुष्प्रभाव अब दिखने लगा है। कहीं बाढ़ आपदा है तो कहीं सुखाड़ जैसे हालात बन रहे हैं। आने वाला समय जल संकट की ओर आगाह कर रहा है। ऐसे वक्त में दैनिक जागरण का यह प्रयास सराहनीय है। छात्रों के बीच जल प्रबंधन और 2050 का बिहार जैसी प्रमुख विषय को लेकर जाना दैनिक जागरण अखबार के समाजिक सरोकार का परिचायक है। उक्त बातें भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.डा. विमलेंदु शेखर झा ने कही। वे दैनिक जागरण द्वारा आयोजित विश्वविद्यालय स्तरीय रजत जयंती भाषण प्रतियोगिता के अवसर पर बोल रहे थे।

टीपी कालेज सभागार में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सह सह कुलपति प्रो. डा. विमलेंदु शेखर झा ने जल संकट को लेकर गंभीर चिंता जताई और कहा, जल ही जीवन है। अभी से जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में गहरे जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। जल प्रबंधन बेहद जरूरी है। अगर हम नहीं चेते तो वर्ष 2050 तक बिहार की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। कुलपति ने कहा कि बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, यहां ज्यादातर लोग खेती पर निर्भर हैं। खेती के लिए सिंचाई जरूरी है और सिंचाई का आधार जल है। पानी ही नहीं रहेगा, तो खेती करना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए जल का वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग बेहद जरूरी है। हमें इसके लिए छोटे-छोटे प्रयास से कमद बढ़ाने होंगे। सड़क किनारे बह रहे नल का जल को हम बंद रख सकते हैं। अनावश्यक पानी के खर्च पर नियंत्रण कर सकते हैं। इसके लिए गांवों में भी पहुंचना होगा। लोगों को जागरूक करना होगा। उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि अगर हम अभी से नहीं जागृत हुए तो आने वाले समय में जल संकट ही तीसरा विश्व युद्ध का कारण बन सकता है।

 

जल संरक्षण के उपायों को बताने के लिए गांवों तक पहुंचना हमारी जिम्मेदारी :

कुलपति ने बताया कि जलवायु परिवर्तन, अनियंत्रित शहरीकरण, भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन और नदियों के संतुलन में गड़बड़ी के कारण जल संसाधनों पर भारी दबाव बन रहा है। समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में जल संकट और गंभीर हो सकता है। जल का पुनः उपयोग, वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण जैसे उपायों को सरकार की नीतियों में प्राथमिकता दी गई है। लेकिन दैनिक जागरण के इस प्रयास को हम सबको आगे बढ़ना होगा। उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों से भी अपील किया कि वह जल जागरूकता अभियानों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और जल संरक्षण को शिक्षा का हिस्सा बनाएं। एनएसएस के माध्यम से इसपर अभियान चलाने की भी उन्होंने बात कही।

 

जल प्रबंधन में समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी : कुलसचिव

कार्यक्रम के विविष्ट अतिथि सह बीएनएमयू के कुलसचिव प्रो. डा. अशोक कुमार ठाकुर ने भी जल संकट पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह केवल पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि यह समाज और अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा संकट बन चुका है। जल प्रबंधन केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। आम लोग, छात्र-छात्राएं, शिक्षक, किसान समेत हम सबको मिलकर जल बचाने की दिशा में काम करना होगा। उन्होंने साफ संदेश दिया कि जल संरक्षण को लेकर समाज में अभी से जागरूकता नहीं आई, तो भविष्य में जीवन कठिन हो जाएगा। ऐसे में जरूरी है कि हर व्यक्ति जल के महत्व को समझे और इसे बचाने में अपना योगदान दें।

 

जल प्रबंधन हो हमारी प्राथमिकता :

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रधानाचार्य प्रो. डा. कैलाश प्रसाद यादव ने कहा कि जल संकट को हम प्रत्यक्ष रूप से भी अनुभव भी करने लगे हैं। हमें हर हाल में जल संचयन के प्रति जागरूकता बढ़ानी होगी। नई पीढ़ी के सिर पर इसकी जिम्मेदारी आन पड़ी है। पौधारोपण के साथ-साथ जल संचयन को लेकर हम समाज में जागरूकता अभियान चलाएं, इससे पूर्व हमें अपने घर से ही इसकी शुरूआत करनी होगी। कार्यक्रम का संचालन एनएसएस के कार्यक्रम समन्वयक डा. सुधांशु शेखर ने किया।वहीं संयोजन ले. गुड्डू कुमार के द्वारा किया गया। डा. रंजन समेत कालेज के अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे।

 

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राजेंद्र मिश्र कालेज सहरसा की पूजा कुमारी रहीं अव्वल :

 

– बीएसएस कालेज सुपौल के सूरज को मिला द्वितीय स्थान व टीपी कालेज मधेपुरा की वाणी को तृतीय

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दैनिक जागरण के 25वें स्थापना दिवस पर आयोजित रजत जयंती भाषण प्रतियाेगिता के द्वितीय चरण के कार्यक्रम का आयोजन शुक्रवार को ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय सभागार में आयोजित किया गया। कालेज स्तर पर आयोजित प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर रहे विजेता विश्वविद्यालय स्तर पर आयोजित प्रतियोगिता में शामिल हुए। जिनमें राजेंद्र मिश्र कालेज की छात्रा पूजा कुमारी प्रथम स्थान प्राप्त कीं। वहीं बीएसएस कालेज सुपौल के छात्र सुरज कुमार द्वितीय स्थान पर रहे और ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय मधेपुरा की छात्रा वाणी कुमारी तृतीय स्थान पर रहीं। अन्य प्रतिभागियों में बीएनएमयू नार्थ कैंपस स्थित पीजी सेंटर के छात्र धैर्य स्वराज, सर्व नारायण सिंह राम कुमार सिंह महाविद्यालय सहरसा के छात्र यशराज, एमएलटी कालेज सहरसा के छात्र निखिल कुमार, बीएनएमवी कालेज मधेपुरा की छात्रा शबनम कुमारी ने भी जल प्रबंधन और 2050 का बिहार विषय पर सारगर्भित भाषण की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में जज की भूमिका में डा. गौरव चौधरी, के. के. भारती और डा. मीनू सोढ़ी रहीं।

 

जल संचयन के प्रति जागरूकता बढ़ाना हो हमार ध्येय :

 

जागरण संवाददाता, मधेपुरा : ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय मधेपुरा में शुक्रवार को दैनिक जागरण के रजत जयंती के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय स्तरीय भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न महाविद्यालयों से आए प्रतिभागियों ने भाग लिया। भाषण प्रतियोगिता का विषय जल प्रबंधन और 2050 का बिहार था। जिस पर प्रतिभागियों ने अपने विचार व्यक्त किए। प्रतियोगिता का उद्देश्य छात्र-छात्राओं में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और जल की महत्ता को समझाना था। कार्यक्रम के समापन और पुरस्कार वितरण समारोह में कई अतिथियों की उपस्थिति रही और सभी वक्ताओं ने अपने संबोधन में जल संरक्षण के महत्व पर जोर दिया।

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जल प्रबंधन बड़ी चुनौती होगी :

2050 तक बिहार की जल समस्याएं और जल संसाधनों का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन सकती है। सिर्फ सरकार नहीं, लोगों की भागीदारी भी जल प्रबंधन में जरूरी है। 2050 तक यदि समाज में जल प्रबंधन व संचयन के प्रति चेतना नहीं आई, तो तकनीक और नीति भी विफल हो जाएगी। इसके लिए जागरूकता के साथ-साथ जरूरी उपाय भी किए जाएं।

 

– डा. सुधांशु शेखर, कार्यक्रम समन्वयक, एनएसएस।

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दैनिक जागरण का यह प्रयास सराहनीय है। छात्रों के बीच ऐसे विषय पर छोटे-छोटे अंतराल पर चर्चा के साथ-साथ जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। छोटे-छोटे प्रयास से भी जल संरक्षण में बड़ा योगदान दे सकते हैं। वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) की आवश्यकता और तकनीक को समझने और अपनाने की जरूरत है।

– डा. मीनू सोढ़ी, शिक्षक, टीपी कालेज मधेपुरा।

 

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2050 तक बिहार में जल संकट का प्रमुख कारण अनियंत्रित भूजल दोहन और नदियों का प्रदूषण होगा। हमें जल स्रोतों का संरक्षण, वर्षा जल संचयन और पारंपरिक जल संरचनाओं को पुनर्जीवित करना होगा। गांवों में जल संचयन अभियान चलाने की जरूरत है।

 

– डा. गौरव चौधरी, शिक्षक, टीपी कालेज मधेपुरा।

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स्कूल से लेकर कालेज स्तर पर जल संचयन की पहल शुरू की जा सकती है। आज जल संकट एक गंभीर समस्या बन चुका है। हमें जल बचाने की आदत अपने दैनिक जीवन से शुरू करनी होगी। इसके लिए स्कूल से ही बच्चों को इस विषय पर जागरूक करने की आवश्यकता है। हम सबको इस विषय को गंभीरता से लेकर जागरूक होना होगा।

– के. के. भारती, शिक्षक, टीपी कालेज मधेपुरा।

 

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बिहार की कृषि पूरी तरह जल पर निर्भर है। यदि जल प्रबंधन पर ध्यान नहीं दिया गया तो 2050 तक खाद्य उत्पादन पर गहरा असर पड़ेगा। एक तरफ सुखाड़ और दूसरी तरफ बाढ़ आपदा जैसे हालात बने रहते हैं। ऐसे में नदी जोड़ योजना को भी पूरा करने की जरूरत है। हर स्तर पर जागरूकता अभियान के साथ-साथ प्रयास भी तेज करने होंगे।

 

– पी. गोस्वामी, निदेशक, गोस्वामी आइएएस एकेडमी भागलपुर।

जल संचयन के प्रति जागरूकता बढ़ाना हो हमार ध्येय :

 

जागरण संवाददाता, मधेपुरा : ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय मधेपुरा में शुक्रवार को दैनिक जागरण के रजत जयंती के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय स्तरीय भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न महाविद्यालयों से आए प्रतिभागियों ने भाग लिया। भाषण प्रतियोगिता का विषय जल प्रबंधन और 2050 का बिहार था। जिस पर प्रतिभागियों ने अपने विचार व्यक्त किए। प्रतियोगिता का उद्देश्य छात्र-छात्राओं में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और जल की महत्ता को समझाना था। कार्यक्रम के समापन और पुरस्कार वितरण समारोह में कई अतिथियों की उपस्थिति रही और सभी वक्ताओं ने अपने संबोधन में

जल संरक्षण के महत्व पर जोर दिया।

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