Search
Close this search box.

कविता/ आजकल /डॉ. कविता भट्ट ‘शैलपुत्री’

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

आजकल
डॉ कविता भट्ट ‘शैलपुत्री’

धड़कने बदल रही करवटें आजकल।
चाँद के माथे पर हैं सलवटें आजकल।
यों तो अपना ही था वो मेरा, दोस्तों!
महफिलों की जुबाँ नफ़रतें आजकल।

आँखें चुपचाप हैं, दिल भी खामोश है।
देखो तो सदमें में हैं गुरबतें आजकल।
जिसको देखो वही रंग-रलियों में है।
कहाँ राँझे सी हैं उल्फ़तें आजकल।

पत्थरों से लड़ी, मैं नदी की तरह।
उसकी सागर सी हरकतें आजकल।
बस समंदर ही था मेरा राहे सफर।
हर नदी से उसे मोहब्बतें आजकल।                -डॉ कविता भट्ट ‘शैलपुत्री’

READ MORE

बिहार के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती सबीहा हसनैन के साथ राष्ट्रपति भवन में माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से शिष्टाचार मुलाकात की।

[the_ad id="32069"]

READ MORE

बिहार के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती सबीहा हसनैन के साथ राष्ट्रपति भवन में माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से शिष्टाचार मुलाकात की।