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TMBU। प्रोफेसर प्रेम प्रभाकर के निधन पर शोक

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प्रेम प्रभाकर के निधन पर शोक

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर में हिंदी के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं अंगिका विभाग के अध्यक्ष प्रो. (डाॅ.) प्रेम प्रभाकर का शुक्रवार की सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।वे साहित्य-संस्कृति की शोध-पत्रिका “अंगचंपा” के यशस्वी संपादक और जयप्रकाश आंदोलन के समर्पित सिपाही थे।

बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा से उनका विशेष लगाव था। वे अगस्त 2020 में भी मधेपुरा आए थे और उन्होंने यहाँ बीएनएमयू संवाद व्याख्यानमाला के तहत ‘साहित्य और समाज’ विषय पर व्याख्यान दिया था। https://youtu.be/B5VHbyVbwbo

प्रोफेसर प्रेम प्रभाकर के निधन पर मधेपुरा के शिक्षकों ने भी शोक व्यक्त किया है।

https://youtu.be/fmeXvyKjVdY हिंदी विभाग की अध्यक्ष सह मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. (डाॅ.) उषा सिन्हा ने कहा है कि प्रेम प्रभाकर के निधन का समाचार सुनकर बहुत बुरा लग रहा है। यह अत्यंत दुखद है। अचानक उनके निधन के बारे में सुनकर विश्वविद्यालय हिंदी विभाग मर्माहत है। एक महीने पहले हिंदी विभाग में मौखिकी लेने आए थे। वे जिंदादिल, हंसमुख एवं मिलनसार इंसान थे। सच्चे अर्थों में वे साहित्यकार थे। एक साहित्यकार के रूप में वे हमेशा हम सब के बीच जीवित रहेंगे। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें और उनके परिवार को कष्ट सहने की क्षमता प्रदान करेें।

पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. (डाॅ.) विनय कुमार चौधरी ने कहा है कि प्रेम प्रभाकर एक उम्दा साहित्यकार और अनुठे मित्र थे। https://youtu.be/bi3Eki6Qqns

उनके निधन से पूरे साहित्य-जगत के साथ-साथ उन्हें भी व्यक्तिगत क्षति हुई है। साहित्यकार डाॅ. सिद्धेश्वर काश्यप ने कहा है कि वे एक अत्यंत विद्वान और नेक दिल इंसान थे। उनके असमय चले जाने से बिहार के शिक्षा जगत और विशेषकर हिंदी साहित्य में एक रिक्तता आ गई है। जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने कहा है कि उन्होंने अपना एक अभिभावक, मार्गदर्शक एवं शुभचिंतक खो दिया है। उनका इस तरह अचानक चले जाना एक सदमे की तरह है। वे हमेशा हम सबों के दिलों में बसे रहेंगे।

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