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ICPR व्यापक है भारतीय जीवन-दृष्टि : दवे

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व्यापक है भारतीय जीवन-दृष्टि : दवे
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भारतीय दर्शन संपूर्ण संसार में एकत्व का आदर्श प्रस्तुत करता है। इसमें “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना निहित है।

यह बात मुख्य वक्ता श्री जनक एम. दवे, निदेशक, अक्षरधाम, नई दिल्ली ने कही।

वे बुधवार को ‘जीवन का विकास : हिंदू दृष्टि’ विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। व्याख्यान का आयोजन भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् (आईसीपीआर), शैक्षणिक केंद्र, लखनऊ द्वारा आयोजित किया गया।

उन्होंने कहा कि हिंदू जीवन-दृष्टि वास्तव में सनातन-दृष्टि है और यही मूल भारतीय दृष्टि है। इसमें स्थायित्व एवं गतिशीलता साथ-साथ मौजूद है।

उन्होंने कहा कि दुनिया से रोम एवं मिश्र अदि प्राचीन सभ्यताएँ मिट गईं, लेकिन भारतीय सभ्यता- संस्कृति आज भी कायम है। सैकड़ों विदेशी दुश्मनों एवं आंतरिक झंझावातों के बावजूद भारत की हस्ती कायम है। इसमें भारतीय जीवन-दृष्टि की महती भूमिका है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि आईसीपीआर के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर डाॅ. एस. आर. भट्ट ने कहा कि भारतीय संस्कृति एकांगी नहीं है। हमारी यह मान्यता है कि एक में सब है और सब में एक है। हमारी संस्कृति सतत परिवर्तनकामी है, लेकिन उसके मूल में है स्थायित्व।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हमें पशुत्व से मनुष्यत्व की ओर और इससे भी आगे देवत्व की ओर ले जाती है।

उन्होंने युवाओं से अपील की कि भारतीय दार्शनिक चिंतन को आगे बढ़ाएँ।

अध्यक्षीय उद्धबोधन में आईसीपीआर के अध्यक्ष प्रो. रमेशचन्द्र सिन्हा ने कहा कि भारतीय दार्शनिक चिंतन का आयाम काफी व्यापक है। इसमें विकास की अवधारणा एकरेखीय अथवा द्वंद्वात्मक नहीं, बल्कि चक्रीय है।

उन्होंने इस बात पर विशेष रूप से ध्यान आकृष्ट किया कि भारतीय दर्शन में सर्वधर्म समभाव की जगह सर्वधर्म सदभाव को स्वीकार किया गया है।

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे भारतीय जीवन-दृष्टि को जानें-समझें एवं अपनाएँ और इसे आगे बढ़ाने का प्रयास करें।

स्वागत उदबोधन सदस्य- सचिव प्रो. सच्चिदानंद मिश्र ने किया। निदेशक (शोध एवं योजना) डॉ. पूजा व्यास ने की। धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ सलाहकार डॉ. जयशंकर सिंह ने किया।

इस अवसर पर अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के अध्यक्ष प्रोफेसर डाॅ. जटाशंकर, महामंत्री डाॅ. जे. एस. दुबे, डाॅ. सभाजीत मिश्र, डाॅ. गीता मेहता, डाॅ. पूनम सिंह, डाॅ. कृष्णैया, डाॅ. जयंत उपाध्याय, डाॅ. भारती द्विवेदी, डाॅ. सूर्यप्रकाश पांडेय, डाॅ. घनश्याम पाल, डाॅ. प्रताप निर्भय सिंह, डाॅ. डाॅ. रेखा यादव, डाॅ. क्षमा तिवारी, अलिसा चौधरी, कुमार प्रतिभा सिंह, अनामिका त्रिपाठी, इंदु प्रकाश मिश्र, विजय कुमार जैन, प्रियंका प्रिया आदि उपस्थित थे।

भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा की ओर से असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुधांशु शेखर की इसमें महती भागीदारी रही।
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-सुधांशु शेखर
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