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BNMU सीनेटर बने डॉ. सुधांशु।

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*सीनेटर बने डॉ. सुधांशु*

बीएनएमयू की अंगीभूत इकाई टीपी कॉलेज, मधेपुरा के स्नातकोत्तर दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. सुधांशु शेखर ने सीनेट चुनाव ग्रुप-बी में सामान्य कोटि में विजयश्री हासिल की है। उन्होंने प्रथम वरीयता में जीत के लिए आवश्यक 45 मत के बरक्स 55 मत प्राप्त किया।

जीत के बाद डॉ. शेखर ने सबसे पहले विश्वविद्यालय प्रशासनिक परिसर अवस्थित राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, महामना भूपेन्द्र नारायण मंडल, डॉ. रवि एवं डॉ. महावीर प्रसाद यादव के प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद उन्होंने टी. पी. कॉलेज एवं पी. एस. कॉलेज में ठाकुर प्रसाद, पार्वती देवी एवं कीर्ति नारायण मंडल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।

डॉ. शेखर ने शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष चुनाव-संचालन हेतु कुलपति प्रो. बी. एस. झा, डीएसडब्लू प्रो. अशोक कुमार एवं कुलसचिव प्रो. अशोक कुमार सिंह के प्रति साधुवाद व्यक्त किया है। उन्होंने चुनाव में सहयोग एवं समर्थन देने वाले सभी शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया है और कहा है कि वे आगे सभी को साथ लेकर कार्य करेंगे। उन्होंने ‘उम्मीदवार मैं नहीं, आप’ को अपना स्लोगन बनाया था और ‘काम किया है, काम करेंगे’ के नारे के साथ मैदान में थे।

*डॉ. शेखर के संकल्प पत्र की रही चर्चा*

सीनेट चुनाव-2026 में डॉ. शेखर द्वारा जारी संकल्प-पत्र काफी चर्चा में रहा। संकल्प-पत्र में डॉ. शेखर कहा है कि वे सभी वर्गों के शिक्षकों के हित में कार्य करेंगे। शिक्षकों, विभागाध्यक्षों एवं प्रधानाचार्यों के मान-सम्मान तथा उनके हक अधिकारों की रक्षा हेतु हर संभव प्रयास किया जाएगा और इन सबों के स्वाभिमान के साथ किसी भी परिस्थिति मे कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि वे अपनी नियुक्ति के समय (जून 2017) से ही शिक्षकों के विभिन्न मुद्दों को लेकर संघर्ष करते रहे हैं। उन्होंने बीपीएससी बैच के शिक्षकों के वेतन निर्धारण, सेवा संपुष्टि, प्रोन्नति, एरियर भुगतान सहित विभिन्न कार्यों को कराने में अहम भूमिका निभाई है। आगे बीएसयूएससी के माध्यम से नियुक्त शिक्षकों की भी सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि सभी शिक्षकों को सहज-सुलभ रूप से अंतर विश्वविद्यालय स्थानांतरण के लिए नो-ऑब्जेक्शन दिलाया जाएगा। सभी शिक्षकों की ससमय प्रोन्नति दिलाई जाएगी और प्रोन्नति-प्रक्रिया का संपादन नियमित एवं निर्बाध रूप से सुनिश्चित कराया जाएगा। सभी शिक्षकों को मातृत्व अवकाश एवं पितृत्व अवकाश सहित सभी अवकाश सहज-सुलभ रूप में दिलाया जाएगा। सभी महाविद्यालयों में शिशु पालना घर एवं सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन लगवाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि सभी शिक्षकों को सीआईए वीक्षण कार्य एवं मूल्यांकन कार्य हेतु भी पारिश्रमिक का भुगतान कराया जाएगा। गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देने हेतु शिक्षकों के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर फेलोशिप एवं रिसर्च प्रोजेक्ट की शुरूआत करायी जाएगी।

उन्होंने कहा है कि बीएनएमयू एवं इसके अंतर्गत आने वाले सभी महाविद्यालयों का नैक से मूल्यांकन सुनिश्चित कराने का प्रयास कराया जाएगा। सभी महाविद्यालयों में वर्ग कक्ष, स्मार्ट क्लासरूम, सेमिनार हॉल, शौचालय, वाचनालय आदि बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएगी। सभी महाविद्यालयों के पुस्तकालय एवं प्रयोगशाला को सुसज्जित एवं सुव्यवस्थित कराया जाएगा।

उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्त शिक्षकों को नियमित रूप से पेंशन का भुगतान कराया जाएगा और सेवांत लाभ का भुगतान सेवानिवृत्ति की तिथि के दिन ही सुनिश्चित कराया जाएगा। एसबी सिन्हा कमीशन अच्छादित शिक्षकों एवं कर्मचारियों को पूर्ण वेतन, पेंशन एवं अन्य सेवांत लाभ सुनिश्चित कराया जाएगा। अतिथि सहायक प्राध्यापकों की सेवा नियमितीकरण कराया जाएगा। अतिथि शिक्षकों सहित सभी शिक्षकों को महीने के प्रथम सप्ताह में वेतन भुगतान सुनिश्चित कराया जाएगा एवं अन्य सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी।

उन्होंने बताया कि बी.एड. शिक्षकों का वेतन प्रति माह कम-से-कम 50 हजार रूपए निर्धारित कराया जाएगा।बीसीए, बीबीए एवं बीटीएसपी के शिक्षकों को नियमित रूप से प्रति माह 25 हजार रूपए वेतन दिलाया जाएगा।

*डॉ. शेखर की है एक खास पहचान*

डॉ. शेखर की शिक्षा-जगत में एक खास पहचान है। उन्होंने बीएनएमयू में कई महत्वपूर्ण पदों को सुशोभित किया है। वे राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के कार्यक्रम समन्वयक के पद से इस्तीफा देकर सीनेट चुनाव में अपना नामांकन दर्ज किया था। उहोंने अपने महज नौ महीने के कार्यालय में कुलपति प्रो. बी. एस. झा के मार्गदर्शन में एनएसएस को नई ऊंचाई तक पहुंचाया।

*जून 2017 से हैं असिस्टेंट प्रोफेसर*
डॉ. शेखर ने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी), पटना के माध्यम से 3 जून, 2017 को टीपी कॉलेज में योगदान दिया। इसके पहले से ही इन्होंने शिक्षकों के हित में कार्य करना शुरू कर दिया था। इन्होंने तत्कालीन कुलपति प्रो. अवध किशोर राय एवं प्रतिकुलपति प्रो. फारुक अली के सहयोग से शिक्षकों के पदस्थापना को सरल एवं तीव्र बनाया। फिर जब उन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन में जिम्मेदारी मिली, तो वहां भी उन्होंने हमेशा शिक्षक-हित में कार्य किया।

यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि प्रो. अवध किशोर राय ने डॉ. शेखर को अगस्त, 2017 में जनसंपर्क पदाधिकारी की जिम्मेदारी दी। इन्होंने विश्वविद्यालय की सकारात्मक छवि बनाने और शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित करने में अविस्मरणीय योगदान दिया।
आगे जुलाई 2020 में तत्कालीन प्रभारी कुलपति प्रो. ज्ञानंजय द्विवेदी ने डॉ. शेखर को जनसंपर्क पदाधिकारी के अतिरिक्त उपकुलसचिव (अकादमिक) की भी जिम्मेदारी दी। सितंबर 2021 में तत्कालीन कुलपति प्रो. आर. के. पी. रमण ने डॉ. शेखर को अन्य दायित्वों से मुक्त कर उपकुलसचिव (स्थापना) का नया दायित्व प्रदान किया। इन्होंने विश्वविद्यालय के समग्र शैक्षणिक एवं प्रशासनिक उन्नयन के लिए कई उल्लेखनीय कार्य किए।

*शैक्षणिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में है महती भूमिका*
डॉ. शेखर ने बीएनएमयू में शैक्षणिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में महती भूमिका निभाई है। इनके द्वारा विश्वविद्यालय दर्शनशास्त्र विभाग और ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा में कई कार्यक्रमों का आयोजन कराया गया।

*विभिन्न संगठनों में सक्रिय*
डॉ. शेखर छात्र जीवन से ही विभिन्न शैक्षणिक संगठनों में सक्रिय रहे हैं और हर जगह इन्होंने अपनी दूरदर्शिता का परिचय दिया है। टी. पी. कॉलेज शिक्षक संघ के सचिव के रूप में इन्होंने कई अभिनव शुरुआत की। दर्शन परिषद् , बिहार के प्रदेश संयुक्त सचिव एवं मीडिया प्रभारी हैं और अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के सहसचिव भी हैं। इसके अलावा ये डॉ. रवि विचार मंच के सचिव तथा प्रांगण रंगमंच के संरक्षक सहित विभिन्न भूमिकाओं में भी सक्रिय हैं।

*शोध के क्षेत्र में है पहचान*
डॉ. शेखर ने संपादन एवं लेखन की दुनिया में भी एक विशिष्ट स्थान बनाया है। इनकी अब तक चार स्वतंत्र पुस्तकें प्रकाशित हैं। इनमें सामाजिक न्याय : आंबेडकर विचार और आधुनिक संदर्भ (2014), गांधी विमर्श (2015), भूमंडलीकरण और मानवाधिकार (2017) एवं गांधी-अंबेडकर और मानवाधिकार (2024) हैं। इन्होंने आधे दर्जन पुस्तकों का संपादन भी किया है और शोध-पत्रिका ‘दर्शना’ एवं ‘सफाली जर्नल ऑफ सोशल रिसर्च’ के संपादक भी हैं।

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