मेरे गृह जिला बांका के निवासी मित्रवर डॉ अमित कुमार जी एवं उनकी धर्मपत्नी कवयित्री डाॅ. संयुक्ता भारती जी दोनों को इतिहास विषय में एक साथ असिस्टेंट प्रोफेसर बनने पर बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।
यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि डॉ. अमित जी तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर में इतिहास के प्राध्यापक तथा अंबेडकर विचार एवं समाज कार्य विभाग के अध्यक्ष रहे प्रखर बहुजन चिंतक प्रो. विलक्षण जी (जो राजकीय अंबेडकर कल्याण छात्रावास के अधीक्षक हुआ करते थे) के भतिजा हैं। मैं जब भी प्रो. विलक्षण से मिलने जाता था, तो प्रायः मेरी अमित जी से मुलाकात होती थी और विभिन्न साहित्यिक कार्यक्रमों में भाग लेते हुए मुझे संयुक्ता जी की कविताएं सुनने का अवसर मिलता था। मैं यहां यह बताने का लोभ संवरन नहीं कर पा रहा हूँ कि मैंने प्रो. विलक्षण जी की पुस्तक ‘अछूत जातियां और बौद्ध धर्म’ की एक समीक्षा चर्चित मासिक पत्रिका ‘सबलोग’ (संपादक- किशन कालजयी) में लिखा था।
दोनों को पुनः बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।













