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विद्यासागर विश्वविद्यालय में भारतेंदु जयंती के अवसर पर लघु पत्रिका दिवस का आयोजन

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विद्यासागर विश्वविद्यालय में भारतेंदु जयंती के अवसर पर लघु पत्रिका दिवस का आयोजन
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भारतेंदु ने पत्रकारिता को नवजागरण, राष्ट्र मुक्ति और रचनात्मकता का आधार बनाया
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मिदनापुर 10 सितंबर : विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से भारतेंदु जयंती के अवसर पर ‘लघु पत्रिका आंदोलन और भारतेंदु” विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई।
स्वागत वक्तव्य देते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार प्रसाद ने कहा एक शिक्षक विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान दें यह जरूरी नहीं। शिक्षक का दायित्व बहुत बड़ा है। डॉ. संजय जायसवाल ने कहा भारतेंदु ने अपने 35 वर्ष के जीवन काल में बेहद जरूरी और जमीनी स्तर पर कार्य किया है। भारतेंदु का लेखन लोकजागरण का लेखन है। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके द्बारा संपादित कविवचन सुधा, हरिश्चंद्र मैगजीन और बाला बोधनी पत्रिका का विशेष महत्व है। इन पत्रों में औपनिवेशिक शासन की आलोचना, साहित्य सृजन, विचारपूर्वक लेख एवं स्त्री शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी लेख प्रकाशित हुए। भारतेंदु ने अपने लेखन में नवजागरण, औपनिवेशिक शासन से मुक्ति और रचनात्मकता को केंद्रीय स्वर बनाया।डॉ. श्रीकांत द्विवेदी ने कहा प्रकृति में जो कुछ भी विद्यमान है चाहे वह जड़ ही क्यों न हो वह भी हमें कुछ न कुछ सिखाती है। सीखने और सिखाने का कैंवस बहुत बड़ा है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. दामोदर मिश्र ने कहा कि जो परम्परा हमारे वर्तमान को उपयोगी नहीं बनाती उसका कोई महत्त्व नहीं। उन्होंने आधुनिक साहित्य का राधाकृष्णन भारतेंदु को बताया। भारतेंदु ने अपना एक मंडल बनाया।उस मंडल के रचनाकारों ने भारतेंदु के मृत्यु के बाद भी उनके विचारों और राष्ट्रीयता के तत्वों को जिंदा रखा। भारतेंदु हिंदी और हिंदी नवजागरण को विस्तार देने वाले लेखक थे
विभाग के शोधार्थी मिथुन नोनिया ने कहा यदि हम राष्ट्र निर्माण की बात करते हैं, तो हमें शिक्षक की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में रखना होगा।
मदन साह ने कहा भारतेंदु ने बाला बोधनी पत्रिका के माध्यम से स्त्रियों की समस्याओं पर बात रख कर एक पहल की शुरुआत की।
सुषमा कुमारी ने कहा भारतेंदु हरिश्चंद्र हमें हमारी प्राचीन परम्परा और आधुनिक चेतना दोनों से जोड़ते हैं। अपनी संस्कृति और भाषा के प्रति प्रेम को हमें भारतेंदु की तरह अपनाने की जरूरत है। सांस्कृतिक सत्र में
विभाग की शोधार्थी टीना परवीन एवं गायत्री वाल्मीकि ने ‘बीन भी हूं मैं ,तुम्हारी रागिनी भी हूं’ पर काव्य नृत्य की प्रस्तुति की। रम्भा कुमारी, उषा दूबे, काजल ठाकुर और पिंशु ठाकुर ने भारत दुर्दशा पर केंद्रित कविता कोलाज की प्रस्तुति की। रिया श्रीवास्तव एवं टीना परवीन ने काव्य संगीत की प्रस्तुति की।
इस अवसर पर शबाना खातून ,सलोनी शर्मा,प्रिया मिश्रा, सानिया परवीन, मुस्कान परवीन, नीतू शर्मा, अंकिता जायसवाल, श्रुति पाड़ी, मनीषा राय, नाज परवीन, सुमन कुमारी, प्रियांशु ठाकुर, टी.दिव्यांशी, रीशु यादव, खुशबू प्रसाद, संजना गुप्ता, पूजा राय ने विशेष सहयोग दिया। कार्यक्रम का संचालन नेहा चौबे और धन्यवाद ज्ञापन रिया श्रीवास्तव ने दिया।

10.09.2026

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