राज्यपाल ने उच्च शिक्षा में सुधार के लिए दिए अहम निर्देश
समर्थ पोर्टल का अधिकाधिक उपयोग करें और डेटा को सुरक्षित रखें
विद्यार्थियों के साथ संवाद करें, उनकी समस्याओं व अपेक्षाओं को समझें और उनके लिए सकारात्मक माहौल बनायें
पीएच०डी० में नामांकित छात्र जो संविदा पर नियुक्ति में सफल हुए हैं उनके लिए विशेष प्रावधान
पटना 12 अगस्त, 2026 :- माननीय राज्यपाल-सह-कुलाधिपति
लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने बिहार लोक भवन में राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ आयोजित बैठक में कहा कि बिहार में उच्च शिक्षा की व्यवस्था में बेहतर बदलाव आ रहे हैं। उन्होंने कुलपतियों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि व्यवस्था में बड़े बदलाव की नहीं, बल्कि समय-समय पर जरूरी सुधार और बेहतर समन्वय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नीतियाँ बदलती रहती हैं, लेकिन उनका सही अर्थ समझना और सही तरीके से लागू करना जरूरी है।
उन्होंने समर्थ पोर्टल के क्रियान्वयन को उच्च शिक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए इसका अधिकाधिक उपयोग करने तथा विश्वविद्यालयों के आंकड़ों के सावधानीपूर्वक सुरक्षित रखने पर जोर दिया ताकि ताकि भविष्य में डेटा के नुकसान या उसे दोबारा जुटाने की समस्या न हो। उन्होंने कहा कि आगे चलकर समर्थ को विश्वविद्यालयों की सभी प्रमुख गतिविधियों के संचालन का मुख्य डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया जाना चाहिए।
जेनरेशन-जी के संदर्भ में राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों को युवाओं की बदलती सोच और आकांक्षाओं को समझना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवाद के जरिए उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को समझने तथा उनके लिए सकारात्मक माहौल बनाने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने कहा कि वैसे अभ्यर्थी जो विभिन्न विश्वविद्यालयों में पीएच०डी० में नामांकित हैं एवं संविदा नियुक्ति में सफल हुए हैं, उनके लिए विशेष निर्देश जारी किया जायेगा, ताकि उन्हें पीएच०डी० बीच में छोड़ना नहीं पड़े एवं वे अपनी संविदा नियुक्ति के साथ-साथ शोध कार्य भी ससमय सम्पन्न कर सकें।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में पुस्तकालयों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अच्छी और प्रभावी पुस्तकालय विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता का अहम हिस्सा है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से पुस्तकालयों की सुविधाओं की समीक्षा करने और जहाँ संभव हो, उनके संचालन का समय बढ़ाने का आग्रह किया, ताकि विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए बेहतर सुविधा मिल सके।
उन्होंने विश्वविद्यालयों की सामाजिक जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने गाँवों और संस्थानों को गोद लेने की पहल को आगे बढ़ाने तथा टीबी मुक्त भारत और टीबी मुक्त बिहार अभियान में विश्वविद्यालयों की सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद टीबी मरीजों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने जैसे प्रयासों में विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में बेहतर संवाद और सही जानकारी की जरूरत पर भी जोर देते हुए कहा कि कुलपतियों को अपने शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ नियमित संवाद रखना चाहिए और नीतियों से जुड़ी सही जानकारी समय पर साझा करनी चाहिए।
बैठक में शैक्षणिक सत्रों को नियमित करने, डिग्रियों को डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराने, परीक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाने तथा विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता को विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा से जुड़ी नीतियों और फैसलों का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों को सुविधा देना होना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालयों से समन्वय के साथ काम करते हुए उच्च शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव श्री दीपक कुमार सिंह, राज्यपाल के शिक्षा सलाहकार प्रो० बिनोद कुमार त्रिपाठी एवं बिहार लोक भवन के अन्य पदाधिकारीगण भी उपस्थित थे।













