प्रो० डा० अवधेश का अवसान
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सुपौल के ऎतिहासिक भारत सेवक समाज कालेज के सेवानिवृत्त प्रो० डा० अवधेश कुमार सिंह का आकस्मिक निधन सुपौल सहित पूरे कोशी के शिक्षा जगत को स्तब्ध कर दिया।उनके निधन पर कोशी का पूरा शिक्षा जगत मौन एवं अनाथ जैसा हो गया है।
1980 के दशक में डा० अवधेश कुमार सिंह जन्तु विज्ञान के प्रोफेसर के रुप में सुपौल के भारत सेवक समाज कालेज में पदस्थापित हुए एवं जन्तु विज्ञान जैसे उलझे एवं कठिन विषय को अपने शैक्षिक कौशल से काफी सहज बनाया जिसमें छात्रों की रुची एवं झुकाव काफी बढ़ने लगा तो छात्रों की संख्या में भी बढ़ोतरी होने लगी।इस प्रकार उन्होंने शैक्षणिक माहौल को ऊँचाइयाँ प्रदान करने में अपना सवॅश्रेष्ठ दिया तो काफी चर्चित हुए।अपने शानदार धाकड़ व्यक्तित्व एवं वाकपटुता के कारण कालेज में व्याप्त विभिन्न समस्याओं के निपटारा में भी इन्होंने काफी निपुणता दिखायी जिसके लिए इन्हें आज भी याद किया जाता है। छात्र तो इनकी रौबदार मूंछें एवं भारी शरीर के साथ भारी आवाज सुनकर ही डर जाते थे एवं पीछे हट जाते थे।
बाद में कुछ समय के लिए विश्वविधालय प्रोफेसर के रुप में इनकी पदस्थापना भूपेन्द्र ना० मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में हुई और निर्विवाद रहते हुए अपने शैक्षिक कौशल का परिचय देते हुए पूरे कोशी के शैक्षणिक जगत में छा गये।बाद में इग्नूसे भी जुड़े एवं उपलब्धियों का रिकाडॅ भी अपने नाम किया।डा० सिंह का सायंस फार सोसायटीज बिहार शाखा सुपौल के अध्यक्ष के रुप में भी महती योगदान रहा। बाल विज्ञान
कांग्रेस, सुपौल में दिवंगत सायंस टीचर राणा प्रताप सिंह से निकटता के कारण डा अवधेश सिंह ने इस संस्था को अथक योगदान दिया जिस बजह से बच्चों में वैज्ञानिक ललक पैदा हूई और आज ऎसे बच्चे अपनी सफलता का परचम लहरा रहे हैं।
सुपौल के सामाजिक एवं राजनीतिक परिवेश में भी इनका काफी योगदान रहा। राजनीतिज्ञों
को सही एवं जरुरी सलाह एवं परामर्श देने से भी कभी नहीं चूके।सामाजिक समस्याओं के हल के लिए भी काफी सक्रिय रहे जिसके लिए अभी भी वह याद किये जाते हैं।
डा० अवधेश सिंह सुपौल के पुराने जिला सहरसा के सड्डीहा गांव के निवासी थे।लेकिन सुपौल से लगाव के कारण अपनी सेवानिवृत्ति के बाद भी वह सुपौल में ही बने रहे।काफी समय बाद पारिवारिक बजह से उन्हें सुपौल छोड़कर अन्यत्र जाना पड़ा जिसकी पीड़ा सुपौलवासियों को आज भी है।और यह पीड़ा तो अब और बढ़ गयी है क्योंकि अब वे इस दुनियां को ही छोड़ गये हैं। आपकी याद सुपौल में सदैव जीवित रहेगी। सादर नमन ॐ शान्ति एवं श्रद्धांजलि।मिल रही जानकारी के अनुसार उनका श्राद्ध संस्कार हरिद्वार उत्तराखण्ड से सम्पन्न होगा।
##BSSCOLLEGESUPAUL
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(सुमन कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से साभार।)
(नोट : अवधेश बाबू हमारे अत्यंत ही क़रीबी प्रो. मृत्युंजय नारायण सिंह जी के छोटे भाई थे।-सुधांशु शेखर)














