प्रेमचंद के कालजयी उपन्यास ‘गोदान’ के मैथिली अनुवाद का हुआ लोकार्पण
मधेपुरा। भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के प्रशासनिक प्रभाग में शनिवार को हिंदी साहित्य के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद के कालजयी उपन्यास ‘गोदान’ के मैथिली अनुवाद का गरिमापूर्ण लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बी. एस. झा, कुलसचिव अशोक कुमार सिंह तथा मैथिली विभागाध्यक्ष एवं अनुवादक डॉ. नरेंद्र नाथ झा ने संयुक्त रूप से पुस्तक का लोकार्पण किया।
यह कृति साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित की गई है। उपन्यास का मैथिली अनुवाद विश्वविद्यालय मैथिली विभाग के विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. नरेंद्र नाथ झा ने किया है। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि साहित्य अकादमी द्वारा इस महत्वपूर्ण कृति का प्रकाशन मैथिली भाषा एवं साहित्य के लिए गौरव का विषय है। इससे मैथिली के पाठकों को प्रेमचंद की कालजयी रचना अपनी मातृभाषा में पढ़ने का अवसर प्राप्त होगा।
कुलपति डॉ. बी. एस. झा ने कहा कि भारतीय भाषाओं के बीच श्रेष्ठ साहित्य का आदान-प्रदान हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करता है। उन्होंने डॉ. नरेंद्र नाथ झा को इस महत्वपूर्ण अनुवाद कार्य के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह कृति मैथिली साहित्य की धरोहर को और समृद्ध करेगी।
कुलसचिव अशोक कुमार सिंह ने कहा कि साहित्य अकादमी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का लोकार्पण विश्वविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण क्षण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं साहित्य-प्रेमियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।
अनुवादक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. नरेंद्र नाथ झा ने कहा कि उनका प्रयास रहा है कि प्रेमचंद की मूल संवेदना, भाषा-शैली और सामाजिक यथार्थ को यथासंभव उसी प्रभाव के साथ मैथिली में प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा कि अनुवाद दो भाषाओं और संस्कृतियों के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करता है।
ज्ञात हो कि ‘गोदान’ मुंशी प्रेमचंद का सबसे प्रसिद्ध तथा अंतिम पूर्ण उपन्यास है, जिसका प्रकाशन वर्ष 1936 में हुआ था। भारतीय ग्रामीण समाज, किसान जीवन, सामाजिक विषमता, आर्थिक शोषण तथा मानवीय संघर्ष का अत्यंत यथार्थ चित्रण करने वाली इस कृति को हिंदी साहित्य की सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में स्थान प्राप्त है। इसे ‘कृषि संस्कृति का महाकाव्य’ भी कहा जाता है।
लोकार्पण समारोह में उपस्थित शिक्षकों, शोधार्थियों एवं साहित्यप्रेमियों ने इस प्रकाशन को हिंदी और मैथिली के मध्य साहित्यिक संवाद को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के मैथिली विभाग के शशांक राज, मिंटू कुमार, सुनील कुमार भानु, केशव कुमार झा सहित अध्यापक रौशन कुमार यादव, अतिथि शिक्षक सोनू कुमार झा, गौतम पासवान, प्रमोद कुमार सिंह के साथ शोधार्थी राजीव कुमार, रूपेश कुमार, अंशु कुमारी आदि मौजूद थे।













