मधेपुरा। भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के विश्वविद्यालय मैथिली विभाग द्वारा प्रकाशित मैथिली शोध पत्रिका ‘भूमिजा’ के प्रथम अंक का विमोचन आज विश्वविद्यालय परिसर में गरिमामय समारोह के बीच संपन्न हुआ। पत्रिका का संयुक्त रूप से विमोचन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बी. एस. झा, कुलसचिव अशोक कुमार सिंह तथा विश्वविद्यालय मैथिली विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नरेंद्र नाथ झा सहित कई गणमान्य अतिथियों के द्वारा किया गया।
इस अवसर पर कुलपति डॉ. बी. एस. झा ने कहा कि शोध पत्रिकाएँ किसी भी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और शोध परंपरा की पहचान होती हैं। ‘भूमिजा’ मैथिली भाषा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में नए शोध को प्रोत्साहित करने तथा युवा शोधार्थियों को एक सशक्त मंच उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
कुलसचिव अशोक कुमार सिंह ने पत्रिका के प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को निरंतर बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने पत्रिका की नियमितता एवं गुणवत्ता बनाए रखने पर बल दिया।
मैथिली विभागाध्यक्ष एवं पत्रिका के मुख्य संपादक डॉ. नरेंद्र नाथ झा ने बताया कि ‘भूमिजा’ के प्रथम अंक में कुल 37 शोध-पत्र प्रकाशित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पत्रिका का उद्देश्य मैथिली भाषा और साहित्य के विविध आयामों पर गंभीर एवं मौलिक शोध को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने पत्रिका के प्रकाशन में सहयोग देने वाले सभी विद्वानों, शोधार्थियों एवं संपादकीय मंडल के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।
ज्ञात हो कि पत्रिका के संरक्षक कुलपति डॉ. बी. एस. झा हैं। पत्रिका के कार्यकारी संपादक डॉ. कृष्ण मोहन ठाकुर, उपसंपादक डॉ. रोशन कुमार यादव एवं सुनील कुमार भानु हैं। वहीं परामर्श मंडल में प्रो. राजीव कुमार मलिक, डॉ. श्यामाकांत झा तथा डॉ. पंकज कुमार शर्मा सहित कई विद्वान सम्मिलित हैं।
विमोचन समारोह में विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी, छात्र-छात्राएँ तथा साहित्यप्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने ‘भूमिजा’ को मैथिली शोध-जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए इसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
आयोजन में मैथिली विभाग के कार्यालय सहायक शशांक राज, मिंटू कुमार, केशव कुमार तथा अतिथि शिक्षक सोनू कुमार झा, गौतम पासवान, प्रमोद कुमार सिंह के साथ राजीव कुमार, अंशु कुमारी, रूपेश कुमार आदि मौजूद रहे।













