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वेबीनार आयोजित, भक्ति सबसे सुगम मार्ग : कुलपति

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*भक्ति मार्ग सबसे सुगम : कुलपति*
भारतीय दर्शन में मोक्ष को जीवन का चरम लक्ष्य बताया गया है और इसकी प्राप्ति के लिए मुख्यतः तीन मार्ग बताए गए हैं। ये हैं-ज्ञान, कर्म एवं भक्ति। इन तीनों मार्गों में भक्ति सबसे सुगम है।
यह बात कुलपति प्रोफेसर डाॅ. ज्ञानंजय द्विवेदी ने कही। वे सोमवार को समकालीन संदर्भ में भक्तिकाल का पुनर्पाठ विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार के उद्घाटनकर्ता के रूप में बोल रहे थे।

 

 

कार्यक्रम का आयोजन  हिन्दी विभाग, बीएनएमवी कॉलेज, मधेपुरा के तत्वावधान में   विश्वविद्यालय के लैंगवेज लैब में किया गया। 
https://youtu.be/PfjJb3-D5QA
कुलपति ने कहा कि भगवान को ज्ञानी एवं कर्मयोगी से अधिक भक्त प्रिय होते हैं। श्रीकृष्ण ने भी भगवद्गीता में कहा है कि सब कुछ छोड़कर मेरी शरण में आ जाओ, मैं तुम्हें मुक्त कर दूँगा। भक्ति में समर्पण का भाव महत्वपूर्ण होता है।
कुलपति ने भक्ति-दर्शन के विभिन्न पक्षों की चर्चा की और सगुण भक्ति एवं गिर्णुण भक्ति पर भी प्रकाश डाला।
कुलपति ने कहा कि भक्ति का द्वार समाज के हर व्यक्ति के लिए खुला रहता है। भक्ति में संशय का स्थान नहीं होता है।
उन्होंने  विबिनार का आयोजन करने के लिए कार्यक्रम के लिए बीएनएमवी कॉलेज परिवार को शुभकामनाएँ दीं और  तकनिकी सहयोगियों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में हर क्षेत्र में बदलाव हो रहा है। वेबिनार का आयोजन भी कोराना काल में आए बदलाव का हिस्सा है।
सेमिनार के विषय पर बी. आर. अंबेडकर विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के डॉ. अवधेश त्रिपाठी और मिजोरम विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के डॉ. अमिष वर्मा ने अपने विचार व्यक्त किए। दोनों वक्ताओं ने संपूर्ण भक्ति साहित्य को आज के संदर्भ में उसकी उपदेयता पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय वेबिनार में देश के विभिन्न क्षेत्रों से लोग लिंक के जरिए जुड़े। इस दौरान लोगों ने मुख्य वक्ताओं से कई सवाल भी किए।

 

महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. के. एस. ओझा ने कुलपति का अंगवस्त्रम् एवं पुष्पगुच्छ  देकर स्वागत किया। इस अवसर पर  शिक्षाशास्त्र विभाग के प्रोफेसर इंचार्ज डाॅ. नरेश कुमार, पीआरओ डॉ. सुधांशु शेखर, कुलपति के निजी सहायक शंभु नारायण यादव, डाॅ. बुधप्रिय, डाॅ. नवीन कुमार सिंह, हिन्दी विभाग की अध्यक्ष मीरा कुमारी, संयोजक डॉ. शेफालिका शेखर, डाॅ. सरोज कुमार आदि उपस्थित थे।

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