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BNMU। डाॅ. रहमान ने अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में आमंत्रित वक्ता के रूप में भाग लिया

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कोविड-19 का मानव- जीवन के हर क्षेत्र पर प्रभाव पड़ रहा है। इससे सभी व्यक्ति प्रभावित हो रहे हैं। इस महामारी ने देश की आर्थ-व्यवस्था, मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं समाज को काफी नुकसान पहुंचाया है।

यह बात बीएनएमयू, मधेपुरा के अकादमिक निदेशक डाॅ. एम. आई. रहमान ने कही। वे जोहरा कम्युनिटी रिसर्च एंड गाइडेंस, भारत के तत्वाधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में आमंत्रित वक्ता के रूप में बोल रहे थे। वेबीनार का विषय चेंजिंग लाइफ स्टाइल पेटर्न्स ड्यूरिंग एंड आफ्टर कोविड-19 पांडेमिक था।

उन्होंने कहा कि आज प्रभावी औषधियों एवं वैक्सीन के अभाव में इस रोग की चिकित्सा संभव नहीं हो पा रही है। इस रोग का इलाज केवल सोशल डिस्टेंसिंग ही माना जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें, तो इस महामारी की रोकथाम लॉकडाउन के द्वारा ही संभव है।

उन्होंने बताया कि कोरोना एवं लाॅकडाउन का लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर कुप्रभाव पड़ रहा है। लोगों के अंदर चिंता, भय, अवसाद, पैनिक अटैक, पछतावा, अपच, अनिद्रा आदि मनोवैज्ञानिक रोगों के लक्षण दृष्टिगोचर होने लगे हैं। उनमें गुस्सा, चिड़चिड़ापन अत्यधिक आने लगा है।

उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति जो अपने परिवार एवं प्रेमियों से काफी दूर हैं, वे अत्यधिक मनोविकारों से ग्रसित होने लगे हैं। लोग खाली परे रहने के कारण अपना अधिकतम समय मोबाइल या लैपटॉप पर दे रहे हैं। इसके कारण वे देर रात तक सो नहीं पाते हैं। जिस तरह से बच्चे किशोर एवं व्यस्त अपने अपने मोबाइल के स्क्रीन से चिपके रहते हैं उनमें कंप्यूटर वर्जन सिंड्रोम होने की संभावनाएं बढ़ती जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि लाॅकडाउन में रोजगार और आय के स्रोत कम हो गए हैं। ऐसी स्थिति में लोंगो को पौष्टिक आहार भी नहीं मिल पा रहा है। इससे उनके शरीर की रोधक क्षमता प्रभावित हो रही है। लोगों की सोचने-समझने की क्षमताओं में कमी आ रही है।

उन्होंने कहा कि स्कूल और विश्वविद्यालय बंद होने की वजह से विद्यार्थियों के सामने भविष्य का भय उभरकर सामने आने लगा है। अतः सभी अभिभावकों को सचेत रहने की आवश्यकता है। हमें अपने मन को शांत रखना है और आपसी प्रेम बनाए रखना है। कोरोना की समाप्ति फिलहाल संभव नहीं है। हमें इसी के बीच और इसी के साथ रहना है। अतः सावधानी जरूरी है।

इस वेबीनार के मुख्य वक्ता अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं समाज विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष प्रोफेसर शमीम अहमद अंसारी और अरब अमेरिकन विश्वविद्यालय, फिलिस्तीन के क्लीनिकल हेल्थ साइकोलॉजिस्ट डॉ. वायल एम. एफ अब्दुल हसन थे। अतिथि वक्ताओं में अपाला विश्वविद्यालय, स्वेडेन की साइकोलॉजिस्ट एवं सीनियर रिसर्च असिस्टेंट आशा उमर, गिसीदिर कीनिया के ट्रॉमा सेंटर पावर वीमेन की चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर लोरना सिंजोर रूपिया, एशियन रिसोर्स फाउंडेशन एंड अमन, थाईलैंड की प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर जेनब नैनी उपस्थित थे। इनके अतिरिक्त अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नशीद इम्तियाज एवं ईएमएएआरके, नई दिल्ली के असिस्टेंट जेनरल मैनेजर प्रशासनिक श्री खलीकुजजमा ने अपने अपने विचार व्यक्त किए।

इस वेबीनार में देश- विदेश से लगभग 200 प्रतिभागियों ने भाग लिया। विदेशों में बांग्लादेश, श्रीलंका थाईलैंड, कीनिया, स्वेडेन, फिलिस्तीन, नेपाल के शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

स्वागत भाषण ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के मनोविज्ञान विभाग की डॉ. आभा रानी सिंह ने प्रस्तुत किया। जोहरा कम्युनिटी रिसर्च एंड गाइडेंस के अध्यक्ष प्रोसेसर अनीस अहमद ने वेबीनार के महत्ता पर प्रकाश डाला। इंजीनियर सबा शमीम अलीगढ़ ने सफलतापूर्वक मॉडरेटर की जिम्मेवारी निभाई।

 

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