*कीर्ति बाबू पर वृहद आयोजन सराहनीय, भविष्य में अन्य स्तरों पर विस्तारित आयोजनों को करेगा प्रेरित*
7 अगस्त 1911 को मधेपुरा के मनहरा सुखासन में पैदा हुए और सात मार्च 1997 को इस दुनिया से विदा लेने वाले महामना कीर्ति नारायण मंडल की यश कृति आज भी अपनी आभा फैला रही है उनका योगदान ऐसा कि दशकों बाद भी उनकी कृति उन्हें अमरत्व दे रही । उक्त बाते आजाद पुस्तकालय के अध्यक्ष वरीय साहित्यकार प्रो विनय कुमार चौधरी ने टीपी कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो कैलाश प्रसाद यादव को उनके वेशम में पुस्तकालय के सचिव डॉक्टर हर्ष वर्धन सिंह राठौर द्वारा लिखित कीर्ति नारायण मंडल की संक्षिप्त जीवनी भेंट करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि कोसी में शिक्षा जगत का विश्वकर्मा के रूप में कीर्ति नारायण मंडल सदैव आदरणीय रहेंगे।
उनके द्वारा अपने पिता के नाम पर स्थापित टीपी कॉलेज बीएनएमयू के स्थापना की आधारशिला बनी थी। प्रधानाचार्य प्रो कैलाश प्रसाद यादव ने कहा कि कीर्ति बाबू की देन का क्षेत्र असीम है उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जो नजीर कायम की उसे हर दौर याद रखेगी।उनके नाम पर कार्यक्रम इस क्षेत्र का सामाजिक दायित्व है,भविष्य में और वृहद आयोजनों की कड़ी जुड़ती रहे उसका प्रयास भी जारी रहेगा।
आजाद पुस्तकालय के सचिव डॉक्टर हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने कहा कि आज दरभंगा विश्वविद्यालय में उन पर शोध सुखद संकेत है ।अपने ही क्षेत्र में उनके प्रति वो सम्मान का माहौल लंबे समय से नहीं मिल पा रहा था जो नितांत आवश्यक था लेकिन विगत कुछ वर्षों में कीर्ति नारायण मंडल के नाम पर भवन,द्वार आदि के निर्माण,सेमिनार गोष्ठियों की लंबी कड़ी कीर्ति बाबू के कृतित्व और व्यक्तित्व को आमजन से जोड़ रही है।
इधर के वर्षों में उनके नाम पर आयोजनों की लगातार कड़ी सुखद संकेत देते हैं इस साल कीर्ति बाबू की 30वीं पुण्यतिथि पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार ,50 से अधिक आलेख वाचन का पंजीयन, वृहद स्तर पर प्रकाशित हो रही स्मारिका एक मील की पत्थर ही नहीं साबित होगी बल्कि और अन्य स्तरों पर आयोजनों हेतु प्रेरणा बनेगी यह विश्वास भी अब मजबूत होने लगी है इसका श्रेय प्रधानाचार्य प्रो कैलाश प्रसाद यादव,कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुधांशु शेखर सहित उस पूरी टीम को जाता है जिसने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इसे साकार किया।इस मौके पर डॉ. राठौर ने कहा कि अन्य स्तरों पर भी कीर्ति बाबू से जुड़े आयोजनों पर पहल नितांत आवश्यक है गर विश्वविद्यालय स्तर पर पहल हुई तो कीर्ति बाबू के कृतित्व और व्यक्तित्व को जानने एवं समझने का व्यापक स्तर प्राप्त होगा।इस अवसर पर वरीय साहित्यकार प्रो सिद्धेश्वर कश्यप, डॉ. रतनदीप, डॉ. गुड्डू कुमार आदि उपस्थित रहे।,,,,,,,,













