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एआईफुक्टो के उपाध्यक्ष चुने गए प्रो. अशोक

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एआईफुक्टो के उपाध्यक्ष चुने गए प्रो. अशोक

विश्वविद्यालय इतिहास एवं संस्कृति विभाग, बीएनएमयू, मधेपुरा के अध्यक्ष एवं एसएनएसआरकेएस कॉलेज, सहरसा के पूर्व प्रधानाचार्य प्रो. अशोक कुमार सिंह को पुनः अखिल भारतीय विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (एआईफुक्टो) का उपाध्यक्ष चुना गया है। उन्हें यह जिम्मेदारी मदुरै (तमिलनाडु) में 21-23 फरवरी को आयोजित महासंघ के 34वां संवैधानिक महाधिवेशन में दिया गया। अधिवेशन से लौटने के बाद प्रो. अशोक ने बताया कि इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर से विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की।महाधिवेशन के दौरान सर्वसम्मति से नए राष्ट्रीय पदाधिकारियों का चुनाव किया गया।

उन्होंने बताया कि प्रो. ई. निशांत (केरल) राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रो. अरुण कुमार (बिहार) महासचिव तथा प्रो. मोज्जपाल सिन्ह (उत्तर प्रदेश) कोषाध्यक्ष निर्वाचित हुए। इसके अतिरिक्त संगठन की मजबूती एवं क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए 15 उपाध्यक्ष, तथा 10 क्षेत्रीय सचिवों का भी चुनाव हुआ। बिहार से विशेष रूप से दो शिक्षाविदों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपी गईं हैं। प्रो. अशोक कुमार सिंह (मधेपुरा) एवं प्रो. हरिशचंद्र शाही (मुंगेर) को उपाध्यक्ष और डॉ. शम्भूनाथ प्रसाद सिंह (नालंदा) को क्षेत्रीय सचिव निर्वाचित किया गया।

उन्होंने बताया कि महाधिवेशन उच्च शिक्षा क्षेत्र में शिक्षकों के अधिकारों, शिक्षा नीति में सुधार, वेतन-भत्तों, पेंशन, सेवा सुरक्षा तथा विभिन्न राज्यों में चल रहे शिक्षक आंदोलनों पर गहन चर्चा का मंच बना। प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर केंद्र व राज्य सरकारों से शिक्षा बजट बढ़ाने, स्थायी नियुक्ति, पुरानी पेंशन बहाली तथा नई शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन में शिक्षक हितों की रक्षा जैसे मुद्दों पर मजबूत संघर्ष का संकल्प लिया।

उन्होंने बताया कि नए पदाधिकारियों ने संगठन को और अधिक सशक्त बनाने, राज्य स्तरीय इकाइयों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा आगामी चुनौतियों का सामना करने के लिए ठोस रणनीति बनाने का वादा किया है। यह चुनाव उच्च शिक्षा के शिक्षक समुदाय के लिए एक नई ऊर्जा एवं दिशा प्रदान करने वाला सिद्ध होगा।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों तथा शिक्षक सुरक्षा का सामना करने के लिए एकजुट संघर्ष का संकल्प लिया। उन्होंने राज्य स्तरीय इकाइयों के साथ बेहतर समन्वय, आंदोलनों को तेज करने तथा सरकार से शिक्षक- अनुकूल नीतियों की मांग पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि यह महाधिवेशन उच्च शिक्षा के शिक्षक समुदाय के लिए नई दिशा एवं ऊर्जा प्रदान करने वाला साबित हुआ है। संगठन अब और अधिक सशक्त होकर शिक्षकों के अधिकारों एवं शिक्षा व्यवस्था के लोकतंत्रीकरण के लिए प्रयासरत रहेगा।

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