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आईसीपीआर, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित 16वां संवाद 22 फरवरी, 2025 को

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*16वां संवाद 22 फरवरी, 2025 को*

ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा के तत्वावधान में आगामी 22 फरवरी, 2025 (शनिवार) को अ. 03 बजे से 16वां संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

*पहली बार वेदवाक्य पर होगा संवाद*
कार्यक्रम के आयोजन सचिव सह दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि पहली बार संवाद का विषय ‘जागृवान् स: समिन्धते’ (एक वेदवाक्य) रखा गया है। इसका उल्लेख ‘ऋग्वेद’ के प्रथम मंडल अंतर्गत सूक्त 22 के मंत्र 21 में मिलता है।

उन्होंने बताया कि इस मंत्र का भावार्थ है कि जो लोग अज्ञानता एवं अधर्म के अंधेरे को छोड़कर विद्या एवं धर्म के प्रकाश में आते हैं, वे ही सर्वोत्तम गुणों से संपन्न होते हैं। वे ही सच्चिदानन्दस्वरूप सब प्रकार से उत्तम सबको प्राप्त होने योग्य निरन्तर सर्वव्यापी विष्णु अर्थात् जगदीश्वर को प्राप्त होते हैं।

*मुख्यवक्ता होंगी प्रो. शिवानी*

उन्होंने बताया कि संवाद के मुख्य वक्ता दर्शनशास्त्र विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ की पूर्व अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) शिवानी शर्मा होंगी। इस अवसर पर मुख्य अतिथि दर्शनशास्त्र विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) के पूर्व अध्यक्ष तथा अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) जटाशंकर होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता दर्शनशास्त्र विभाग, पटना विश्वविद्यालय, पटना (बिहार) के पूर्व अध्यक्ष तथा आईसीपीआर, नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रमेशचंद्र सिन्हा करेंगे।अतिथियों का स्वागत प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) कैलाश प्रसाद यादव करेंगे।

*कौन हैं प्रो. शिवानी ?*
उन्होंने बताया कि प्रो. शिवानी की देश-विदेश में अपनी एक विशिष्ट पहचान है। आप पंजाब विश्वविद्यालय में वरिष्ठ प्रोफेसर और अखिल भारतीय दर्शन परिषद् की उपाध्यक्ष के रूप में कार्य कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि प्रो. शिवानी अपने विद्यार्थी जीवन से ही काफी प्रतिभाशाली रही हैं। आपने वर्ष 1996 में पंजाब विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर (स्वर्ण पदक) और वर्ष 2003 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त कीं। इस बीच आप जूनियर रिसर्च फेलो (जेआरएफ) भी रहे। आप लगभग 26 वर्षों से अध्ययन कर रही हैं। इस बीच आपने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगभग सौ से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं और विभिन्न विश्वविद्यालयों में दर्जनों ऑनलाइन-ऑफलाइन व्याख्यान दिया है।

*क्या है स्टडी सर्किल ?*
डॉ. शेखर ने बताया कि स्टडी सर्कल (अध्ययन मंडल) भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत संचालित भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली की की एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण योजना है। इसके तहत एक वर्ष तक प्रत्येक माह एक पूर्व निर्धारित विषय पर ऑनलाइन-ऑफलाइन संवाद होता है। यह कार्यक्रम पूर्णतः नि:शुल्क होता है और इसमें भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को ऑनलाइन प्रमाण-पत्र भी जारी किया जाता है।

*पहले हो चुके हैं 15 संवाद*
उन्होंने बताया कि बीएनएमयू में स्टडी सर्किल के अंतर्गत 15 संवाद हो चुके हैं। इनमें देश- विदेश के कई विद्वानों का व्याख्यान हो चुका है। इनमें पद्मश्री प्रो. रामजी सिंह (भागलपुर), प्रो. पूनम सिंह (पटना), प्रो. एन. पी. तिवारी (पटना), प्रो. नीलिमा सिन्हा (बोधगया), डॉ. आलोक टंडन (हरदोई), प्रो. सभाजीत मिश्र (गोरखपुर), प्रो. जटाशंकर (प्रयागराज), प्रो. इंदु पांडेय खंडूरी (श्रीनगर-गढ़वाल), प्रो. रमेशचन्द्र सिन्हा (नई दिल्ली), प्रो. सच्चिदानंद मिश्र (नई दिल्ली), प्रो. मनोज कुमार (वर्धा), डॉ. गोविन्द शरण उपाध्याय (नेपाल) तथा माधव तुरुमेला (लंदन) जैसे ख्यातिप्राप्त दार्शनिक शामिल हैं।

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