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जनसंख्या-नियंत्रण एवं महिला-स्वास्थ्य विषयक परिचर्चा आयोजित —– वैश्विक समस्या है जनसंख्या-विस्फोट : डा. प्रियदर्शनी

जनसंख्या-नियंत्रण एवं महिला-स्वास्थ्य विषयक परिचर्चा आयोजित
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वैश्विक समस्या है जनसंख्या-विस्फोट : डा. प्रियदर्शनी
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जनसंख्या-विस्फोट एक वैश्विक समस्या है। आज यह बिकराल रूप ले चुकी है और इससे दुनिया के प्रायः सभी देश त्रस्त हैं।

यह बात सुप्रसिद्ध स्त्रीरोग विशेषज्ञ डा. प्रियम्बदा प्रियदर्शनी ने कही।
वे‌ गुरुवार को विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर जनसंख्या-नियंत्रण एवं महिला-स्वास्थ्य विषयक परिचर्चा में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रही थीं।
कार्यक्रम का आयोजन ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय मधेपुरा में बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति, पटना द्वारा संचालित सेहत केंद्र एवं सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था प्रांगण रंगमंच, मधेपुरा के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

उन्होंने कहा कि जनसंख्या- विस्फोट की ओर वर्ष 1987 में पहली बार दुनिया का ध्यान गया, जब दुनिया की जनसंख्या पांच अरब के करीब पहुंच गई। इस अप्रत्याशित घटना ने वैश्विक समुदाय को जनसंख्या- नियंत्रण की दिशा में सामूहिक पहल करने को मजबूर कर दिया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1989 से 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस घोषित किया।

उन्होंने कहा कि विश्व जनसंख्या दिवस मुख्य रूप से जनसंख्या नियंत्रण के लिए समर्पित है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों को जनसंख्या विस्फोट, परिवार नियोजन, लैंगिक समानता, मातृ-स्वास्थ्य एवं मानव अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर जागरूक करना है। इस दिन को दुनिया के सभी देशों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
*कई समस्याओं को जन्म देती है बढ़ती जनसंख्या*
उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या से दुनिया के अधिकांश देश चिंतित हैं। यह कई समस्याओं को जन्म देती है।‌ इनमें गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, संसाधनों की कमी, पर्यावरण-प्रदूषण एवं जीवन स्तर में गिरावट आदि प्रमुख हैं।

उन्होंने कहा कि दुनिया को बचाने के लिए यह जरूरी है कि हम सब जनसंख्या नियंत्रण के महत्व को समझें। हम लोगों की भीड़ नहीं बढ़ाएं, बल्कि स्वस्थ एवं संबुद्ध नागरिक को जन्म दें।‌ हमारी कोशिश हो कि हमारे बच्चे महज एक वोट बनकर न रह जाएं, बल्कि वे आर्यभट्ट एवं राजेन्द्र प्रसाद जैसे महापुरुष बनें।
*महिला स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत*
उन्होंने बताया कि परिवार, समाज एवं सरकार को जनसंख्या नियंत्रण और महिला स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। हम उचित स्वास्थ्य सेवाओं एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मदद से मातृ एवं शिशु मृत्युदर को कम कर सकते हैं और जनसंख्या की समस्या पर भी नियंत्रण पा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि‌ बचाव या परहेज हमेशा इलाज से बेहतर होता है। इसलिए हमें अपने खान-पान, दिनचर्या एवं जीवनशैली में सुधार करना चाहिए। हमें अपने एवं अपने परिवार के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना चाहिए और नियमित रूप से चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आजकल सरकारी अस्पतालों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में भी कई स्वास्थ्य सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध हैं। लेकिन दुख की बात है कि हम उनका लाभ नहीं उठाते हैं। जानकारी रहने के बावजूद हम जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को नहीं अपनाते हैं। आज भी हमारे समाज में परिवार नियोजन को शत-प्रतिशत स्वीकार्यता नहीं मिल सकी है।

*बढ़ती जनसंख्या है चिंता का सबब*
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. कैलाश प्रसाद यादव ने कहा कि आज समाज का कुछ वर्ग जनसंख्या नियंत्रण के प्रति जागरूक हुआ है। लेकिन अभी भी इस दिशा में बहुत कुछ किया जाना शेष है।

उन्होंने कहा कि विश्व जनसंख्या दिवस हमें तेजी से बढ़ती जनसंख्या और उससे जुड़ी चुनौतियों के प्रति जागरूक करता है और हमें जनसंख्या नियंत्रण एवं परिवार नियोजन के मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देने के‌ लिए प्रेरित करता है। हम सबों की यह जिम्मेदारी है कि हम जनसंख्या विस्फोट के खतरों के प्रति सावधान रहें।

उन्होंने बताया कि 2023 के अनुमान के अनुसार, भारत की जनसंख्या 1.4 अरब के करीब है और जनसंख्या तेजी से बढ़ती ही जा रही है। ऐसे में भविष्यवाणी की जाती है कि आने वाले वर्षों में भारत चीन को भी पीछे छोड़ देगा। ऐसे में बढ़ती जनसंख्या आज हमारी सरकार और हम सभी नागरिकों के लिए भी एक चिंता का सबब है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. मिथिलेश कुमार अरिमर्दन ने कहा कि सभी शिक्षण संस्थानों को शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी मामलों पर भी ध्यान देना चाहिए। जब तक विद्यार्थी एवं शिक्षक पूर्णतः स्वस्थ नहीं होंगे, तो उनका शैक्षणिक विकास भी अधूरा रहेगा।

*आगे भी होंगे जागरूकता कार्यक्रम*
अतिथियों का स्वागत करते हुए दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि आगे भी सेहत केंद्र एवं प्रांगण रंगमंच के संयुक्त तत्वावधान में स्वास्थ्य- जागरुकता कार्यक्रमों के आयोजन की योजना है।

कार्यक्रम का संचालन प्रांगण रंगमंच के संरक्षक डॉ. संजय परमार एवं धन्यवाद ज्ञापन मंच के अध्यक्ष दिलखुश कुमार ने किया। कार्यक्रम के आयोजन में शोधार्थी सौरभ कुमार चौहान, नीरज कुमार निर्जल, लक्षी राज मिट्ठी ने सहयोग किया।

इस अवसर पर बीएड विभागाध्यक्ष डॉ. जावेद अहमद, डॉ. यास्मीन रशीदी, संजीव कुमार सुमन, डॉ. शहरयार अहमद, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. मनोज ठाकुर, डॉ. आशुतोष कुमार झा, अवनीश कुमार, डॉ. के. एल. पटेल, विनीत राज, डॉ. विकास आनंद, डॉ. अशोक कुमार अकेला, नारायण ठाकुर, विवेकानंद, राजीव कुमार रंजन, जयश्री, साक्षी कुमारी, निखिल कुमार, सनोज कुमार, सौरभ कुमार, राजेश कुमार, सत्यम कुमार, सुशांत कुमार, प्रदेश कुमार, सुशील कुमार, दिलीप कुमार, राजेंद्र मलिक, विनोद कुमार, ज्योतिष कुमार, मोती कुमार, प्रणव कुमार, नवीन कुमार, नीरज कुमार, अमितेश कुमार, आनंद सिंह, अभिनव राज, अखिलेश कुमार, रणवीर कुमार, अनिल ठाकुर, रामकुमार, आनंद कुमार, सुमित कुमार, दीपक कुमार, सुनील कुमार, लुशी राज आदि उपस्थित थे।