
जिंदा दिखना सबके बस की बात नहीं / सुधीर कुमार प्रोग्रामर
धरती से अंबर तक ये हालात नहीं। मौसम पर कब्जा कर ले औकात नहीं। मुर्दा बनकर जिंदा तो रह लेते हम। जिंदा दिखना सबके वश

धरती से अंबर तक ये हालात नहीं। मौसम पर कब्जा कर ले औकात नहीं। मुर्दा बनकर जिंदा तो रह लेते हम। जिंदा दिखना सबके वश

सौसे दुनिया कानै अखनी, भोकरी-भोकरी.. मारै कोरोना झमारी के, पकरी पकरी। चीन म जनम होलै, चीनें में जुवान हो जिनगी हसोती लेलकै, विदेशी हैवान हो

कोमल चितबन मधुर प्रेम तुम तुम्हीं तो जीवन थाती हो कब से मेरे लिये खड़ी तुम तुम्हीं दीये की बाती हो। पीयूष धार चंचल ये

बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में पी-एच. डी. उपाधि प्राप्त अभ्यर्थियों को यूजीसी के पी-एच. डी. शोध अधिनियम 2009 से संबंधित 5 पॉइंट सर्टिफिकेट कुलसचिव

भारतीय संस्कृति सामासिक है : डाॅ. प्रभु नारायण मंडल ————— भारतीय संस्कृति में अनेक संस्कृतियाँ घुल-मिल कर एक हो गई हैं। भारतीय संस्कृति ने अनेक

कोरोना संक्रमण के कारण मार्च से ही लाॅकडाउन की स्थिति है और बीएन मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में भी लंबे समय से पठन-पाठन बाधित है। इस

वतन से है जो मोहब्बत, वो किसी और से न हो पाएगी, वही दिल, वही जान, वही सुकून मेरा। वतन की राह पर, मर-मिटने का

मुझे मौन बहने दो, चुपचाप अवाक रहने दो, करने दो मंथन जीवन का, विचारों की धार में बहने दो खुद से ही सब कुछ कहने

ज़र्रे-ज़र्रे में तुम हो बसे, धरती-आकाश, तुम्ही तो हो। पंछियों की चहचहाहट, कोयल की मधुर आवाज़ से, मिलती दिल को जो राहत, तुम्ही तो हो।

गजल आप से बढ़कर मुझे कोई नहीं भाया कभी हाँ मगर तारीफ में मैं कुछ न कह पाया कभी। जिंदगी के फैसले में जिंदगी से
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