
Poem। कविता/ तलाश/ गीता जैन
खुद को ढूँढने की तलाश ज़िन्दगी है। यूँ सफ़र मे जुड़ते हैं। जोड़ते हैं। रिश्तों को तराशते हैं। परखते हैं। अपनाते हैं। अपनों को परायों

खुद को ढूँढने की तलाश ज़िन्दगी है। यूँ सफ़र मे जुड़ते हैं। जोड़ते हैं। रिश्तों को तराशते हैं। परखते हैं। अपनाते हैं। अपनों को परायों

हौसलों की चादर मे लिपट बेपनाह उम्मीदों से चलती ज़िन्दगी अब थक कर पूछती है कितना सफ़र और बाकि है ? मैने आसमानों पर टकटकी

संस्कार कोई घुट्टी नहीं कोई ताबीज़ नहीं कोई बन्धन नहीं कोई वचन नहीं कोई समझौता नहीं कोई मत धर्म बन्धन नहीं फिर संस्कार क्या है

अंध-श्रद्धा प्रेम मेरा, कुछ नेह बरसाते रहो। जेठ सा जीवन तपा, मधुमास तुम आते रहो। मधुमास तुम आते रहो। विकल है- मन की नदी, बहुत

भागलपुर जिलान्तर्गत बरारी गंगा तट पर एक बूढ़ा पीपल पेड़ का जीवन खतरे में है। वह हर आते-जाते को अपनी निःशब्द कहानी सुना रहा है।

घुंघरू बांध के बारिश आई, छम-छम कर एक धुन सुनाई, नाच उठा गगन, ताल से ताल

अनंत काल तक जिंदा रहते हैं वे लोग जो वृक्षारोपण करते हैं। वे जिंदा रहते हैं पेड़ों की निर्मल छाया में। भू-जल भंडार बन, अमृत
दर्शन परिषद्, बिहार के तत्वावधान में ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा (बिहार) में दिनांक : 24 अगस्त, 2020 (सोमवार) गूगल मीट लिंक : https://meet.google.com/puz-sbno-xap (केवल अतिथियों

निम्न लिंक पर क्लिक कर 21 अगस्त, 2020 को आयोजित सेमिनार का सर्टिफिकेट प्राप्त करें।https://forms.gle/wVYHqR6HsP4iRsz96 BNMU : 8 सर्टिफिकेट हेतु फीडबैक लिंक /21अगस्त, 2020 -16

दर्शन परिषद्, बिहार के तत्वावधान में ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा (बिहार) में 24 अगस्त, 2020 (सोमवार) को सुबह 10.30 बजे से एक राष्ट्रीय सेमिनार/ वेबिनार
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