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बिहार

Bnmu Samvad

Poem। कविता/अकेला आदमी/ इन्दु पाण्डेय खण्डूड़ी

अकेला आदमी अक्सर विसंगतियों से, लड़ता हुआ इंसान खुद से, थककर मायूस हो जाता है। परत-दर-परत व्याप्त भ्रष्टाचार, दर्द से तड़पता हुआ त्रस्त, अपनी क्षमताओं

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