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Covid-19। कोरोना : घर वापसी की चिंता

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*कोरोना : घर वापसी की चिंता*

देश में कोरोना से जंग जारी है। इसको लेकर 4-17 मई तक लाॅकडाउन तीन की घोषणा कर दी गई हैं।इस बीच बढ़ते जनदवाब के बाद केंद्र सर ने दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों एवं विद्यार्थियों को घर वापसी के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। तदनुसार बिहार में भी प्रवासी मजदूरों एवं विद्यार्थियों की घर वापसी का मार्ग खुला है। लेकिन प्रवासी मजदूरों एवं विद्यार्थियों के परिजन एवं अभिभावक की चिंता का अंत नहीं हुआ है। घर वापसी में काफी सावधानी बरतने और सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था करने की जरूरत है।

बीएनएमयू के सिंडीकेट सदस्य सह राजनीति विज्ञान विभाग, टी. पी. काॅलेज, मधेपुरा के अध्यक्ष डाॅ. जवाहर पासवान ने कहा है कि सरकार सभी मजदूरों एवं विद्यार्थियों को अपने खर्च पर ससम्मान वापस लाए और इस बात की पुख्ता व्यवस्था करे कि रास्ते में उन्हें किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो एवं संक्रमण नहीं फैले। जो कोई भी वापस आना चाहता है, सबसे वापस लाया जाए। यह सुनिश्चित की जाए कि कोई भी व्यक्ति की किसी प्रकार की कागजी प्रक्रिया के कारण घर वापसी से वंचित नहीं हो। जगह- जगह फंसे लोगों को आवश्यक जांचोपरांत सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाया जाना चाहिए।

जनसंपर्क पदाधिकारी सह दर्शनशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. सुधांशु शेखर ने कहा है कि किसी भी मजदूर या विद्यार्थी से रेल या बस भाड़ा नहीं लिया जाना चाहिए। बिहार सरकार को सरकारी बसों की कमी है, लेकिन सरकार निजी बस मालिकों या दूसरे राज्यों से बसें प्राप्त कर सकती हैं।

विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डाॅ. सुभाष प्रसाद सिंह ने बताया कि बीएनएमयू, मधेपुरा के दर्जनों शिक्षकों एवं कर्मचारियों के बच्चे बिहार से बाहर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। उन सबों को उनकी सुरक्षित वापसी को लेकर चिंतित होना स्वाभाविक है।

कुलपति के निजी सहायक और कोटा में मेडिकल की तैयारी कर रही एक छात्रा के अभिभावक शंभू नारायण यादव ने कहा है कि हजारों विद्यार्थी दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं। उन लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें खाने-पीने की दिक्कत हो रही है और मानसिक समस्याओं का भी सामना करना पर रहा है। यहाँ उनके अभिभावकों का नींद हराम हो गया है। इसलिए सभी विद्यार्थियों की अविलंब सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए। जो विद्यार्थी अन्य शहरों से वापस आ रहे हैं, उन विद्यार्थियों के पास पचास से साठ किलोग्राम तक की सामग्रियाँ हैं। उन्हें रेलवे स्टेशनों एवं बस स्टैंडों पर सामानों की ढुलाई में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए पर्याप्त संख्या में कुली की व्यवस्था करने की जरूरत है। उन्होंने राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि सभी विद्यार्थियों और विशेषकर छात्राओं की सुविधाओं का ख्याल रखें। घनश्याम राय, अशोक केसरी, ओमप्रकाश यादव, अरविंद कुमार आदि दर्जनों अभिभावकों ने भी विद्यार्थियों की सुरक्षित वापसी की मांग की है।

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