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BNMU संकल्प-पत्र को केंद्र में रखकर करेंगे संघर्ष

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*संकल्प-पत्र को केंद्र में रखकर करेंगे संघर्ष*

बीएनएमयू, मधेपुरा के निर्वाचित सीनेटर डॉ. सुधांशु शेखर का गत दिनों प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए टी. पी. कॉलेज, मधेपुरा से एल. एन. एम. एस. कॉलेज, वीरपुर स्थानांतरण कर दिया गया है। इसके बाद उन्होंने शुक्रवार को वीरपुर जाकर अपना योगदान कर लिया है। इस बीच उनको लेकर सोशल मीडिया में पोस्ट की बाढ़ आ गई है। उन्हें लगातार आप सबों ने फोन कॉल, वाट्सएप, फेसबुक आदि के माध्यम से समर्थन एवं आशीर्वाद मिला रहा है। डॉ. शेखर ने बताया कि आशीर्वाद देने वालों में पूर्व कुलपति प्रो. अवध किशोर राय, पूर्व प्रभारी कुलपति प्रो. ज्ञानंजय द्विवेदी, वरिष्ठ समाजसेवी एवं साहित्यकार प्रो. भूपेंद्र नारायण यादव ‘मधेपुरी’, सेवानिवृत्त शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. दुर्गानंद झा एवं सचिव डॉ. परमानंद यादव प्रमुख हैं।‌

उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में समर्थन, सहयोग एवं आशीर्वाद देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि वे एक शिक्षक प्रतिनिधि के रूप में शिक्षकों के हित में आवाज उठाने हेतु वचनबद्ध एवं प्रतिबद्ध हैं। ऐसे में आगे भी विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मेरे विरुद्ध कुछ कार्रवाई हो सकती है। अतः किसी भी परिस्थिति में निराशा को अपने मन में नहीं आने दें और कर्तव्य-पथ‌ पर डटे रहें। सुप्रसिद्ध कवि श्री शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ के शब्दों में, “यह हार एक विराम है। जीवन महासंग्राम है। तिल-तिल मिटूँगा पर दया की भीख मैं लूँगा नहीं।… कुछ भी करो कर्तव्य पथ से किंतु भागूँगा नहीं। वरदान माँगूँगा नहीं।”

डॉ. शेखर ने बताया कि वे सीनेट चुनाव के दौरान जारी संकल्प-पत्र को लागू कराने हेतु संकल्पबद्धता हैं। इसे लागू करने हेतु कुलसचिव को आवेदन भी दे चुके हैं।‌ इसमें शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों के मान-सम्मान तथा उनके हक अधिकारों की रक्षा सबसे प्रथम बिंदु है और इसको लेकर आवाज उठाने के कारण ही उनका स्थानांतरण किया गया है। लेकिन वे किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं।

उन्होंने अपने संकल्प पत्र के आलोक में मांग किया है कि बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से नियुक्त शिक्षकों की एक वर्ष के अंदर सेवा संपुष्टि की जाए औरसभी शिक्षकों को सहज-सुलभ रूप से अंतर विश्वविद्यालय स्थानांतरण के लिए नो- ऑब्जेक्शन दिया जाए।

उन्होंने कहा है कि वर्तमान कुलपति द्वारा लगभग दो अरब रुपए की राशि राज्य सरकार को वापस करना सेवानिवृत्त शिक्षकों के लिए कब्र खोदने की तरह है। उनके इस अदूरदर्शी निर्णय के कारण सेवानिवृत्त शिक्षक एवं उनका परिवार आर्थिक संकट झेल रहा है। इसलिए कुलपति को चाहिए कि वे सभी काम को छोड़कर सबसे पहले सेवानिवृत्त शिक्षकों के संपूर्ण बकाए के भुगतान पर ध्यान दें और सभी शिक्षकों के एरियर का अविलंब भुगतान कराएं।

उन्होंने कहा कि अतिथि शिक्षकों को सात माह में एक भी रुपया नहीं मिला है। उन सबों को आंतरिक श्रोत से एकमुश्त राशि का भुगतान किया जाना चाहिए। लेकिन दुखद है कि जब कुछ अतिथि शिक्षक अपनी समस्या को लेकर कुलपति से मिले, तो उन्हें हटाने की धमकी दी गई। यह निंदनीय है।

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