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BNMU। माँ सावित्रीबाई फुले को नमन

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सावित्रीबाई फुले की जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन

समाज एवं राष्ट्र का विकास शिक्षा के विकास पर निर्भर होता है। अतः जो शिक्षा के क्षेत्र में योगदान करते हैं, वही सही अर्थों में समाज एवं राष्ट्र के निर्माता होते हैं। इस दृष्टिकोण से देखें, तो ज्योतिबाराव फुले एवं उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले का नाम आधुनिक भारत के निर्माताओं में अग्रगण्य है।

यह बात विश्वविद्यालय के सीनेट एवं सिंडिकेट सदस्य डॉ. जवाहर पासवान ने कही। वे रविवार को देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले के जन्मदिवस पर राजकीय अंबेडकर कल्याण छात्रावास, ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा में आयोजित समारोह में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि आज देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले के योगदान को जिस तरह याद करना चाहिए, वैसे नहीं किया जाता है। जब देश में राजनैतिक गुलामी के साथ-साथ सामाजिक गुलामी का भी दौर था, तब सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा के महत्व को जाना, समझा। उन्होंने वंचित वर्ग और विशेषकर महिलाओं के लिए शिक्षा का द्वार खोलकर उनमें नई चेतना का संचार किया। आज उनकी जयंती पर हमें उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना चाहिए।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. सुधांशु शेखर ने कहा कि सावित्रीबाई फुले हम सबों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। लेकिन दुख की बात है कि आज भी हम इनको बहुत कम जानते हैं। ऐसे में स्कूली पाठ्यक्रमों में इनके जीवन एवं विचारों को शामिल करने की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि सावित्रीबाई का जन्म 3 जनवरी 1831 कॅ महाराष्ट्र के सतारा जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। उन्होंने अपने पति समाज सुधारक ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर देश की शिक्षा-व्यवस्था के सुधार में महती भूमिका निभाई। हमें उनके कार्यों को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

मुख्य वक्ता बीएनएमभी काॅलेज, मधेपुरा में समाजशास्त्र विभाग के सेवानिवृत्त अध्यक्ष डाॅ. दयानंद ने कहा कि पहले देश की बहुसंख्य़क आबादी को शिक्षा से वंचित किया गया था। ज्योतिबाराव फुले और सावित्रीबाई फुले ने यह समझा कि शिक्षा के बिना प्रगति नहीं हो सकती है।

शोधार्थी सारंग तनय ने कहा कि सावित्रीबाई बाई ने खुद भी संघर्ष कर पढ़ाई की और अन्य महिलाओं के लिए भी शिक्षा का रास्ता बनाया।

छात्र नायक राजहंस राज उर्फ मुन्ना पासवान ने कहा कि सावित्रीबाई भारत में महिला सशक्तिकरण की सबसे बड़ी मिशाल है।

कार्यक्रम की शुरूआत सावित्रीबाई फुले के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि के साथ हुई।

इस अवसर पर डॉ. राजकुमार रजक, गौरव कुमार सिंह, चन्दन कुमार, बिरबल, प्रेमसागर, आशीष, दीपक, प्रिंस, दीपक, बिकाश, प्रकाश, शशी, राजकुमार, रौशन, कुन्दन, आशीष, मंजू सोरेन, पारस कुमार, गौरब, पंकज संदीप, जयकुमार, शिवम राज, सत्यम, ओम आदि उपस्थित थे।

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