मित्र डॉ. अश्विनी को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं
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शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर 5 सितंबर, 2026 को प्रतिष्ठित साहित्यिक- सांस्कृतिक संस्था भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता की ओर से चुने हुए बीस शिक्षकों को ‘शिक्षा सम्मान-2026’ प्रदान किया जाएगा। इनमें स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार तथा दिल्ली पब्लिक स्कूल, न्यूटाउन में हिंदी के शिक्षक मित्रवर डॉ. अश्विनी कुमार के नाम भी शामिल हैं। अपने अभिन्न मित्र के सम्मानित होने की खबर सुनकर मैं अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ।
मालूम हो कि डॉ. अश्विनी कुमार भवानीपुर, नवगछिया (भागलपुर) के मूल निवासी हैं। आप टी. एन. बी. कॉलेज, भागलपुर में मेरे सहपाठी रहे हैं। हम दोनों ने यहां से एक साथ स्नातक (प्रतिष्ठा) की डिग्री प्राप्त की है। मैंने दर्शनशास्त्र में और अश्विनी ने हिंदी में। खास बात यह है कि उस दौरान हम दोनों कोर्स की पढ़ाई से कहीं अधिक पत्रकारिता एवं लेखन के क्षेत्र में सक्रिय रहे और इसी में कैरियर के सपने देखने लगे।
इस दौरान हम दोनों ‘प्रभात खबर’ के लिए समाचार संकलन एवं लेखन का कार्य करते थे। हम दोनों ने कुछ दिनों तक साथ-साथ ‘दैनिक जागरण’ के लिए साहित्यक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक विषयों पर फीचर लेखन का कार्य भी किया। इसी दौरान अश्विनी बहुचर्चित पत्रिका ‘समकालीन तापमान’ में अपराध जगत की स्टोरी भी लिखा करता था, जिसमें मेरी कोई रूचि नहीं थी। वैसे मैंने भी ‘समकालीन तापमान’ में एकाध बार लिखा है, लेकिन साहित्यक एवं सांस्कृतिक विषयों पर ही।
लेकिन कतिपय कारणों से स्नातक की डिग्री मिलने के साथ ही हमारे ऊपर से पत्रकारिता में कैरियर बनाने का भूत उतर गया। फिर हम दोनों ने शिक्षण एवं स्वतंत्र लेखन का मार्ग चुना। इस बीच अश्विनी ने कलकत्ता विश्वविद्यालय, कोलकाता से स्नातकोत्तर (हिंदी) एवं बी. एड. तथा विश्व भारती विश्वविद्यालय शांतिनिकेतन से पीएच.डी. की डिग्री प्राप्त की। मैंने ये तीनों डिग्रियां भागलपुर से ही लीं।
यहांँ यह उल्लेखनीय है कि अपने पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए अश्विनी ने 2010 से ही कोलकाता के विभिन्न स्कूलों में हिंदी शिक्षक के तौर पर कार्य करना शुरू कर दिया। मैं भी कुछ दिनों के लिए वर्ष 2014 में एक विद्यालय में शिक्षक रहा और फिर वर्ष 2017 से विश्वविद्यालय शिक्षक के रूप में नियमित सेवा में आया। अभी मुझे अपने मित्र के विश्वविद्यालय शिक्षक बनने का इंतजार है। लेकिन मुझे इस बात की अत्यन्त ही प्रसन्नता है कि विभिन्न विद्यालयों में कार्य करते हुए उसने शिक्षा के क्षेत्र अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। इसकी एक बानगी है कि कैम्ब्रिज इंटरनेशनल एग्जामिनेशन (सीआईई), यूके बोर्ड के लिए कक्षा 6, 7 और 8 के विद्यार्थी इनके द्वारा तैयार पाठ्य पुस्तकों का अध्ययन करते हैं। भारतीय भाषा परिषद का यह पुरस्कार उसके शैक्षणिक कैरियर की एक बड़ी उपलब्धि है।
मुझे यह बताते हुए हार्दिक प्रसन्नता हो रही है कि अश्विनी जब से कोलकाता गया, तब से इसका फलक काफी विस्तृत हुआ और इसमें भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आपने यहांं लगभग सात वर्षों तक कार्यक्रम संयोजक के तौर पर काम किया और साहित्यिक पत्रिका ‘वागर्थ’ के लिए संपादन सहयोगी की भूमिका भी निभाई। आपने 50 से अधिक शैक्षणिक और साहित्यिक गतिविधियों से जुड़ी कार्यशालाओं में रिसोर्स पर्सन/ ट्रेनर के तौर पर भी काम किया। एक बार उसने हमारे तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर के शिक्षक प्रो. श्रीभगवान सिंह की पुस्तक ‘गांव मेरा देस’ पर केंद्रित परिचर्चा में मुझे भी आमंत्रित किया था।
अश्विनी ने विभिन्न वैचारिक और साहित्यिक पत्रिकाओं और समाचार पत्रों जैसे हंस, जनसत्ता, आउटलुक, इंडिया टुडे, नया ज्ञानोदय, पाखी, कथादेश, बाल भारती, आजकल, प्रभात खबर, वर्तमान साहित्य आदि में कहानियाँ और लेख प्रकाशित हुए हैं। आपने दैनिक जागरण, अहा ज़िंदगी और हिंदुस्तान टाइम्स ग्रुप के लिए फ़ीचर लेखन किया है। आपने लगभग चार वर्षों तक साहित्यिक मासिक पत्रिकाओं ‘सबलोग’ और ‘संवेद’ के लिए नियमित रूप से लेखन किया।आपकी बच्चों के लिए कई कहानियाँ और जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित। इसके अलावा दैनिक समाचार पत्र ‘प्रभात वार्ता’ में लगभग एक वर्ष तक नियमित फ़िल्म समीक्षाएँ प्रकाशित हुई हैं। आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) के भागलपुर एवं कोलकाता केंद्र से युवाओं के लिए कहानियाँ, कविताएँ और वार्ताएं प्रसारित हुई हैं।
मुझे आशा ही नहीं, वरन् पूर्ण विश्वास है कि आगामी पांच सितंबर को मिलने वाला पुरस्कार मेरे मित्र अश्वनी की उर्जा एवं उत्साह को बढ़ाएगा, जिससे आगे वह और भी बेहतर कार्य करने की ओर प्रवृत्त होगा।
पुनः बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।
-सुधांशु शेखर, सहसचिव, अखिल भारतीय दर्शन परिषद्













