‘फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़कर अगस्त का पेंशन दे टीएमबीयू प्रशासन’
विदित हो कि टीएमबीयू के पेंशनरों को छोड़कर राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को सरकार ने अगस्त माह के वेतन और पेंशन की राशि विमुक्त कर दी है, जिसका भुगतान हो रहा है। वहीं TMBU के पेंशनरों के लिए एक बार फिर अगस्त का पेंशन रोक दिया गया है। विगत तीन वित्तीय वर्षों से हिसाब –किताब में गड़बड़ी को लेकर राज्य सरकार और विवि के बीच चल रही रस्साकशी का खामियाजा वरिष्ठ नागरिकों को लगातार भुगतना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि पिछले डेढ़ दशक से सेवांत लाभ के मद में प्राप्त अनुदान को विधिवत रूप से लाभार्थियों में न बांटकर
फिक्स्ड डिपॉजिट करने की एक अनोखी परम्परा टीएमबीयू में शुरू हुई और एक साल पूर्व तक बदस्तूर चलती रही। जमा होते –होते फिक्स्ड डिपॉजिट की रकम 377.85 करोड़ रुपए हो गई। शिक्षा विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव श्री के के पाठक ने इस अवैध गोरखधंधे को पकड़ा और विवि पर दबाव बनाया कि वह राशि सरकार को वापस की जाए। कालांतर में कई किस्तों में लगभग ढाई सौ करोड़ रुपए विवि ने सरकार को लौटा दिए। शेष बची रकम भी सरकार मांग रही है।
इधर विगत चार साल से सरकार के महालेखाकार की आपत्ति पर वित्त विभाग ने टीएमबीयू के पेंशनरों को किए गए भुगतान के उपयोगिता प्रमाण पत्र में की जा रही गड़बड़ी पर शिकंजा कस रखा है। इसी की प्रतिक्रिया में बार–बार पेंशन अनुदान रोका जाता है। दरअसल लम्बे समय से प्राप्त अनुदान को सिलसिलेवार लाभार्थियों में न बांटकर ‘पिक एंड चूज’ किया जाता रहा। पूर्व का पैसा फिक्स्ड डिपॉजिट होता रहा और नए अनुदान से बेतरतीब दावों का भुगतान किया जाता रहा। उपयोगिता में गड़बड़ी के कारण फिर अगस्त का पेंशन अनुदान रोक दिया गया है। जबकि जिम्मेदार लोगों को वेतन जारी कर दिया गया। कसूरवार को पुरस्कार और लाचार बेकसूर को प्रताड़ना की सरकारी नीति की पेंशनर संघर्ष मंच घोर निंदा करता है।
विवि के कुलपति से मांग है कि फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़कर पेंशनरों को अगस्त माह के पेंशन का भुगतान सुनिश्चित करें अन्यथा विवि प्रशासन के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी विवि और राज्य सरकार की होगी।
प्रो पवन कुमार सिंह
संयोजक
टीएमबीयू पेंशनर संघर्ष मंच













