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*याद किए गए दयानंद* दयानंद ने दिखाया स्वराज का मार्ग : प्रधानाचार्य

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*याद किए गए दयानंद*
दयानंद ने दिखाया स्वराज का मार्ग : प्रधानाचार्य

महर्षि दयानन्द सरस्वती (1824-1883) के 203वें जन्मोत्सव पर राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के तत्वावधान में ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा में 12 फरवरी, 2026 (गुरुवार) को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य प्रो. कैलाश प्रसाद यादव ने बताया कि महर्षि दयानन्द सरस्वती का जन्म 12 फरवरी, 1824 को टंकारा (गुजरात) में हुआ। वे समाज में धार्मिक आडम्बर, अंधविश्वास एवं सामाजिक कुरीतियों के विरोधी थे। उन्होंने देश की गरीबी, अशिक्षा एवं दुर्दशा को दूर करने का प्रयास किया और स्वराज का मार्ग दिखाया।

उन्होंने बताया कि दयानंद ने सन् 1875 में आर्यसमाज की स्थापना की। उन्होंने दलितों एवं स्त्रियों की शिक्षा को बढ़ावा देने का प्रयास किया। मात्र 59 वर्ष की आयु में 30 अक्तूबर, 1883 को अजमेर में उनका देहांत हुआ।

भारतीय नवजागरण के प्रणेता थे दयानंद

कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि स्वामी दयानंद ने आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद भारतीय नवजागरण के प्रणेता थे। उन्होंने हमें अपनी सभ्यता-संस्कृति को पहचानने के लिए ‘वेदों की ओर लौटो’ का संदेश दिया था।

उन्होंने बताया कि स्वामी दयानंद ने भारतीय राष्ट्रवाद को मजबूती प्रदान किया। उन्होंने सबसे पहले ‘स्वराज्य’ का नारा दिया और हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की वकालत की।

इस अवसर पर बीसीए विभागाध्यक्ष के. के. भारती, असिस्टेंट प्रोफेसर नीतीश कुमार, भूपेश कुमार, रणवीर कुमार, रुपेश कुमार, राजदीप कुमार, अशोक मुखिया एवं डॉ. सौरभ कुमार चौहान आदि उपस्थित थे।

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गुरुवर प्रो. अवध किशोर राय जी, माननीय पूर्व कुलपति, भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा एवं पूर्व कुलपति, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।

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गुरुवर प्रो. अवध किशोर राय जी, माननीय पूर्व कुलपति, भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा एवं पूर्व कुलपति, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।