Poem। कविता/मोबाइल फोन की दुनिया/मारूति नंदन मिश्र

0
351

मोबाइल फोन की दुनिया में
सब काम आसान हो गया
मोबाइल सबका संसार हो गया
सबको मोबाइल से लगाव हो गया
जीवन मोबाइल में खो गया
मोबाइल सबका जीवन हो गया
नेताओं के लिए सभा स्थल हो गया
बच्चों का स्कूल और क्रीड़ास्थल हो गया
समय बिताने के लिए खिलौना हो गया
इसके आगे पुस्तक का ज्ञान बौना हो गया
यह सभी के लिए ज्ञान का भंडार हो गया
जमाना ऑनलाइन का बड़ा सा बाजार हो गया
दूर रहकर भी सब पास हो गया
पास वाला कहीं और खो गया
इस मायावी चमत्कार से सब परतंत्र हो गया
यह उन्मुक्त कामना पूर्ण करने का यन्त्र हो गया
काल्पनिक व्यवहार का राज हो गया
मोबाइल ही अब समाज हो गया

यही हंसाता, यही रुलाता,
हमारी गति, यही चलाता
ताकत,खबर और ज्ञान हो गया
हमारा आंख, नाक और कान हो गया
जीवन की शैली हो गया
बच्चों का पालनहार हो गया
भाई-बहन का प्यार और
माता-पिता का दुलार हो गया
यह किसी का नहीं मगर सब का हो गया
बिगाड़ने वाला और बनाने वाला हो गया
सब के पास मोबाइल, सब मोबाइल में खो गया
एक टच में सारा काम करता, जादुई चिराग हो गया…

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here