BNMU प्राचीन काल में योग के कारण ही दुनिया में हमारी पहचान थी और हम विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठित थे : कुलपति

*योग और समग्र स्वास्थ्य विषयक व्याख्यान संपन्न*

योग विश्व को भारतीय सभ्यता-संस्कृति एवं दर्शन की बहुमूल्य देन है। प्राचीन काल में योग के कारण ही दुनिया में हमारी पहचान थी और हम विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठित थे।

यह बात कुलपति प्रो. (डॉ.) आर. के. पी. रमण ने कही। वे शुक्रवार को योग और समग्र स्वास्थ्य विषयक व्याख्यान का उद्घाटन कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन दर्शनशास्त्र विभाग, भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा की ओर से किया गया।

*हमारे जीवन की संजीवनी है योग*
कुलपति ने कहा कि योग हमारे जीवन की संजीवनी है। यह हमारे शरीर, मन एवं आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करता है। इससे हम शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक रूप से उन्नत होते हैं।

*भारतीय परंपरा में है योग का विशिष्ट स्थान*
उन्होंने कहा कि पूरी भारतीय परंपरा में योग का विशिष्ट
स्थान है। आधुनिक काल में स्वामी रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, श्रीअरविंद, महात्मा गाँधी एवं विनोबा, स्वामी सत्यानंद सरस्वती, श्री-श्री रविशंकर एवं बाबा रामदेव
आदि ने भी अपने-अपने तरीके से योग को आगे बढ़ाया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से वर्ष 2015 से वैश्विक स्तर पर 21 जून को ‘योग दिवस’ मनाने की शुरूआत हुई है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मुख्य वक्ता नव नालंदा महाविहार, नालंदा के प्रो. (डॉ.) सुशीम दुबे ने बताया कि योग सर्वकालिक, सार्वभौमिक, सार्वजनिक एवं सुपरीक्षित स्वास्थ्य रक्षण एवं संवर्धन की पद्धति है। इसे आज वैज्ञानिक आधार एवं स्वीकृति भी मिल रही है।

*सबके लिए जीवनदायी है योग*
उन्होंने कहा कि आज यौगिक अभ्यासों एवं उपचारों का लाभ आज सभी लोग ले पा रहे हैं। इस रूप में योग सभी देश, जाति एवं धर्म के लिए जीवनदायी है।

*विदेशों में भी शुरू हो रहे हैं योग पाठ्यक्रम*
उन्होंने बताया कि आज योग का क्षेत्र द्रुत गति से विकासमान है। भारत ही नहीं विदेशों में भी योग को विद्यायलयीन शिक्षा के अन्तर्गत लाया जा रहा है। जगह-जगह योग पाठ्यक्रम की शुरुआत हो रही है।

*योग की शरण में है दुनिया*
उन्होंने बताया कि योग ने स्वास्थ्य लाभ के निरोधात्मक एवं प्रदायात्मक अद्वितीय कारक के रूप में प्रतिष्ठा एवं प्रसिद्धि अर्जित की। धीरे-धीरे आधुनिक मेडिकल चिकित्सा के दुष्परिणामों से त्रस्त तथा विभिन्न एक्सरसाइज़ (वेट-लिफ्टिंग, एरोबिक्स, फास्ट स्पोर्ट्स आदि) से उबे तथा निराश लोगों ने भी जब योग की शरण ली है।

*डाक्टर्स स्वयं भी करते हैं योग*
उन्होंने कहा कि आज अनेक डाक्टर्स स्वयं भी योग करते हैं तथा अन्यान्य मरीज़ों को भी योगाभ्यासों का परामर्श देते हैं। आज चुनिंदा योगाभ्यास आर्थोपेडिक, रयूमरेटिक एवं अस्थमैटिक व्याधियों में अन्य पैथियों की तुलना में सर्वाधिक कारगार एवं सटीक उपचार माने जाते हैं। पाचनतन्त्र के विभिन्न डिसऑर्डर के अतिरिक्त आज डायबिटीज़ तथा कैंसर जैसी घातक बीमारियों में भी योगाभ्यास प्रभावकारी पाये जा रहे हैं। विदेशों में आफिस जाने से पूर्व आधे घण्टे के प्राणायाम एवं आसनों के अभ्यास दिन भर शरीर को उर्जावान रखने में अत्यन्त लोकप्रिय अभ्यास तथा फैशन दोनों रूपों में है ही।

कार्यक्रम की अध्यक्षा मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) उषा सिन्हा ने कहा कि आज युवाओं को योग की उन्मुख करने की जरूरत है। इसके लिए सभी स्तर के पाठ्यक्रमों में योग को एक अनिवार्य पत्र के रूप में शामिल करना चाहिए।

ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य सह पूर्व सिंडिकेट सदस्य डॉ. परमानंद यादव ने कहा कि मानव जीवन में योग की महत्ता सदियों से कायम रही है, जो कोरोनाकाल में और भी बढ़ गई है।

सिंडिकेट सदस्य डॉ. रामनरेश सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आलोक में विश्वविद्यालय में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर योग पाठ्यक्रम को शुरू करने की जरूरत है।

कुलसचिव डॉ. मिहिर कुमार ठाकुर ने कहा कि योग पूरी मानव जाति के लिए वरदान की तरह है। इसे हम सबों को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए‌।

अतिथियों का स्वागत अकादमिक निदेशक डॉ. एम. आई. रहमान ने किया। धन्यवाद ज्ञापन दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष श्री शोभाकांत कुमार ने की। संचालन उपकुलसचिव डॉ. सुधांशु शेखर ने किया। कार्यक्रम के आयोजन में शोधार्थी द्वय सारंग तनय एवं सौरभ कुमार चौहान, नयन रंजन, गौरव कुमार सिंह, राजहंस राज, दीपक कुमार, सुपेन्द्र कुमार सुमन, माधव कुमार, आदि ने सहयोग किया।

इस अवसर पर पटना विश्वविद्यालय के पूर्व प्रति कुलपति डॉ. राजाराम प्रसाद, डीएसडब्ल्यू डॉ. पवन कुमार, डॉ. अनीता महतो, डॉ. कृति चौधरी, डॉ.उत्तम सिंह, डॉ. अनिल, डॉ. शिवेन्द्र प्रताप सिंह, आनंद कुमार भूषण, अमरेश कुमार अमर, निखिल कुमार, प्रभाकर कुमार, अरमान अली, सोनू भारती, प्रकाश कुमार, रमेश राम, गुरुदेव कुमार, अमृता मिश्रा, अरुण कुमार, अशोक कुमार, विमलेश कुमार, दिव्यांशु कुमार, किरण कुमारी मनीषा कुमारी, एनबीसीसी क्लासेज, मोनिका, नयाज, निरंजन, प्रिंस कुमार, प्रियंका कुमारी, सपना जयसवाल, राहुल आनंद, राजू राम, बालक राय, रामानुज, रवि रंजन कुमार, रितु कुमारी, सलोनी, श्रेया रानी, शिवानंद प्रकाश, शिवराज, सूरज कुमार, स्वीटी कुमारी आदि उपस्थित थे।

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B. N. Mandal University, Madhepura, Bihar, India

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