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Day: July 4, 2024

मानवोत्थान एवं राष्ट्रोत्कर्ष के लिए समर्पित होते हैं संत : कुलपति 
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मानवोत्थान एवं राष्ट्रोत्कर्ष के लिए समर्पित होते हैं संत : कुलपति 

*राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित*   मानवोत्थान एवं राष्ट्रोत्कर्ष के लिए समर्पित होते हैं संत : कुलपति   सच्चे संत पृथ्वी पर चलते-फिरते ईश्वर हैं। वे सभी अपने निजी स्वार्थों से ऊपर उठकर समाज एवं राष्ट्र के लिए जीते हैं। उनका जीवन मानवोत्थान एवं राष्ट्रोत्कर्ष के लिए समर्पित होता है।   यह बात बीएनएमयू, मधेपुरा के कुलपति प्रो. बी. एस. झा ने कही। वे गुरुवार को 'भारतीय संत-परंपरा : मानवोत्थान एवं राष्ट्रोत्कर्ष' विषयक राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन कर रहे थे।   कार्यक्रम का आयोजन नव वेदांत के प्रतिपादक युगनायक स्वामी श्री विवेकानंदजी के 122 वें पुण्य स्मरण तथा श्रीमज्जगद् गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानन्द सरस्वतीजी महाराज के 82 वें प्राकट्य महोत्सव (राष्ट्रोत्कर्ष दिवस) के अवसर पर स्नातकोतर दर्शनशास्त्र विभाग, ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा, आदित्यवा...
राज्यपाल सचिवालय, बिहार (जन-सम्पर्क शाखा) राजभवन, पटना-800022  प्रेस-विज्ञप्ति  संख्या-132/2024  राजभवन में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर विमर्श हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया  पटना, 03 जुलाई, 2024:- बिहार में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर  विमर्श हेतु राजभवन में राज्य के कुलपतियों का नेतृत्व विकास विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसके उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए माननीय राज्यपाल श्री राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित बनाने में शिक्षा का अहम योगदान है। बिहार की उच्च शिक्षा को नई दिशा देने हेतु हमें लक्ष्य निर्धारित कर उसे प्राप्त करने हेतु अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी।  उन्होंने कहा कि आज हमें बिहार के लिए एक नया अध्याय लिखने की जरूरत है। इसके लिए आवश्यक है कि हम पूर्व की कमियों को भूलकर नई शुरूआत करें। भावी पीढ़ी को तैयार करने का दायित्व हम सब का है।  उन्होंने कार्यशाला के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के सपने को साकार करने में हमें सहभागी बनना है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में नई पहल की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि मजबूत इच्छाशक्ति के साथ काम करने पर सबकुछ साध्य है।  राज्यपाल ने कुलपतियों से कहा कि भगवान ने उन्हें इस विशिष्ट कार्य के लिए चुना है। इस बात का निरंतर ध्यान रखने पर अपने दायित्वों के निर्वहन में उन्हें कोई कठिनाई नही होगी।  कार्यशाला में शासन और प्रशासनिक मुद्दे (Governance and Administrative issues), शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, नई पहल और नवाचार, लक्ष्य की प्राप्ति में आनेवाली चुनौतियाँ, कार्य योजना आदि विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।  कार्यशाला को नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो० मिलिन्द सुधाकर मराठे, भारतीय भाषाओं के संवर्धन हेतु उच्चाधिकार प्राप्त समिति, भारतीय भाषा समिति के चेयरमैन पद्मश्री श्री चामू कृष्ण शास्त्री, आई०आई०एम०, राँची के निदेशक डॉ० दीपक कुमार श्रीवास्तव, ऑल इंडिया कॉन्सिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन के वाइस चेयरमैन डॉ० अभय जेरे, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव डॉ० मनीष जोशी, गुरु घासी दास केन्द्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर के प्रो० आलोक कुमार चक्रवाल एवं दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० के०एन० सिंह ने संबोधित किया। उन्होंने बिहार के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिये।  कार्यशाला में राज्यपाल के प्रधान सचिव श्री रॉबर्ट एल० चोंग्यू, बिहार के विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण तथा राज्यपाल सचिवालय के पदाधिकारीगण एवं कर्मीगण उपस्थित थे।
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राज्यपाल सचिवालय, बिहार (जन-सम्पर्क शाखा) राजभवन, पटना-800022 प्रेस-विज्ञप्ति संख्या-132/2024 राजभवन में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर विमर्श हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया पटना, 03 जुलाई, 2024:- बिहार में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर विमर्श हेतु राजभवन में राज्य के कुलपतियों का नेतृत्व विकास विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसके उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए माननीय राज्यपाल श्री राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित बनाने में शिक्षा का अहम योगदान है। बिहार की उच्च शिक्षा को नई दिशा देने हेतु हमें लक्ष्य निर्धारित कर उसे प्राप्त करने हेतु अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी। उन्होंने कहा कि आज हमें बिहार के लिए एक नया अध्याय लिखने की जरूरत है। इसके लिए आवश्यक है कि हम पूर्व की कमियों को भूलकर नई शुरूआत करें। भावी पीढ़ी को तैयार करने का दायित्व हम सब का है। उन्होंने कार्यशाला के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के सपने को साकार करने में हमें सहभागी बनना है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में नई पहल की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि मजबूत इच्छाशक्ति के साथ काम करने पर सबकुछ साध्य है। राज्यपाल ने कुलपतियों से कहा कि भगवान ने उन्हें इस विशिष्ट कार्य के लिए चुना है। इस बात का निरंतर ध्यान रखने पर अपने दायित्वों के निर्वहन में उन्हें कोई कठिनाई नही होगी। कार्यशाला में शासन और प्रशासनिक मुद्दे (Governance and Administrative issues), शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, नई पहल और नवाचार, लक्ष्य की प्राप्ति में आनेवाली चुनौतियाँ, कार्य योजना आदि विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यशाला को नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो० मिलिन्द सुधाकर मराठे, भारतीय भाषाओं के संवर्धन हेतु उच्चाधिकार प्राप्त समिति, भारतीय भाषा समिति के चेयरमैन पद्मश्री श्री चामू कृष्ण शास्त्री, आई०आई०एम०, राँची के निदेशक डॉ० दीपक कुमार श्रीवास्तव, ऑल इंडिया कॉन्सिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन के वाइस चेयरमैन डॉ० अभय जेरे, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव डॉ० मनीष जोशी, गुरु घासी दास केन्द्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर के प्रो० आलोक कुमार चक्रवाल एवं दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० के०एन० सिंह ने संबोधित किया। उन्होंने बिहार के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिये। कार्यशाला में राज्यपाल के प्रधान सचिव श्री रॉबर्ट एल० चोंग्यू, बिहार के विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण तथा राज्यपाल सचिवालय के पदाधिकारीगण एवं कर्मीगण उपस्थित थे।

राजभवन में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर विमर्श हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया पटना, 03 जुलाई, 2024:- बिहार में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर विमर्श हेतु राजभवन में राज्य के कुलपतियों का नेतृत्व विकास विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसके उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए माननीय राज्यपाल श्री राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित बनाने में शिक्षा का अहम योगदान है। बिहार की उच्च शिक्षा को नई दिशा देने हेतु हमें लक्ष्य निर्धारित कर उसे प्राप्त करने हेतु अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी। उन्होंने कहा कि आज हमें बिहार के लिए एक नया अध्याय लिखने की जरूरत है। इसके लिए आवश्यक है कि हम पूर्व की कमियों को भूलकर नई शुरूआत करें। भावी पीढ़ी को तैयार करने का दायित्व हम सब का है। उन्होंने कार्यशाला के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के स...