
Poem। कविता/ एक सपना/प्रोफेसर डाॅ. इंदु पाण्डेय खण्डूड़ी
एक सपना स्वतंत्रता पा लेने में, एक अधिकार, एक सुख, सबको एक सन्तुष्टि होती है। शायद ही कोई सोचता हो, स्वतंत्रता सिर्फ पा लेने तक

एक सपना स्वतंत्रता पा लेने में, एक अधिकार, एक सुख, सबको एक सन्तुष्टि होती है। शायद ही कोई सोचता हो, स्वतंत्रता सिर्फ पा लेने तक

अपना क्या है हवा, पानी, धूप, रोशनी इंसान जाने कैसे सोचता है, एक छोटा सा सृष्टि का अंश पूरी सृष्टि पर अधिकार मानता है। मुझे

कृष्ण ने सिखाया है सहनशीलता और धैर्य कमजोरी और कायरता नहीं। एक सीमा तक सहन कर लेना, आप समेट लेना अपमान , चेतावनी देकर धर्म

डॉ कविता भट्ट ‘शैलपुत्री’ श्रीनगर गढ़वाल, उत्तराखंड विषाद मन का, डूबते दिन- सा, लेखनी असहयोग कर बैठी। वो मेरी चूनर का सितारा तय था, उसकी

बिल्कुल आसान था डॉ. कविता भट्ट ‘शैलपुत्री’

गजल हमारे वास्ते भी अब जरा कोई रियायत हो। नहीं हम चाहते हम पर फकत झूठी सियासत हो। यकीं करिये हमारा-आपका रिश्ता घरेलू है, बिना

गजल हमसे है उम्मीद हमीं से आखिर क्यों ? सब कर लें मंजूर खुशी से आखिर क्यों? तुम भी हो इंसान गलत हो सकते हो

सारा कर्ज चुका देंगे आये हैं साहब चल उनको अपना दर्द दिखा देंगे। बोलेंगे कुछ मुहलत दे दें सारा कर्ज चुका देंगे। कर्ज लिया है
आपके तो मायने बेशक रहेंगे। हाँ मगर यह तय नहीं कबतक रहेंगे। झूठ को पहचानने देंगे नहीं वो जानकर खामोश हम जबतक रहेंगे। आज भेड़ों

टी. पी. काॅलेज, मधेपुरा में इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. गजेंद्र कुमार ने 12 अगस्त, 2020 को बी. एन. मंडल. विश्वविद्यालय, मधेपुरा के परिसंपदा पदाधिकारी
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