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BNMU स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के पांचवें दिन शोधार्थियों के प्रशिक्षण का कार्य जारी रहा।

स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के पांचवें दिन शोधार्थियों के प्रशिक्षण का कार्य जारी रहा। पूर्व की भांति दो सत्रों में प्रशिक्षण कार्य दिया गया। पहले सत्र में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के डा अरमान आलम ने शोध में सांख्यिकी के उपयोग पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया किअनुसंधान में सांख्यिकी एक मूल्यवान उपकरण है, यह शोधकर्ताओं को जटिल डेटा सेट लेने, उन्हें तोड़ने और महत्वपूर्ण और सार्थक निष्कर्ष निकालने की क्षमता प्रदान करता है। इस अनुभाग में, हम अनुसंधान के विशिष्ट क्षेत्रों में सांख्यिकी के उपयोग का पता लगाएंगे। अनुसंधान में सांख्यिकी का एक आवश्यक उपयोग वर्णनात्मक सांख्यिकी है।सांख्यिकीय अवधारणाओं की महारत चिकित्सा अनुसंधान में कई त्रुटियों और पूर्वाग्रहों को रोक सकती है। अकादमिक विषयों में सांख्यिकी अद्वितीय है क्योंकि अध्ययन की योजना बनाने, नमूने का चयन करने, डेटा का प्रबंधन करने और परिणामों की व्याख्या करने सहित लगभग सभी शोध जांचों के हर चरण में सांख्यिकीय विचार की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया किसबसे प्रसिद्ध सांख्यिकीय उपकरण माध्य, संख्याओं का अंकगणितीय औसत, माध्य और मोड, रेंज, फैलाव, मानक विचलन, अंतर चतुर्थक सीमा, भिन्नता का गुणांक आदि हैं। एसएएस और एसपीएसएस जैसे सॉफ्टवेयर पैकेज भी हैं जो उपयोगी हैं बड़े नमूना आकार के परिणामों की व्याख्या करना। आगे उन्होंने बताया किवैज्ञानिक शोध के लिए सांख्यिकीय विधियाँ आवश्यक हैं। वास्तव में, सांख्यिकीय विधियाँ वैज्ञानिक शोध पर हावी हैं क्योंकि उनमें योजना बनाना, डिज़ाइन करना, डेटा एकत्र करना, विश्लेषण करना, सार्थक व्याख्या करना और शोध निष्कर्षों की रिपोर्टिंग करना शामिल है। इसके अलावा, शोध परियोजना से प्राप्त परिणाम तब तक अर्थहीन कच्चे डेटा होते हैं जब तक कि सांख्यिकीय उपकरणों के साथ उनका विश्लेषण न किया जाए। इसलिए, शोध निष्कर्षों को सही ठहराने के लिए शोध में सांख्यिकी का निर्धारण अत्यंत आवश्यक है। इस लेख में, हम चर्चा करेंगे कि जीव विज्ञान के लिए सांख्यिकीय विधियों का उपयोग कैसे जैविक अध्ययनों का विश्लेषण करने के लिए सार्थक निष्कर्ष निकालने में मदद कर सकता है।
दूसरे सत्र में तिलका मांझी विश्वविद्यलय से आए सांख्यिकी विभाग के प्रो डॉ नेसार अहमद ने शोध में उपयोग में लाए जाने वाले आधुनिक तकनीकों की चर्चा करते हुए आर प्रोग्रामिंग को विस्तार से शोधार्थियों के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि आर सांख्यिकीय कंप्यूटिंग और डेटा विज़ुअलाइज़ेशन के लिए एक प्रोग्रामिंग भाषा है । इसे डेटा माइनिंग , जैव सूचना विज्ञान और डेटा विश्लेषण के क्षेत्र में अपनाया गया है । विस्तृत चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि डेटा विश्लेषण और सांख्यिकीय सॉफ्टवेयर के विकास के लिए सांख्यिकीविदों और डेटा खनिकों द्वारा डेटा विज्ञान में आर का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। आर उपलब्ध सबसे व्यापक सांख्यिकीय प्रोग्रामिंग भाषाओं में से एक है, जो डेटा हेरफेर और विज़ुअलाइज़ेशन से लेकर सांख्यिकीय विश्लेषण तक सब कुछ संभालने में सक्षम है।
ऑनलाइन और ऑफलाइन लगभग सौ से अधिक सहभागी भारत के विभिन्न कोणों से जुड़े हुए रहे। कार्यशाला के निदेशक प्रो डॉ एम आई रहमान ने बताया कि विभाग में सहभागियों के लिए पूरी व्यवस्था की गई है उनके लिए चाय पानी नाश्ता का भी पूरी व्यवस्था की गई है।
कल फिर दो सत्रों में कार्यक्रम का आयोजन होगा। पहले सत्र में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बी के सिंह एवम् अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से डॉ नशीद इम्तेयाज अपना व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे दूसरे सत्र में समापन समारोह आयोजित किया जाएगा जिस के मुख्य अतिथि भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के पूर्व प्रति कुलपति एवम् जय प्रकाश विश्वविद्यालय के पूर्व कुपति प्रो डॉ फारुक अली के रूप में उपस्थित रहेंगे उन्हों के हाथों सहभागियों को प्रमाणपत्र हस्तगत कराया जाएगा।