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BNMU आत्मविकास की अवधारणा : संदर्भ अद्वैत वेदांत विषयक व्याख्यान आयोजित

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आत्मविकास की अवधारणा : संदर्भ अद्वैत वेदांत विषयक व्याख्यान आयोजित
मनुष्य को उसके मूल स्वरूप का बोध कराना ही अद्वैत वेदांत का मुख्य उद्देश्य है। हमें    अपने आपको जानने की आवश्यकता है। हम अपने मूल स्वरूप को जानेंगे, तभी हम अपना आत्मविकास कर सकते हैं। यह बात पटना विश्वविद्यालय, पटना (बिहार) के दर्शनशास्त्र विभाग से सेवानिवृत्त प्रोफेसर डाॅ. नरेश प्रसाद तिवारी ने कही। वे सोमवार को बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के फेसबुक पेज फेसबुक डाॅट काॅम/ बीएनएमयू संवाद पर व्याख्यान दे रहे थे। इसका विषय था- ‘आत्मविकास की अवधारणा : संदर्भ  अद्वैत वेदांत’।

 

उन्होंने बताया कि  अद्वैत वेदांत संपूर्ण चराचर जगत में चेतना का वास मानता है। चेतना सास्वत होता है। यहाँ ब्रह्म को सच्चिदानंद माना गया है। यही ब्रह्म ही आत्मा है। यही हमारा मूल स्वरूप है।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति  का भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों दृष्टि से विकास आवश्यक है।  हमारे शरीर, मन एवं आत्मा तीनों का विकास आवश्यक है।
जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने प्रोफेसर तिवारी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि प्रोफेसर तिवारी भारतीय दर्शन परिषद्, बिहार दर्शन  परिषद् आदि के आजीवन सदस्य हैं।आप दर्शन परिषद्, बिहार के सामान्य अध्यक्ष (2018) रह चुके हैं।
कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में आपके शोध आलेख प्रकाशित हो चुके हैं।  था। आपने 9 पुस्तकों की रचना की है। इनमें ग्रीक एवं मध्ययुगीन दर्शन : एक अवलोकन, भारतीय दर्शन एवं पाश्चात्य दर्शन, भाषा विषलेषण (भारतीय),  गाँधी के छह नैतिक मूल्य, मध्ययुगीन भारतीय दर्शन, चार्वाक का नैतिक दर्शन, भारतीय तर्कशास्त्र प्रमुख हैं। आपकी एक पुस्तक भाषा विषलेषण  (भारतीय) को 2016 में अखिल भारतीय दर्शन परिषद् द्वारा पुरस्कृत किया गया है।

 

प्रोफेसर तिवारी ने पटना विश्वविद्यालय, पटना से स्नातक (1975) एवं स्नातकोत्तर (1977) की डिग्री प्राप्त की और रांची विश्वविद्यालय, राँची से पी-एच. डी. (1982) किया। आपने जनवरी 1979 में मगध विश्वविद्यालय, बोध गया में सहायक प्राध्यापक के रूप में योगदान दिया। मार्च 1979 में आप  पटना विश्वविद्यालय, पटना की सेवा में आए। आप जून 2016 में विश्वविद्यालय दर्शनशास्त्र विभाग, पटना विश्वविद्यालय, पटना से प्रोफेसर के रूप में सेवानिवृत्त हुए। आपके निदेशन में कुल 30 शोधार्थियों ने  पी-एच. डी. की उपाधि प्राप्त की है।
जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने सभी शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से  अनुरोध किया है कि वे विश्वविद्यालय के फेसबुक पेज पर पूर्वाह्न 11.30 बजे तक जुड़े और उत्साहवर्धन करें।
उन्होंने बताया कि आगे भी कई व्याख्यान होंगे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डाॅ. ज्ञानंजय द्विवेदी, राजभवन के जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुनील कुमार पाठक सहित कई गणमान्य विद्वानों के व्याख्यान आयोजित किए जाएँगे।

व्याख्यान 8 को

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सादर आमंत्रण
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आत्मविकास की अवधारणा : संदर्भ अद्वैत वेदांत
-प्रोफेसर डाॅ. नरेश प्रसाद तिवारी
दर्शनशास्त्र विभाग, पटना विश्वविद्यालय, पटना (बिहार)
8 जून, 2020 (सोमवार), पूर्वाह्न 11.30 बजे

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व्याख्यान 8 जून को

बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के फेसबुक पेज फेसबुक डाॅट काॅम/ बीएनएमयू संवाद पर लगातार व्याख्यानों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में 8 जून, 2020 (सोमवार), को पूर्वाह्न  11.30 बजे से एक लाइव व्याख्यान का आयोजन सुनिश्चित है। इसका विषय है- ‘आत्मविकास की अवधारणा : संदर्भ  अद्वैत वेदांत’।

इसके वक्ता हैं- प्रोफेसर डाॅ. नरेश प्रसाद तिवारी। प्रोफेसर तिवारी पटना विश्वविद्यालय, पटना (बिहार) के दर्शनशास्त्र विभाग से सेवानिवृत्त हैं।आप भारतीय दर्शन परिषद्, बिहार दर्शन  परिषद् आदि के आजीवन सदस्य हैं।आप दर्शन परिषद्, बिहार के सामान्य अध्यक्ष (2018) रह चुके हैं।

कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में आपके शोध आलेख प्रकाशित हो चुके हैं।  था। आपने 9 पुस्तकों की रचना की है। इनमें ग्रीक एवं मध्ययुगीन दर्शन : एक अवलोकन, भारतीय दर्शन एवं पाश्चात्य दर्शन, भाषा विषलेषण (भारतीय),  गाँधी के छह नैतिक मूल्य, मध्ययुगीन भारतीय दर्शन, चार्वाक का नैतिक दर्शन, भारतीय तर्कशास्त्र प्रमुख हैं। आपकी एक पुस्तक भाषा विषलेषण  (भारतीय) को 2016 में अखिल भारतीय दर्शन परिषद् द्वारा पुरस्कृत किया गया है।

प्रोफेसर तिवारी ने पटना विश्वविद्यालय, पटना से स्नातक (1975) एवं स्नातकोत्तर (1977) की डिग्री प्राप्त की और रांची विश्वविद्यालय, राँची से पी-एच. डी. (1982) किया। आपने जनवरी 1979 में मगध विश्वविद्यालय, बोध गया में सहायक प्राध्यापक के रूप में योगदान दिया। मार्च 1979 में आप  पटना विश्वविद्यालय, पटना की सेवा में आए। आप जून 2016 में विश्वविद्यालय दर्शनशास्त्र विभाग, पटना विश्वविद्यालय, पटना से प्रोफेसर के रूप में सेवानिवृत्त हुए। आपके निदेशन में कुल 30 शोधार्थियों ने  पी-एच. डी. की उपाधि प्राप्त की है। 

जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने सभी शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से  अनुरोध किया है कि वे विश्वविद्यालय के फेसबुक पेज पर पूर्वाह्न 11.30 बजे तक जुड़े और उत्साहवर्धन करें।

उन्होंने बताया कि आगे भी कई व्याख्यान होंगे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डाॅ. ज्ञानंजय द्विवेदी, राजभवन के जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुनील कुमार पाठक सहित कई गणमान्य विद्वानों के व्याख्यान आयोजित किए जाएँगे।

BNMU। कुलपति की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक संपन्न। स्नातकोत्तर विभागों को सुदृढ़ करने पर बल

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विश्वविद्यालय के नैक मूल्यांकन हेतु विभिन्न स्नातकोत्तर विभागों को सुदृढ़ करने हेतु एक आवश्यक बैठक शनिवार को कुलपति डाॅ. ज्ञानंजय द्विवेदी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इसमें पंद्रह मुद्दों पर चर्चा हुई और आवश्यक निर्णय लिए गए।

सभी स्नातकोत्तर विभागों में बुनियादी सुविधाओं की बहाली और कम्प्यूटर एवं अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करने, अर्थशास्त्र भवन के पूर्ण निर्माण, आंतरिक रोड एवं साइकिल स्टैंड के निर्माण, चापाकल, बोरिंग की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया। साथ ही  विभागीय पुस्तकालयों को सुव्यवस्थित करने, सभी विभागों में एक स्मार्ट क्लास रूम बनाने और शिक्षकों की कमी दूर करने का भी निर्णय लिया गया। इसके अलावा नार्थ कैम्पस में जगह-जगह एनएसएस द्वारा स्लोगन लगाने का निर्णय लिया गया।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन नैक मूल्यांकन हेतु प्रतिबद्ध है। सभी पदाधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी इसमें अपना-अपना योगदान दें।
इस अवसर पर वित्तीय परामर्शी सुरेशचंद्र दास, डीएसडब्लू डॉ. अशोक कुमार यादव, वाणिज्य संकायाध्यक्ष डाॅ. लम्बोदर झा, कुलानुशासक डॉ. बी. एन. विवेका, सीसीडीसी डॉ. इम्तियाज अंजुम, कुलसचिव डॉ. कपिलदेव प्रसाद, वित्त पदाधिकारी सूरजदेव प्रसाद, नैक के निदेशक डॉ. मोहित कुमार घोष, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. नरेश कुमार, डॉ. ललन प्रसाद अद्री, डॉ. कैलाश प्रसाद यादव, डॉ. मनोरंजन प्रसाद, डॉ. सिद्धेश्वर काश्यप, डॉ. भावानंद झा, डॉ. रीता सिंह, डॉ. अरूण कुमार, डॉ. बी. एन. यादव, डॉ. उदयकृष्ण, बी. पी. यादव, डाॅ. आबिद उस्मानी,  डॉ. अर्जुन कुमार, सुभाष झा, डॉ. अशोक कुमार सिंह, डाॅ. शंकर कुमार मिश्र, डाॅ. सुधांशु शेखर आदि उपस्थित थे।

BNMU। नैक मूल्यांकन को लेकर कुलपति की अध्यक्षता में बैठक

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विश्वविद्यालय के नैक मूल्यांकन हेतु विभिन्न स्नातकोत्तर विभागों को सुदृढ़ करने हेतु एक आवश्यक बैठक शनिवार को कुलपति डाॅ. ज्ञानंजय द्विवेदी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इसमें पंद्रह मुद्दों पर चर्चा हुई और आवश्यक निर्णय लिए गए।
सभी स्नातकोत्तर विभागों में बुनियादी सुविधाओं की बहाली और कम्प्यूटर एवं अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करने, अर्थशास्त्र भवन के पूर्ण निर्माण, आंतरिक रोड एवं साइकिल स्टैंड के निर्माण, चापाकल, बोरिंग की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया। साथ ही  विभागीय पुस्तकालयों को सुव्यवस्थित करने, सभी विभागों में एक स्मार्ट क्लास रूम बनाने और शिक्षकों की कमी दूर करने का भी निर्णय लिया गया। इसके अलावा नार्थ कैम्पस में जगह-जगह एनएसएस द्वारा स्लोगन लगाने का निर्णय लिया गया।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन नैक मूल्यांकन हेतु प्रतिबद्ध है। सभी पदाधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी इसमें अपना-अपना योगदान दें।
इस अवसर पर वित्तीय परामर्शी सुरेशचंद्र दास, डीएसडब्लू डॉ. अशोक कुमार यादव, वाणिज्य संकायाध्यक्ष डाॅ. लम्बोदर झा, कुलानुशासक डॉ. बी. एन. विवेका, सीसीडीसी डॉ. इम्तियाज अंजुम, कुलसचिव डॉ. कपिलदेव प्रसाद, वित्त पदाधिकारी सूरजदेव प्रसाद, नैक के निदेशक डॉ. मोहित कुमार घोष, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. नरेश कुमार, डॉ. ललन प्रसाद अद्री, डॉ. कैलाश प्रसाद यादव, डॉ. मनोरंजन प्रसाद, डॉ. सिद्धेश्वर काश्यप, डॉ. भावानंद झा, डॉ. रीता सिंह, डॉ. अरूण कुमार, डॉ. बी. एन. यादव, डॉ. उदयकृष्ण, बी. पी. यादव, डाॅ. आबिद उस्मानी,  डॉ. अर्जुन कुमार, सुभाष झा, डॉ. अशोक कुमार सिंह, डाॅ. शंकर कुमार मिश्र, डाॅ. सुधांशु शेखर आदि उपस्थित थे।

BNMU # नैक मूल्यांकन हेतु विभिन्न स्नातकोत्तर विभागों को सुदृढ़ करने हेतु एक आवश्यक बैठक

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विश्वविद्यालय के नैक मूल्यांकन हेतु विभिन्न स्नातकोत्तर विभागों को सुदृढ़ करने हेतु एक आवश्यक बैठक शनिवार को कुलपति डाॅ. ज्ञानंजय द्विवेदी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इसमें पंद्रह मुद्दों पर चर्चा हुई और आवश्यक निर्णय लिए गए।
सभी स्नातकोत्तर विभागों में बुनियादी सुविधाओं की बहाली और कम्प्यूटर एवं अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करने, अर्थशास्त्र भवन के पूर्ण निर्माण, आंतरिक रोड एवं साइकिल स्टैंड के निर्माण, चापाकल, बोरिंग की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया। साथ ही  विभागीय पुस्तकालयों को सुव्यवस्थित करने, सभी विभागों में एक स्मार्ट क्लास रूम बनाने और शिक्षकों की कमी दूर करने का भी निर्णय लिया गया। इसके अलावा नार्थ कैम्पस में जगह-जगह एनएसएस द्वारा स्लोगन लगाने का निर्णय लिया गया।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन नैक मूल्यांकन हेतु प्रतिबद्ध है। सभी पदाधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी इसमें अपना-अपना योगदान दें।
इस अवसर पर वित्तीय परामर्शी सुरेशचंद्र दास, डीएसडब्लू डॉ. अशोक कुमार यादव, वाणिज्य संकायाध्यक्ष डाॅ. लम्बोदर झा, कुलानुशासक डॉ. बी. एन. विवेका, सीसीडीसी डॉ. इम्तियाज अंजुम, कुलसचिव डॉ. कपिलदेव प्रसाद, वित्त पदाधिकारी सूरजदेव प्रसाद, नैक के निदेशक डॉ. मोहित कुमार घोष, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. नरेश कुमार, डॉ. ललन प्रसाद अद्री, डॉ. कैलाश प्रसाद यादव, डॉ. मनोरंजन प्रसाद, डॉ. सिद्धेश्वर काश्यप, डॉ. भावानंद झा, डॉ. रीता सिंह, डॉ. अरूण कुमार, डॉ. बी. एन. यादव, डॉ. उदयकृष्ण, बी. पी. यादव, डाॅ. आबिद उस्मानी,  डॉ. अर्जुन कुमार, सुभाष झा, डॉ. अशोक कुमार सिंह, डाॅ. शंकर कुमार मिश्र, डाॅ. सुधांशु शेखर आदि उपस्थित थे।

BNMU। ‘लोकल को ग्लोबल बनाने के लिए बनो भोकल : अंग जनपद के संदर्भ में’ व्याख्यान 6 को

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बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के फेसबुक पेज Facebook.com/bnmusamvad पर लगातार व्याख्यानों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में 06 जून, 2020 (शनिवार), को पूर्वाह्न  11-12 बजे से एक लाइव व्याख्यान का आयोजन सुनिश्चित है। इसका विषय है- ‘लोकल को ग्लोबल बनाने के लिए बनो भोकल : अंग जनपद के संदर्भ में’।
इसके वक्ता हैं- प्रोफेसर डाॅ. रमन सिन्हा। प्रोफेसर सिन्हा संप्रति तिलकामाँझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर (बिहार) अंतर्गत  सुंदरवती महिला महाविद्यालय, भागलपुर के इतिहास विभाग में कार्यरत हैं। आपकी अंग जनपद के इतिहास में गहरी रूचि है और आपके प्रयासों से इतिहास के कई अनछुए पहलू सामने आए हैं। आप इंडियन हिस्ट्री काग्रेंस, बिहार इतिहास परिषद् आदि के आजीवन सदस्य हैं। आपके निदेशन में  कुल 11 शोधार्थियों ने  पी-एच. डी. की उपाधि प्राप्त की है। आपकी कई पुस्तकें प्रकाशित हैं और कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में आपके शोध आलेख प्रकाशित हो चुके हैं।  
 
जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने सभी शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से  अनुरोध किया है कि वे विश्वविद्यालय के फेसबुक पेज पर पूर्वाह्न 11-12 बजे तक जुड़े और उत्साहवर्धन करें।
उन्होंने बताया कि आगे भी कई व्याख्यान होंगे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डाॅ. ज्ञानंजय द्विवेदी, पटना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डाॅ. नरेश प्रसाद तिवारी, राजभवन के जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुनील कुमार पाठक सहित कई गणमान्य विद्वानों के व्याख्यान आयोजित किए जाएँगे।

BNMU। पर्यावरण दिवस पर पौधारोपण

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पर्यावरण दिवस के अवसर पर नार्थ कैम्पस के डाॅ. महावीर प्रसाद यादव पार्क में पौधारोपण किया गया। इस अवसर पर जंतु विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डाॅ. अरूण कुमार ने कहा कि महावीर पार्क को निरंतर  विकसित किया जा रहा है।  उसी कड़ी में शुक्रवार को पौधारोपण किया गया।
बीएनमुस्टा के महासचिव डाॅ नरेश कुमार ने कहा कि वन विभाग के सहयोग से  नार्थ कैम्पस में काफी पौधे लगाए गए हैं। शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के जन्मदिवस पर माय बर्थ, माय अर्थ योजना के तहत भी काफी लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में पौधों का अत्यधिक महत्व है। हम सबों को प्रत्येक वर्ष कम से कम तीन पौधे लगाने चाहिए।
इस अवसर पर हिंदी विभाग के प्रभारी अध्यक्ष  डाॅ. सिद्धेश्वर काश्यप, पीआरओ डाॅ. सुधांशु शेखर, सीनेटर रंजन यादव, रामनरेश भारती, प्रांगण रंगमंच के संयुक्त सचिव आशीष कुमार सत्यार्थी, शशिभूषण कुमार, प्रदीप कुमार यादव, अभिषेक कुमार, गौरब कुमार सिंह आदि उपस्थित थे।

पौधारोपण

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भारतीय संस्कृति संपूर्ण चराचर जगत को एक मानती है। हमारी यह मान्यता है कि मनुष्य, मनुष्येतर प्राणी एवं चराचर जगत एक है।हम सबों के विकास एवं कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं। इसलिए हमारी संस्कृति में प्रकृति-पर्यावरण के संरक्षण पर विशेष बल दिया गया है। प्रकृति- पर्यावरण की रक्षा पर ही मानव जीवन और संपूर्ण चराचर जगत का अस्तित्व निर्भर करता है। यह बात कुलपति प्रोफेसर डाॅ. ज्ञानंजय द्विवेदी ने कही। वे गुरूवार को ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय में अपने स्वागत समारोह और प्रधानाचार्य के जन्मदिवस समारोह में बोल रहे थे। यह आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में किया गया था।

कुलपति ने कहा कि प्रकृति-पर्यावरण सभी जीवों के लिए है। इस पर सभी जीवों का समान अधिकार है। एक विवेकशील प्राणी के रूप में मानव की यह विशेष जिम्मेदारी है कि वो प्रकृति-पर्यावरण की रक्षा करे। इस दिशा में पौधारोपण एक महत्वपूर्ण कदम है।

कुलपति ने आह्वान किया कि धरती एवं पर्यावरण की सुरक्षा एवं इसकी देखभाल हम मानव का परम धर्म है। पौधे ना केवल हमें स्वच्छ वातावरण प्रदान करते हैं, बल्कि हमें नया जीवन भी देते हैं। इसी तरह नदियों, पहाड़ों सभी का हमारे जीवन में महत्व है।

कुलपति ने कहा कि हम अपने जन्मदिवस या किसी शुभ कार्य के अवसर पर या किसी की स्मृति में एक पौधा लगाएँ। आज के पूरे विश्व में जो पर्यावरण की समस्याएं उत्पन्न हुई है, उसको दूर करने का यह एक उत्तम उपाय है। हम केवल पौधारोपण नहीं करें  बल्कि पौधों की देखभाल भी करें और पेड़-पौधों का सम्मान करें। चराचर जगत से प्रेम यही हमारी पहचान है। हम लोग वृक्षों की पूजा करते हैं। यह हमारी संस्कृतिक विरासत है।

कुलपति ने आह्वान किया सभी महाविद्यालय टी. पी. काॅलेज से प्रेरणा लें। साफ सफाई पर पूरा ध्यान रखा जाएगा। साथ ही साथ इसे ग्रीन जोन बनाए रखने में पूरा सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने शिक्षकों की तारीफ करते हुए उन्हें हर प्रकार की जिम्मेवारी उठाने का भी आह्वान किया।

कुलपति ने प्रधानाचार्य  को जन्मदिन की बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। अन्य शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भी प्रधानाचार्य को जन्मदिन  मुबारकबाद दी और कुलपति के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

प्रधानाचार्य डाॅ. के. पी. यादव ने बताया कि चार जून को उनका 63 वाँ  जन्मदिन है। इसके उपलक्ष्य में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में  महाविद्यालय के गर्ल्स हाॅस्टल परिसर में 63 पौधे लगाए गए। हमने अपने जन्मदिवस को पर्यावरण को समर्पित किया। इस पुनीत अवसर पर प्रकृति के सानिध्य में जाना काफी सकुन दे रहा है। प्रकृति के साथ बिताया गया एक क्षण मानवों के साथ बिताए हजारों क्षणों से बेहतर है। मेरी स्मृति में आज भी वह बचपन हुबहू सुरक्षित है, जो प्रकृति के सानिध्य में बीता है।

उन्होंने बताया कि यह महाविद्यालय पहले से ही हरा-भरा है। इसके बावजूद दो वर्षों में यहाँ लगभग दो हजार पौधे लगाए गए। जहां भी खाली जगह मुझे मिली, उस जगह पर एक फलदार एवं छायादार पौधा लगाया गया।

उन्होंने बताया कि डाॅ. द्विवेदी लगभग 2 वर्षों के बाद महाविद्यालय आए हैं और कुलपति के रूप में उनका पहला आगमन है। नए कुलपति के आगमन से महाविद्यालय का वातावरण खिल उठा है। महाविद्यालय परिवार की ओर से उनका  बहुत-बहुत स्वागत है।

कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय निरीक्षक (विज्ञान) डाॅ. उदयकृष्ण ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सिंडिकेट सदस्य डाॅ. जवाहर पासवान ने किया। कार्यक्रम का आयोजन सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करते हुए किया गया।

इस अवसर पर कुलानुशासक डॉ. बी. एन. विवेका, कुलसचिव डाॅ. कपिलदेव प्रसाद, एनएसएस समन्वयक डॉ. अभय कुमार, पीआरओ डाॅ. सुधांशु शेखर, डाॅ. राजीव रंजन, डाॅ. गजेन्द्र कुमार, डॉ. ए. के. मल्लिक, अमित कुमार, स्नेहा, सीनेटर रंजन यादव, सौरभ कुमार चौहान, मणिष कुमार, गौरव कुमार सिंह आदि उपस्थित थे।

व्याख्यान तीन जून को

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व्याख्यान तीन जून को
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बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के फेसबुक पेज Facebook.com/bnmusamvad पर 3 जून (बुधवार) को पूर्वाह्न 11.30 बजे एक लाइव व्याख्यान का आयोजन किया गया है।
 
इसका विषय है- “आपदा का मनोवैज्ञानिक प्रबंधन”। यह विषय हम सबों के जीवन से भी सीधे-सीधे जुड़ा है। इसके अंतर्गत बाढ़, सुखाड़, भूकंप, सुनामी एवं कोरोना  आदि के समय हमें क्या करना चाहिए ? 
इसके वक्ता हैं- सुप्रसिद्ध  मनोवैज्ञानिक डाॅ. एम. आई. रहमान। डाॅ. रहमान लगातार विभिन्न आपदाओं से बचाव में मनोविज्ञान की भूमिका पर लोगों से संवाद करते रहे हैं। हाल के दिनों में कोरोना संक्रमण और लाॅकडाउन के दौरान विभिन्न मनोवैज्ञानिक समस्याओं को लेकर उनके विचार काफी चर्चित रहे हैं। प्राकृतिक आपदा पर आपका कई शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हुआ है। आपके मार्गदर्शन में एक शोधार्थी ने प्राकृतिक आपदा का मनोवैज्ञानिक प्रभाव विषय पर शोध किया है। 
संप्रति आप बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर हैं। आपने उप कुलसचिव (अकादमिक) एवं  अकादमिक निदेशक की जिम्मेदारी बखूबी निभाई है। आपने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ से एम. ए., एम.फिल. और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। आपने एकेडेमिक एसोसिएट के रूप में हमदर्द विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में सेवा की।
आप 1996 में बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर नियुक्त हुए और संप्रति प्रोफेसर के रूप पर प्रोन्नत हो चुके हैं। आप जीएलएम कॉलेज, बनमनखी में एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी और सचिव, क्रीड़ा परिषद रहे। 2000 में पीजी मनोविज्ञान विभाग में आए। आप रजिस्ट्रार लीगल सेल और डिप्टी रजिस्ट्रार अकादमिक भी रहे।
कुलसचिव डाॅ. कपिलदेव प्रसाद ने बताया कि व्याख्यान ठीक पूर्वाह्न 11.30 बजे शुरू होगा और लगभग एक घंटे तक चलेगा। सभी श्रोता वक्ता के समक्ष अपने प्रश्न भी रख सकते हैं। उन्होंने सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से अपील की है कि वे इस व्याख्यान का लाभ लें।
आयोजन सचिव सह जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने बताया कि सामाजिक शिक्षण के अंतर्गत बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के फेसबुक पेज Facebook.com/bnmusamvad पर हमने “बीएनएमयू संवाद व्याख्यान माला” की शुरुआत की है। 
इसके अंतर्गत गत दिनों माननीय कुलपति प्रोफेसर डाॅ. अवध किशोर राय एवं माननीय प्रति कुलपति डाॅ. फारूक अली ने भी आप सबों से संवाद किया। इसे काफी सराहना मिली है। इसी कड़ी में 3 जून को छठा व्याख्यान आयोजित है। सभी व्याख्यानों को यू-ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/bnmusamvad पर भी प्रसारित किया जा रहा है, ताकि अधिकाधिक लोग लाभान्वित हो सकें।

BNMU। पौधारोपण चार जून को

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नॉर्थ नॉर्थ कैंपस स्थित महावीर प्रसाद यादव पार्क में 4 जून, 2020 को पौधारोपण किया जाएगा। यह जानकारी बीएनमुस्टा के महासचिव डॉ. नरेश कुमार ने दी।

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