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NOU एनओयू को जनजन से जोड़ने का प्रयास

एनओयू को जनजन से जोड़ने का प्रयास

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान विभाग के उपाचार्य सह जी. एम. आर. डी. कॉलेज, मोहनपुर, समस्तीपुर के पूर्व प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. घनश्याम राय ने बिहार के महामहिम राज्यपाल सह कुलाधिपति के आदेशानुसार19 अगस्त, 2021 को नालंदा खुला विश्वविद्यालय, पटना के कुलसचिव के रूप में योगदान दिया। इसके साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय को जनजन से जोड़ने की रणनीति बनाई और धीरे-धीरे उसे मूर्त रूप दिया। इसी की बानगी है कि आज एनओयू की गतिविधियां शैक्षणिक जगत में चर्चा के केंद्र में हैं।

डॉ. राय ने 23 अगस्त 2021 को ‘NOU संवाद ग्रुप’ की स्वयं स्थापना की। पदाधिकारियों, समन्वयकों, प्रोफेसरों, कर्मचारियों, स्थानीय संवाददाताओं, नए अध्ययन केंद्रों के समन्वयकगण, बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकार, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता आदि को जोड़ा गया। एनओयू संवाद की स्थापना का उद्देश्य दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों को आम लोगों के लिए सुलभ बनाना था। इस उद्देश्य में अपार सफलता प्राप्त हुई। डॉ राय के योगदान के बाद 41 नए अध्ययन केंद्र स्थापित किए गए । अबतक कुल 265 अध्ययन केंद्र स्थापित किए जा चुकें हैं।

कुलपति के आदेश पर कुलसचिव ने स्वयं निरीक्षण कर बत्तीस अध्ययन केंद्रों का उद्घाटन किया। निरीक्षण एवं उद्घाटन के साथ साथ सभी अध्ययन केन्द्रों पर ” परिचर्चा का आयोजन किया गया। नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय की भूमिका और प्रासंगिकता को ऐसे विचारकों के विचारों से जोड़ा गया जिन्होंने शिक्षा, समानता, मानवता, स्वतंत्रता की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाई थी। नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय की स्थापना का उद्देश्य भी यही रहा है कि समाज के जो वर्ग नियमित रूप से अध्ययन करने में असमर्थ हैं, वे दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से अध्ययन करें। सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों,गृहिणियों, कामकाजी महिलाओं, दिव्यांगों आदि को शिक्षित और कुशल बनाया जाना चाहिए।

छात्रों को समस्याओं से मिली मुक्ति

मधेपुरा, किशनगंज, अररिया, मधुबनी, नरकटियागंज, कैमूर, रोहतास, बक्सर, जमुई, भागलपुर आदि अध्ययन केंद्रों के माध्यम से नामांकन करने वाले छात्र अपनी सभी समस्याओं जैसे काउंसलिंग क्लास, फॉर्म भरने, परीक्षा, प्रमाण पत्र आदि को हल करने के लिए पटना मुख्यालय आते हैं। कुलपति के आदेश के अनुसार बिहार के सभी जिलों में स्थित अध्ययन केंद्रों के माध्यम से बताया गया कि आगामी सत्र से जिला एवं प्रमंडल स्तर पर एनओयू का परीक्षा केंद्र स्थापित किया जाएगा। बिहार इंटरमीडिएट परिषद की तरह क्षेत्रीय स्तर पर एनओयू का कार्यालय स्थापित कर समस्याओं का समाधान किया जाएगा। परामर्श कक्षाएं, केंद्रीकृत मूल्यांकन शुरू करने की पहल की गई ताकि सुदूर पूर्व के छात्रों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके। काउंसलिंग कक्षाओं में शत-प्रतिशत विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। जबकि ‘परिणाम’ समय पर प्रकाशित किया जा रहा है, अनियमित सत्रों को जल्द से जल्द नियमित करने का काम तेज गति से चल रहा है।

*विश्वविद्यालय में अनुसंधान गतिविधियों के संचालन के लिए एक सलाहकार और संचालन समिति का गठन किया गया* है।

महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि मनाने की परंपरा शुरू हुई। महात्मा गांधी,महात्मा ज्योतिबा फुले,बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर, लोक नायक जयप्रकाश नारायण, जननायक कर्पूरी ठाकुर आदि की जयंती मनाई गई। ई-पत्रों और पत्रिकाओं के प्रकाशन के लिए एक समिति का गठन किया गया है।

*पहली बार संबद्ध कॉलेजों में अध्ययन केंद्र स्थापित किए गए।*

इंटर संबद्ध महाविद्यालयों में भी अध्ययन केंद्र स्थापित करने हेतु सरकार से पत्राचार और वार्ता की गई है। संबद्ध महाविद्यालयों में नामांकन में अप्रत्याशित वृद्धि हुई। पिछले पांच सत्रों में, वर्तमान सत्र में सबसे अधिक नामांकन दर्ज किए गए। सभी विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री व अध्ययन केन्द्रों के मानदेय का भुगतान ससमय करना वर्तमान प्रशासन के समक्ष भारी चुनौती है। छात्रों की सुविधा के लिए लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) की स्थापना की गई है ताकि सभी छात्र/छात्राएं ऑनलाइन सामग्री का उपयोग कर सकें। ऑनलाइन परीक्षा, ऑनलाइन प्रमाण पत्र आदि पर चर्चा चल रही है। दूरस्थ शिक्षा का उद्देश्य यह है कि छात्र घर बैठे सभी सुविधाएं प्राप्त करके शिक्षित और कुशल बनें, तभी राज्य और केंद्र का अनुमानित सकल नामांकन अनुपात को हासिल किया जा सकता है। एक व्यक्ति ने कितने दिनों तक पद पर काम किया यह महत्वपूर्ण नहीं होता है। उन्होंने क्या किया,वह महत्वपूर्ण है। कुलसचिव ने बिहार के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर व्याख्यान देकर नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय की पहचान स्थापित की। संपूर्ण बिहार में एन ओ यू के प्रति आमलोगों में चेतना का जागरण हुआ। मीडिया ने व्यापक कवरेज दिया। एनओयू में संचालित एक सौ सात कोर्सों के संदर्भ में जानकारी प्राप्त हुई। नये स्थापित अध्ययन केन्द्रों में नामांकन तेज गति से बढ़ी। पहले से स्थापित अध्ययन केन्द्रों पर भी नामांकन की रफ्तार बढ़ीं। कुलसचिव ने स्वयं विश्वविद्यालय से एक भी यात्रा भत्ता नहीं लिया है। नियमानुसार मुख्यालय से आठ किलोमीटर बाहर जाने पर मानदेय निर्धारित है। जबकि विश्वविद्यालय मुख्यालय में कार्यरत कर्मी कार्यालय अवधि में अतिरिक्त कार्य के लिए अतिरिक्त पारिश्रमिक लेते हैं। पहले से संचालित वैसे कोर्स,जो किन्हीं कारणों से बंद थे, उसे पुनः शुरू करने की कार्रवाई तीव्र गति से की गई है। बीएड कोर्स के लिए एनसीटीई से पत्राचार और ऑनलाइन बैठक आयोजित की जा चुकी है। एक सौ से अधिक ‘कौशल विकास’ कोर्स, डिप्लोमा कोर्स, मैथिली, मगही, भोजपुरी, प्राकृत, अंग्रेजी विषयों में स्नातकोत्तर की पढ़ाई शुरू करने की सैद्धांतिक सहमति कुलपति के द्वारा प्राप्त हो चुकी है। वर्तमान सत्र से ‘सीबीसीएस’ लागू करने पर विचार चल रहा है। कोविड-19 के कारण विभिन्न क्षेत्रों में तीन सालों से मानदेय का भुगतान बकाया था, जिससे भुगतान किया गया। सीएड-बीएड 2019 में नामांकित प्रति छात्र का तीन हजार रूपये तमाम बीएड कॉलेजों का बकाया था। भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। अखबारों का बकाया भुगतान कर दिया गया है। कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के साथ पचास प्रतिशत बकाये का भुगतान किया गया। वर्तमान कुलसचिव डॉ. राय के कम समय के कार्यकाल में नालंदा खुला विश्वविद्यालय बिहार के जन-जन में स्थान ग्रहण किया है। यह उनके व्यक्तिगत समझदारी और मेहनत का नतीजा है।

ICPR स्टडी सर्किल का उद्घाटन। सांस्कृतिक स्वराज पर हुई चर्चा। सांस्कृतिक स्वराज अभी बाकि है : रमेशचन्द्र सिन्हा

*स्टडी सर्किल का उद्घाटन*

*सांस्कृतिक स्वराज पर हुई चर्चा*

*सांस्कृतिक स्वराज अभी बाकि है : रमेशचन्द्र सिन्हा*

पंद्रह अगस्त 1947 को हमारा देश अंग्रेजों की राजनीतिक गुलामी से मुक्त हुआ। हम एक स्वतंत्र राष्ट्र बने और हमने राजनीतिक स्वराज प्राप्त कर लिया। आज हम अपनी उस राजनीतिक आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। लेकिन आज भी हम सांस्कृतिक रूप से स्वतंत्र नहीं हुए हैं। हमारा सांस्कृतिक स्वराज अभी भी हमसे कोसों दूर है।

यह बात सुप्रसिद्ध दार्शनिक एवं पटना विश्वविद्यालय, पटना में दर्शनशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. रमेशचंद्र सिन्हा ने कही।

वे शनिवार को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत संचालित भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली की स्टडी सर्कल (अध्ययन मंडल) योजना के तहत ‘सांस्कृतिक स्वराज’ विषयक चर्चा में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय दर्शनशास्त्र विभाग, भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा की ओर से ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा में आयोजित किया गया।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और हमारे अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वराज को समग्रता में देखा और इसके सभी आयामों को महत्वपूर्ण माना है। इनमें राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयाम मुख्य हैं। इन चारों आयामों को मिलाकर स्वराज की अवधारणा पूर्ण होती है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद को हम अमूर्तता के बीच नहीं जी सकते।
आर्थिक दृष्टि या अन्य से राष्ट्रवाद से कठिनाई हो सकती है लेकिन राष्ट्रीयता में कोई कठिनाई नहीं हो सकती।
यह संकीर्ण राजनीतिक राष्ट्रवाद संकुचित राष्ट्रवाद से जिसकी समीक्षा आपने हमेशा की है। उससे ऊपर हो।
जो भी आपकी कल्पना है, उसको ध्यान में रखकर।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एक उदात्त राष्ट्रवाद।

राजनीतिक राष्ट्रवाद निश्चित ही संघर्षों का कारण बनता है। लेकिन सांस्कृतिक राष्ट्रवाद राजनीति राष्ट्रवाद से भिन्न है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद उदात्त एवं व्यापक है। इस उदात्त राष्ट्रवाद को अपनाकर ही हम वसुधैव कुटुंबकम् एवं मानवतावाद की ओर आगे बढ़ सकते हैं। उदात्त राष्ट्रवाद हमारी आत्मा है। इसके बगैर मनुष्य का जीवन निर्थक है।

 

*भारतीय संस्कृति का आदर्श है वसुधैव कुटुंबकम् : डाॅ. रामजी सिंह*
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए सुप्रसिद्ध गांधीवादी विचारक, पूर्व सांसद एवं पूर्व कुलपति प्रोफेसर डॉ. रामजी सिंह ने कहा कि संकीर्ण राष्ट्रवाद के कारण दुनिया में कई युद्ध हुए हैं और आज भी हो रहे हैं। ऐसे संकीर्ण राष्ट्रवाद से मानव का कल्याण नहीं हो सकता। इसलिए मनुष्य को राष्ट्रीयता की संकीर्ण सीमाओं में नहीं बंधना चाहिए। मनुष्य को वैश्विक आदान-प्रदान करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रवाद संकीर्ण नहीं, बल्कि व्यापक है। इसकी कोई भौगोलिक सीमा नहीं है, बल्कि यह वसुधैव कुटुंबकम् के आदर्श पर आधारित है। इसी वैश्विक दृष्टि से भारत का कल्याण होगा और विश्व मानवता बचेगी।

उन्होंने कहा कि भारत ने
सांस्कृतिक स्वराज के विराट स्वरूप को दुनिया के सामने रखा है। हमारे देश में ऐसी राष्ट्रीयता की कल्पना की जो वैश्विकता पर आधारित है‌। हमारा स्वराज्य वह है, जिसमें कोई सीमा नहीं है।

उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा दुनिया को अहिंसा एवं प्रेम से जीता है। हमने कभी भी किसी दूसरे राष्ट्र को विजय करने का नहीं सोचा। हम मानते हैं कि पृथ्वी हमारी माँ है और हम सब उसकी संतान हैं। राष्ट्र को हम माँ मानते हैं और जैसे हमारे लिए हमारी माँ पूज्य है, वैसे ही अन्य लोगों की माँ भी सम्माननीय है।

मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति प्रो. (डॉ.) ज्ञानंजय द्विवेदी ने कहा कि भारत अपनी सभ्यता-संस्कृति के कारण ही विश्वगुरु रहा है। हमें अपनी संस्कृति पहचान को‌ कभी भी नहीं छोड़ना चाहिए।

डॉ. आलोक टंडन (उत्तर प्रदेश) ने कहा कि संस्कृति एक ऐतिहासिक निर्मिति है। यह समय एवं परिस्थितियों के साथ आंतरिक एवं बाह्य प्रभावों से बराबर निर्मित एवं परिवर्तित होती रहती है। यह एक नदी समान है, जिसमें बराबर आकर धाराएँ मिलती, निकलती हैं। इस दृष्टि से भारतीय संस्कृति का रूप कई परतों से बना दिखेगा। भारतीय संस्कृति को किसी एक पुस्तक, एक काल, एक दर्शन या किसी एक व्यक्ति में समाहित नहीं किया जा सकता।

विशिष्ट अतिथि ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. वीणा कुमारी ने कहा कि स्वराज्य की अवधारणा अत्यंत व्यापक है। यह स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है।

सम्मानित अतिथि के. पी. कालेज, मुरलीगंज के प्रधानाचार्य डॉ. जवाहर पासवान ने कहा कि किसी भी देश को तभी स्वतंत्र माना जा सकता है, जब उस देश के सभी नागरिकों को स्वतंत्रता का एहसास हो।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष शोभाकांत कुमार और अतिथियों का स्वागत दर्शन परिषद्, बिहार की अध्यक्षा डॉ. पूनम सिंह ने की। संचालन आयोजन सचिव सह उप कुलसचिव अकादमिक डॉ. सुधांशु शेखर ने किया। धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. के. पी. यादव ने की।

इसके पूर्व अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। अतिथियों का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षिका शशिप्रभा जसवाल ने देशभक्ति गीत उठो हिन्द के वीर सपूतों माँ ने तुझे पुकारा / कश्मीर क्यों माँग रहे हो हिन्दूस्तान तुम्हारा है /
आवाज़ दो हम एक हैं प्रस्तुत किया। राष्ट्रगान जन-गण-मन के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।

कार्यक्रम के आयोजन में मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. शंकर कुमार मिश्र, एनसीसी पदाधिकारी ले. गुड्डू कुमार, सीएम साइंस कॉलेज के डॉ. संजय कुमार परमार, बायोटेक्नोलॉजी के लव कुमार प्रियदर्शी, शोधार्थी सारंग तनय, गौरव कुमार सिंह, सौरभ कुमार चौहान, नयन रंजन आदि ने सहयोग किया।

इस अवसर पर डॉ. श्याम रंजन सिंह, डॉ. उपेंद्र प्रसाद यादव, अशोक कुमार, रशिम दत्ता, सपना जसवाल, प्रतिभा प्रिया, हिमांशु शेखर, डेविड यादव, सुशील कुमार
रोहिणी झा, शिखर बासिनी
डॉ. नीतू सिंह, डॉ. अजीत कुमार ठाकुर, ए. जाॅन, अजय कुमार, किरण कुमारी, डॉ. बरदराज, राजदीप कुमार, बहादुर कुमार महतो,
डॉ. अमरेन्द्र कुमार, हरि नारायण, डॉ. शंभु पासवान, सर्वजीत पॉल, अभिमन्यु कुमार, आकृति रंजन, निशा कुमारी, पूजा कुमारी, मनीष कुमार, सोनू कुमार, अमन कुमार, रोशन प्रवीण, शिवराज कपूर, नीतू कुमारी, श्रुति सुमन, नेहा परवीन, रुखसाना परवीन, वंदना कुमारी, माधवी राज, शिवांगी, कशिश नाज, वेद प्रकाश कुमार आदि उपस्थित थे।

डॉ. शेखर ने बताया कि स्टडी सर्किल आईसीपीआर की एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण योजना है। इसके तहत एक वर्ष तक प्रत्येक माह एक पूर्व निर्धारित विषय पर व्याख्यान और विचार-विमर्श होगा। शनिवार को आईसीपीआर के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रमेशचन्द्र सिन्हा के सांस्कृतिक स्वराज विषयक व्याख्यान से इसकी शुरुआत हो रही है।

उन्होंने बताया कि स्टडी सर्किल के अंतर्गत होने वाले अन्य व्याख्यानों के विषय भी निर्धारित कर लिए गए हैं। द्वितीय व्याख्यान वेदांत दर्शन : एक विमर्श (डाॅ. राजकुमारी सिन्हा, रांची) और तृतीय व्याख्यान वेदांती समाजवाद : समसामयिक संदर्भ (डाॅ. जटाशंकर, प्रयागराज) विषय पर निर्धारित है।

डॉ. शेखर ने बताया कि आगे बौद्ध दर्शन की प्रासंगिकता (डॉ. वैद्यनाथ लाभ), वैश्वीकरण की नैतिकता (डॉ. आभा सिंह), नव वेदांत की प्रासंगिकता (स्वामी भवात्मानंद महाराज), समाज-परिवर्तन का दर्शन (डॉ. पूनम सिंह) एवं राष्ट्र-निर्माण में आधुनिक भारतीय चिंतकों का योगदान (डॉ. नरेश कुमार अम्बष्ट) विषय पर चर्चा होगी। इसके अलावा टैगौर का मानववाद (डॉ. सिराजुल इस्लाम),
भारतीय दर्शन में जीवन प्रबंधन (डाॅ. इन्दु पाण्डेय खंडूड़ी), गांधी-दर्शन की प्रासंगिकता (डॉ. विजय कुमार) एवं सर्वोदय-दर्शन की प्रासंगिकता (डॉ. विजय कुमार) विषयक व्याख्यान भी आयोजित किए जाएंगे।

*क्या है स्टडी सर्किल ?*
डॉ. शेखर ने बताया कि स्टडी सर्कल (अध्ययन मंडल) लोगों का एक छोटा समूह होता है, जो नियमित रूप से विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हैं। कुछ वर्ष पूर्व आईसीपीआर ने स्टडी सर्किल योजना की शुरुआत की है और देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में इसे लागू किया गया है। बिहार में सर्वप्रथम पटना विश्वविद्यालय, पटना में स्टडी सर्किल की शुरुआत हुई थी और कुछ दिनों पूर्व भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में भी इसकी स्वीकृति दी गई है।

ICPR स्टडी सर्किल का आयोजन

*स्टडी सर्किल का आयोजन*

*सांस्कृतिक स्वराज पर व्याख्यान आज (शनिवार को)*
ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा के स्मार्ट क्लासरूम में शनिवार को एक बजे से ‘सांस्कृतिक स्वराज’ विषयक व्याख्यान आयोजित है। इसके मुख्य वक्ता परिषद् के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रमेशचंद्र सिन्हा होंगे।

आयोजन सचिव सह उप कुलसचिव (अकादमिक) डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि यह कार्यक्रम भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत संचालित भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली की एक महत्वपूर्ण योजना स्टडी सर्कल (अध्ययन मंडल) के तहत आयोजित है।

कार्यक्रम का उद्घाटन भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के कुलपति प्रो. (डॉ.) आर. के. पी. रमण करेंगे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति प्रो. (डॉ.) ज्ञानंजय द्विवेदी, विशिष्ट अतिथि ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. वीणा कुमारी और सम्मानित अतिथि के. पी. कालेज, मुरलीगंज के प्रधानाचार्य डॉ. जवाहर पासवान होंगे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष शोभाकांत कुमार और अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. के. पी. यादव करेंगे। संचालन मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. शंकर कुमार मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन एनसीसी पदाधिकारी ले. गुड्डू कुमार करेंगे।

डॉ. शेखर ने बताया कि स्टडी सर्किल आईसीपीआर की एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण योजना है। इसके तहत एक वर्ष तक प्रत्येक माह एक पूर्व निर्धारित विषय पर व्याख्यान और विचार-विमर्श होगा। शनिवार को आईसीपीआर के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रमेशचन्द्र सिन्हा के सांस्कृतिक स्वराज विषयक व्याख्यान से इसकी शुरुआत हो रही है।

उन्होंने बताया कि स्टडी सर्किल के अंतर्गत होने वाले अन्य व्याख्यानों के विषय भी निर्धारित कर लिए गए हैं। द्वितीय व्याख्यान वेदांत दर्शन : एक विमर्श (डाॅ. राजकुमारी सिन्हा, रांची) और तृतीय व्याख्यान वेदांती समाजवाद : समसामयिक संदर्भ (डाॅ. जटाशंकर, प्रयागराज) विषय पर निर्धारित है।

डॉ. शेखर ने बताया कि आगे बौद्ध दर्शन की प्रासंगिकता (डॉ. वैद्यनाथ लाभ), वैश्वीकरण की नैतिकता (डॉ. आभा सिंह), नव वेदांत की प्रासंगिकता (स्वामी भवात्मानंद महाराज), समाज-परिवर्तन का दर्शन (डॉ. पूनम सिंह) एवं राष्ट्र-निर्माण में आधुनिक भारतीय चिंतकों का योगदान (डॉ. नरेश कुमार अम्बष्ट) विषय पर चर्चा होगी। इसके अलावा टैगौर का मानववाद (डॉ. सिराजुल इस्लाम),
भारतीय दर्शन में जीवन प्रबंधन (डाॅ. इन्दु पाण्डेय खंडूड़ी), गांधी-दर्शन की प्रासंगिकता (डॉ. विजय कुमार) एवं सर्वोदय-दर्शन की प्रासंगिकता (डॉ. विजय कुमार) विषयक व्याख्यान भी आयोजित किए जाएंगे।

*क्या है स्टडी सर्किल ?*
डॉ. शेखर ने बताया कि स्टडी सर्कल (अध्ययन मंडल) लोगों का एक छोटा समूह होता है, जो नियमित रूप से विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हैं। कुछ वर्ष पूर्व आईसीपीआर ने स्टडी सर्किल योजना की शुरुआत की है और देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में इसे लागू किया गया है। बिहार में सर्वप्रथम पटना विश्वविद्यालय, पटना में स्टडी सर्किल की शुरुआत हुई थी और कुछ दिनों पूर्व भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में भी इसकी स्वीकृति दी गई है।

BNMU याद किए गए प्रभु नारायण मंडल। अच्छे इंसान हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहते हैं : राजकुमार सिंह

*याद किए गए प्रभु नारायण मंडल*

अच्छे इंसान हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहते हैं : राजकुमार सिंह*

संसार में आना-जाना लगा रहता है। जिन्होंने भी इस संसार में जन्म लिया है, उनको एक न एक दिन शरीर त्यागना ही पड़ता है। लेकिन अच्छे इंसान इस शरीर को छोड़ने के बाद भी हमारे दिलों में जिंदा रहते हैं।

 

यह बात बीएनएमयू, मधेपुरा के सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. राजकुमार सिंह ने कही। वे गुरुवार को ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बोल रहे थे।

*बिहार के लिए अपूर्णीय क्षति*

डॉ. सिंह ने कहा कि प्रोफेसर प्रभु नारायण मंडल एक जानेमाने शिक्षाविद् एवं दार्शनिक थे। उनके निधन से पूरे बिहार और विशेषकर मधेपुरा को अपूर्णीय क्षति हुई है।

डॉ. सिंह ने कहा कि प्रोफेसर मंडल का बीएनएमयू से गहरा लगाव था और वे यहां अक्सर आया करते थे। उन्हें कई कार्यक्रमों में उनका सारगर्भित व्याख्यान सुनने का सुअवसर मिला था।

*एक आदर्श शिक्षक थे प्रोफेसर मंडल*

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य डॉ. के. पी. यादव ने कहा कि प्रोफेसर मंडल एक आदर्श शिक्षक थे। वे हमेशा अध्ययन-अध्यापन में लगे रहते थे और उन्हें शैक्षणिक गतिविधियों में आनंद आता था। हम उन्हें जब भी याद करते थे, वे सहर्ष हमारे कार्यक्रमों में शामिल होते थे। अपनी देहत्याग के कुछ दिनों पूर्व मार्च में वे दर्शन परिषद्, बिहार के राष्ट्रीय अधिवेशन में और विश्व दर्शन दिवस में भी मधेपुरा आए थे।

*उच्च मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित थे प्रोफेसर मंडल*

पीजी सेंटर, सहरसा के प्रोफेसर डॉ. सी. पी. सिंह ने कहा कि यह एक सुखद आश्चर्य की बात है कि आज के भौतिकवादी युग में भी प्रोफेसर मंडल ने सादगीपूर्ण जीवन जीया और वे हमेशा उच्च मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित रहे।

*प्रेरणादायी है प्रोफेसर मंडल का जीवन*

के. पी. कॉलेज, मुरलीगंज के प्रधानाचार्य डॉ. जवाहर पासवान ने बताया कि प्रोफेसर मंडल का जीवन-संघर्ष एवं शैक्षणिक साधना हमारे लिए प्रेरणादायी है। वे कपसिया (मधेपुरा) के सुदूर पिछड़े इलाके से निकलकर शिक्षा के उच्चतम शिखर तक पहुंचे।

जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने बताया कि प्रोफेसर मंडल उनके गुरु एवं अभिभावक थे। उन्होंने प्रभु बाबू के मार्गदर्शन में ही पीएच. डी. की डिग्री प्राप्त की है और अन्य अकादमिक कार्य भी किए हैं।

उन्होंने बताया कि प्रोफेसर मंडल दर्शन-जगत के उन गिने-चुने लोगों में थे, जिनका भारतीय दर्शन के साथ-साथ पाश्चात्य दर्शन पर भी समान अधिकार था। उन्होंने तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर में विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष सहित कई जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया।

*प्रकाशित कराया जाएगा शोध-प्रबंध*
उन्होंने कहा कि आगे प्रोफेसर मंडल के अप्रकाशित शोध-प्रबंध को प्रकाशित कराया जाएगा और उनकी रचनाओं को भी पुस्तक के रूप में संकलित किया जाएगा। साथ ही उनकी स्मृति में व्याख्यान मालाओं का आयोजन किया जाएगा।

इस अवसर पर एनसीसी पदाधिकारी ले. गुड्डू कुमार, शोधार्थी सौरभ कुमार चौहान, रिम्मी कुमारी, मंजू कुमारी, नेहा कुमारी, हिमांशु कुमार, गुड्डू कुमार यादव, प्रकाश कुमार, राजकुमार, रितेश कुमार, नरेश कुमार, छोटू कुमार, मनोज कुमार, दिव्यांशु आनंद आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में सबों ने दो मिनट का मौन रखकर प्रभु नारायण मंडल की आत्मा को शांति की प्रार्थना की।

BNMU अंतर महाविद्यालय वॉलीबॉल प्रतियोगिता का दूसरा दिन

आज दिनांक 26 अप्रैल 2022 को दिन के 3:00 बजे से केपी महाविद्यालय में अंतर महाविद्यालय वॉलीबॉल प्रतियोगिता के दूसरे दिन सर्वप्रथम आरएम कॉलेज सहरसा और बीएनएमवी कॉलेज मधेपुरा के बीच खेला गया l जिसमें आरएम कॉलेज सहरसा लगातार दो मैच राउंड जीतकर विजेता बनी l आज पहला सेमीफाइनल मैच आरएम कॉलेज सहरसा और पूर्व विजेता टीम एमएलटी कॉलेज सहरसा के बीच खेला गया l इस मैच के दौरान एमएलडी कॉलेज को हराकर आरएम कॉलेज सहरसा ने फाइनल में प्रवेश पा लिया l

 

केपी महाविद्यालय प्रधानाचार्य डॉक्टर जवाहर पासवान ने बताया कि 27 अप्रैल को दूसरा सेमीफाइनल मैच केपी महाविद्यालय मुरलीगंज बनाम ईस्ट एंड वेस्ट कॉलेज सहरसा के बीच 3:00 बजे से खेला जाएगा l

 

इस अवसर पर डॉ. अमरेंद्र कुमार, महेंद्र मंडल,
डॉ. चंद्रशेखर आजाद, डॉ. त्रिदेव निराला, डॉ. शिवा शर्मा, डॉ. महेंद्र मंडल ,डॉ सुशांत सिंह, डॉ. अली अहमद मंसूरी, डॉ. सिकंदर कुमार, डॉ. अमित रंजन, डॉ. रविंद्र कुमार, प्रधान सहायक नीरज निराला, लेखापाल देवाशीष, सिंटू आदि उपस्थित थे l

BNMU खेल का हमारे जीवन में काफी महत्व है : कुलपति

खेल का हमारे जीवन में काफी महत्व है। इससे हमारा शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है।

यह बात कुलपति डाॅ. आर. के. पी. रमण ने कही। वे सोमवार को के. पी. काॅलेज, मुरलीगंज में आयोजित वॉलीबॉल (पुरुष एवं महिला) प्रतियोगिता का उद्घाटन कर रहे थे।

कुलपति ने कहा कि कोरोना संक्रमण ने जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित किया और इसका खेल पर भी प्रतिकूल असर पड़ा था। लेकिन अब खेल सहित सभी गतिविधियां शुरू हो गई हैं।

उन्होंने कहा कि हमारी टीम विभिन्न विधाओं में बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं।

कुलपति ने कहा कि बीएनएमयू प्रशासन ने कक्षा की पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियों को भी गंभीरता से लिया है। इसके कारण हमने राज्यस्तरीय एकलव्य एवं तरंग प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन किया है।

उन्होंने कहा कि हमारे विद्यार्थी विभिन्न खेल स्पर्धाओं में बढ़चढ़ कर भाग लें और बेहतर प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय एवं राज्य का नाम रौशन करें। आज खेलों में कैरियर की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। अब खेलोगे-कूदोगे बनोगे खराब वाली बात नहीं है।

कुलपति ने कहा कि अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिता में सभी महाविद्यालयों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीम को प्रोत्साहित भी किया जाएगा। साथ ही जो विद्यार्थी किसी भी विधा में बेहतर प्रदर्शन करेंगे, उन्हें विश्वविद्यालय की ओर से प्रोत्साहन एवं सम्मान दिया जाएगा।

कुलपति ने कहा कि खेल से जीवन में अनुशासन एवं एकाग्रता आती है। इससे हमारे जीवन में समन्वय एवं सामंजस्य का प्रसार होता है। हम पूर्ण नागरिक बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि हम खेल को खेल भावना से खेलें। जीत-हार दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। खेल में भाग लेना जीत-हार से अधिक महत्वपूर्ण है।

मुख्य अतिथि कुलसचिव प्रो. (डॉ.) मिहिर कुमार ठाकुर ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन सभी महाविद्यालयों के विकास को तत्पर है। महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों की ओर से जो भी सकारात्मक प्रस्ताव आएगा, उसका अनुमोदन किया जाएगा।

सम्मानित अतिथि अभिषद् सदस्य कै. गौतम कुमार ने कहा कि कुलपति के नेतृत्व में विश्वविद्यालय आगे बढ़ रहा है।

उप कुलसचिव (अकादमिक) डॉ. सुधांशु शेखर ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों के समग्र उन्नयन हेतु प्रतिबद्ध है। सभी पक्षों से सहयोग की अपेक्षा है।

क्रीड़ा एवं सांस्कृतिक परिषद् के उपसचिव डॉ. शंकर कुमार मिश्र ने कहा कि विश्वविद्यालय का खेल कैलेंडर जारी कर दिया गया है। आज पहली प्रतियोगिता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य डॉ. जवाहर पासवान ने की। उन्होंने कहा कि वे विश्वविद्यालय प्रशासन की अपेक्षाओं को पूरा करने की हर संभव कोशिश करेंगे।

अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय के खेल पदाधिकारी डॉ. मो. अली अहमद मंसूरी और धन्यवाद ज्ञापन मैथिली विभाग के महेंद्र मंडल ने किया।

इस अवसर पर डॉ. अमरेंद्र कुमार, डॉ. विजय पटेल, डॉ. सज्जाद अख्तर, डॉ. रवींद्र कुमार, डॉ. चंद्रशेखर आजाद, डॉ. त्रिदेव निराला, डॉ. प्रीति कुमारी, डॉ. दीपा कुमारी, डॉ. बरदराज, डॉ. रितु रत्नम, डॉ. सिकंदर कुमार, डॉ. राजीव जोशी, डॉ. अमित रंजन, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. राघवेंद्र, डॉ. दीपक कुमार, डॉ. अशोक कुमार, नीरज कुमार नीराला आदि उपस्थित थे।

BNMU याद किए गए दिनकर। दिनकर का व्यक्तित्व एवं कृतित्व प्रेरणादायी : डॉ. जवाहर।

*याद किए गए दिनकर*
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राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर (1908-1974) आधुनिक भारत के निर्माताओं में एक हैं। उन्होंने भारतीय साहित्य, समाज एवं राजनीति को गहरे रूप से प्रभावित किया है। आज भारत का जो स्वरूप है, उसमें उनकी भी बड़ी भूमिका है। हम आज भी उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व से प्रेरणा ग्रहण कर सकते हैं।

यह बात के. पी. कालेज, मुरलीगंज के प्रधानाचार्य डॉ. जवाहर पासवान ने कही।

वे रविवार को रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना, ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा की ओर से डॉ. अंबेडकर कल्याण छात्रावास में किया गया।

*पद्म विभूषण से अलंकारित थे दिनकर*
डॉ. जवाहर ने बताया कि दिनकर को साहित्य एवं समाज में उनके योगदान के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित एवं अलंकारित किया गया। इनमें देश का द्वितीय सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म विभूषण शामिल है। इसके अलावा उन्हें संस्कृति के चार अध्याय के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा उर्वशी के लिए भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था।

*बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे दिनकर*
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि दिनकर बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने हिंदी, संस्कृत, बांग्ला, अंग्रेजी, उर्दू, राजनीति विज्ञान एवं दर्शनशास्त्र का गहन अध्ययन किया था। उन्होंने सड़क से लेकर संसद तक अपनी विद्वत्ता का परचम लहराया था। उन्होंने संसद के उच्च सदन राज्यसभा के सदस्य, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर के कुलपति और भारत सरकार के हिन्दी सलाहकार के रूप में कार्य किया।

*सही मायने में राष्ट्रवादी थे दिनकर*

उन्होंने कहा कि दिनकर सही मायने में राष्ट्रवादी थे। वे देश के सभी नागरिकों को एक समान मानते थे और सभी से प्रेम करते थे।

इस अवसर पर एनसीसी पदाधिकारी ले. गुड्डू कुमार, शोधार्थी सौरभ कुमार चौहान, डॉ. अंबेडकर कल्याण छात्रावास के छात्र नायक प्रिय रंजन, नयन रंजन, ओम रंजन, आशीष कुमार, मनीष मेहरा, दीपक कुमार, सचिन कुमार, पारस मणि पारस, शिवशंकर राम, सतीश कुमार, नवनीत कुमार, भवेश कुमार, कुंदन कुमार, चन्दन कुमार, मिथिलेश कुमार, सुमन कुमार, अजीत कुमार, राजू कुमार आदि उपस्थित थे।

BNMU वॉलीबॉल (पुरुष एवं महिला) प्रतियोगिता 25 अप्रैल को

वॉलीबॉल (पुरुष एवं महिला) प्रतियोगिता 25 अप्रैल को
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भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय अंतर्गत
के. पी. कॉलेज, मुरलीगंज, मधेपुरा में 25-28 अप्रैल को अंतर महाविद्यालय वॉलीबॉल (पुरुष एवं महिला) प्रतियोगिता का आयोजन सुनिश्चित है। कार्यक्रम का उद्घाटन 25 अप्रैल को अ. ढाई बजे बीएनएमयू, मधेपुरा के कुलपति डॉ. आर. के. पी. रमण और अध्यक्षता प्रधानाचार्य डॉ. जवाहर पासवान करेंगे।

समारोह में मुख्य अतिथि कुलसचिव प्रो. (डॉ.) मिहिर कुमार ठाकुर और विशिष्ट अतिथि क्रीड़ा एवं सांस्कृतिक परिषद् के सचिव डॉ. अबुल फजल तथा हिन्दी विभाग, टी. पी. कालेज, मधेपुरा की अध्यक्षा डॉ. वीणा कुमारी होंगी। इस अवसर पर सम्मानित अतिथि अभिषद् सदस्य कै. गौतम कुमार, उप कुलसचिव (अकादमिक) डॉ. सुधांशु शेखर एवं क्रीड़ा एवं सांस्कृतिक परिषद् के उपसचिव डॉ. शंकर कुमार मिश्र होंगे।

महाविद्यालय के खेत पदाधिकारी डॉ. मो. अली अहमद मंसूरी ने बताया कि प्रतियोगिता में भाग लेने हेतु सभी महाविद्यालय के प्रधानाचार्यों को पत्र प्रेषित किया गया है।