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BNMU संबंधन एवं नवशिक्षण समिति की बैठक

संबंधन एवं नवशिक्षण समिति की बैठक शनिवार को कुलपति प्रोफेसर डाॅ. आर. के. पी. रमण की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इसमें संबंधन से संबंधित विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा हुई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि संबंधन संबंधी प्रस्तावों को सरकार को भेजने के पूर्व उसके सभी पहलुओं की समुचित जाँच कर ली जाए।

इस अवसर पर प्रति कुलपति प्रोफेसर डाॅ. आभा सिंह, विज्ञान संकायाध्यक्ष डाॅ. अशोक कुमार यादव, सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष डाॅ. राजकुमार सिंह, सीसीडीसी डाॅ. इम्तियाज अंजूम, कुलसचिव डाॅ. मिहिर कुमार ठाकुर, महाविद्यालय निरीक्षक (कला एवं वाणिज्य) डाॅ. गजेंद्र कुमार, महाविद्यालय निरीक्षक (विज्ञान) डाॅ. भूपेंद्र सिंह आदि उपस्थित थे।

BNMU स्वास्थ युवा ही बना सकते हैं स्वास्थ भारत

*स्वास्थ युवा ही बना सकते हैं स्वास्थ भारत*

स्वास्थ्य मात्र बीमारियों के अभाव का नाम नहीं है। स्वास्थ्य के लिए हमें शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से संतुलित होना जरूरी है।

यह बात विश्वविद्यालय मनोविज्ञान विभाग एवं निदेशक (शै.) प्रो. (डाॅ.) एम. आई. रहमान ने कही। वे ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा के तत्वावधान में आयोजित फिट इंडिया कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे।


उन्होंने कहा कि हमें सिर्फ शारीरिक तंदुरूस्ती पर नहीं, बल्कि मानसिक एवं आध्यात्मिक उन्नति पर भी ध्यान देना चाहिए। हमें अपने मन को शांत रखना चाहिए और आपसी प्रेम एवं सदभाव बनाए रखना चाहिए।

उन्होंन कहा कि आज आधुनिक गलत जीवनशैली के कारण युवा वर्ग चिंता, भय, अवसाद, पैनिक अटैक, पछतावा, अपच, अनिद्रा आदि मनोवैज्ञानिक रोगों से ग्रसित हो गए हैं। उनमें गुस्सा, चिड़चिड़ापन अत्यधिक आने लगा है।

उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति जो अपने परिवार से काफी दूर हैं, वे अत्यधिक मनोविकारों से ग्रसित होने लगे हैं। लोग खाली रहने के कारण अपना अधिकतम समय मोबाइल या लैपटॉप पर दे रहे हैं। इसके कारण वे देर रात तक सो नहीं पाते हैं। जिस तरह से बच्चे किशोर एवं व्यस्क अपने-अपने मोबाइल के स्क्रीन से चिपके रहते हैं, उनमें कंप्यूटर वर्जन सिंड्रोम होने की संभावनाएं बढ़ती जा रही हैं। रोजगार और आय के स्रोत भी कम हो गए हैं।

उन्होंने आज लोगों को पौष्टिक आहार भी नहीं मिल पा रहा है। इससे उनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो रही है। लोगों की सोचने-समझने की क्षमता में कमी आ रही है।

विशिष्ट वक्ता विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली में पीआई डाॅ. विनीत भार्गव ने बताया कि युवावस्था में हम अपने भविष्य-निर्माण की चिंता में खो जाते हैं। भविष्य की चिंता में हमारा वर्तमान ही खतरे में पड़ जाता है। सबसे पहली चीज़ जो इस आपा-धापी में खोता है, वह है आपका स्वास्थ्य। शरीर ही वह माध्यम है जिसके जरिए आप धरती पर उपलब्ध संसाधनों का उपभोग करते हैं। यदि आपका स्वास्थ्य ही ठीक नहीं होगा तो आप सारी दुनिया की संपत्ति ही क्यों न अर्जित कर लें।

उन्होंने कहा कि युवावस्था में भरपूर जोश होता है और होश की कमी होती है। यहीं आपसे चूक हो जाती है। आप या तो किसी प्रकार के नशे में या गलत संगति में या उत्सुकतावश यौनाचार में प्रवेश कर जाते हैं। इससे युवाओं में एचआईवी जैसी संक्रामक बीमारी होने का खतरा बढ़ता है। गलत जीवनशैली व उससे पैदा होने वाली निराशा से युवा और भी कई मानसिक एवं शारीरिक बीमारियों से पीड़ित हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आजकल युवाओं में तनाव एवं अवसाद बढ़ रहे हैं। उनमें बीपी, सूगर एवं थायरॉइड का खतरा भी तेजी से बढ़ता जा रहा है।

उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया कि कोरोना में युवाओं एवं बच्चों में मोबाइल के प्रति अतिरिक्त आकर्षण बढ़ा। उनका यह तकनीकी प्रेम पैथोलॉजिकल लेवल तक पहुंच गया है। आप हम बहुत अधिक सूचनाग्राही हो गए हैं। इतना अधिक कि वह अब अपच के रूप में उभरकर सामने आ रहा है। आपके पास सूचना तो बहुत है, लेकिन आप जानते बहुत कम हैं।

उन्होंने कहा कि हमें अपने परिवार के सदस्यों के साथ अधिक से अधिक समय बिताना चाहिए। घर के छोटे-छोटे कामों में खुद को इन्वॉल्व करना मोबाइल पर समय बिताने से कहीं अच्छा है।

उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने स्लीपिंग और फ़ूड पैटर्न के बारे में भी अधिक सजग रहने की जरूरत है। देर रात तक जगना, जरूरत से ज्यादा भोजन करना व स्वच्छता की अनदेखी ये कुछ ऐसी भूलें जो युवा अक्सर करते हैं। परिणामस्वरूप आपके शरीर का केमिकल कोआर्डिनेशन बिगड़ता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरों की संभावना बढ़ जाती है।

उन्होंने कहा कि स्कूलों एवं कॉलेजों में साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड सर्विसेज़ की शुरुआत होनी चाहिए, इस पर भी जोर दिया। जहाँ बच्चे खुलकर अपनी बातों को साझा कर सकें और उनका समय रहते उचित मार्गदर्शन हो सके।

उन्होंने कहा कि आपका स्वास्थ्य आपके अपने हाथों में है। कोई आपको स्वस्थ नहीं रख सकता। वह आप ही हैं जो खुद को रख सकते हैं।

डाक्टर भी आपसे पूछकर ही आपका निदान एवं उपचार करता हैं। यदि हम स्वयं अपने शरीर के संकेतों को समझ लें और तदनुसार परहेज़ करें तो कम से कम बीमार होंगे।

उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य सिर्फ लंबा नहीं होना चाहिए, बल्कि लम्बे के साथ-साथ स्वस्थतापूर्ण एवं गुणवत्तापूर्ण जीवन जीना भी होना चाहिए। हमें अपने स्वास्थ्य की जिम्मेदारी पहले खुद समझना चाहिए।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि एनएसएस समन्वयक डॉ. अभय कुमार ने कहा कि फिट इंडिया कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों के बीच जागरूकता फैलाना है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने की। संचालन राजनीति विज्ञान विभाग के शोधार्थी सारंग तनय ने किया। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम पदाधिकारी, इकाई-iii डाॅ. स्वर्ण मणि ने किया।

इस अवसर पर के पी काॅलेज, मुरलीगंज के डाॅ. अमरेंद्र कुमार, शोधार्थी द्वय माधव कुमार एवं सौरव कुमार चौहान, पल्लवी कुमारी, शांतुन यदुवंशी, प्रिंस कुमार, तहसिन अख्तर, डेविड यादव, प्रिंस कुमार, अमरेंद्र झा, चन्द्रशेखर मिश्रा, ज्योति कुमारी, नैना आदि उपस्थित थे।

 

NSS के. पी महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना दिवस

के.पी. महाविद्यालय, मुरलीगंज में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा राष्ट्रीय सेवा योजना का स्थापना दिवस ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम में किया किया गया।

इस अवसर पर कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रीय सेवा योजना के क्षेत्रीय निदेशक पीयूष परांजपे और स्वास्थ्य विभाग के युवा क्षेत्रीय निदेशक, बिहार ऐड्स नियंत्रण समिति, पटना के आलोक कुमार सिंह सर के द्वारा किया गया।

इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रोफ़ेसर डॉ. राजीव रंजन ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों के व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ राष्ट्र सेवा के लिए जागरूक करना है।

इस अवसर पर मैथिलि विभागाध्यक्ष महेंद्र मंडल ने कहा कि देश में 65% युवा की आबादी है। युवा ही बेहतर भूमिका राष्ट्र निर्माण में निभा सकता है।

इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ अमरेंद्र कुमार ने कहा कि मात्र किताबी ज्ञान से ही जीवन में सफलता नहीं मिलती है बल्कि छात्रों को जीवन में सफल होने होने में एनएसएस महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर सुशांत सिंह ने छात्र छात्राओं को किस तरह एनएसएस व्यक्तित्व विकास में मदद करता है इस विषय पर अपनी जानकारी दी।

इस दौरान एनएसएस के स्वयंसेवकों द्वारा कॉलेज की साफ सफाई की गई एवं महाविद्यालय प्रांगण में पौधारोपण कार्यक्रम भी किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षक प्रोफ़ेसर महेंद्र मंडल, डॉ रविंद्र कुमार डॉक्टर, पंकज शर्मा, डॉ. अमरेंद्र कुमार, डॉ. त्रिदेव निराला, डॉ. राघवेंद्र कुमार, डॉ. दीपक कुमार, संजय कुमार, डॉ. प्रीति कुमारी, डॉ किरण कुमारी, डॉ. रितु रत्नम, डॉ. अमित रंजन, प्रधान सहायक नीरज कुमार निराला, लेखापाल देवाशीष देव, गजेंद्र दास, प्रभाकर मंडल, अभिमन्यु, सिंटू, विकास, मीना देवी, शोभा देवी, एनएसएस के छात्र एवं छात्रा शाहीन, आदिल, सूरज, गुड़िया, विनीत काजल कुमारी आदि उपस्थित थे

NSS जिम्मेदारी का बोध कराता है एनएसएस : पीयूष परांजपे। युवाओं के व्यक्तित्व विकास एवं चरित्र-निर्माण में है एनएसएस की महती भूमिका : आलोक कुमार सिंह

*राष्ट्रीय सेवा योजना दिवस*

जिम्मेदारी का बोध कराता है एनएसएस : पीयूष परांजपे

युवाओं के व्यक्तित्व विकास एवं चरित्र-निर्माण में है एनएसएस की महती भूमिका : आलोक कुमार सिंह
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एनएसएस हमें एक जिम्मेदार मनुष्य बनाता है। यह जिम्मेदारी अपने प्रति से भी संबंधित है और परिवार, समाज एवं राष्ट्र तथा संपूर्ण विश्व से भी संबंधित है। इसका दायरा न केवल सभी मनुष्यों बल्कि मनुष्येतर प्राणियों तथा संपूर्ण चराचर जगत तक फैला है। हमें सभी मनुष्यों, जीव-जंतु एवं प्रकृति-पर्यावरण सबों के प्रति अपनी संवेदना बनाए रखनी है।

यह बात राष्ट्रीय सेवा योजना, पटना के क्षेत्रीय निदेशक पीयूष परांजपे ने कही। वे ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा में आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना दिवस समारोह का उद्घाटन कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि एनएसएस का सूत्र वाक्य ‘मैं नहीं, आप है।’ हम सभी कार्यक्रम पदाधिकारी एवं स्वयंसेवक हमेशा इसी को केन्द्र में रखकर कार्य करें।

उन्होंने कहा कि हम अपने परिवार, समाज एवं राष्ट्र के लिए कार्य करें। मानव-निर्माण एवं राष्ट्र-निर्माण में योगदान दें।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति, पटना के सहायक निदेशक (युवा) आलोक कुमार सिंह ने कहा कि एनएसएस युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करता है। युवाओं के व्यक्तित्व विकास एवं चरित्र-निर्माण में इसकी महती भूमिका है।

उन्होंने कहा कि युवा ही देश के भविष्य हैं और उन्हीं के ऊपर देश के नवनिर्माण की जिम्मेदारी है। युवा जागरूक होंगे, तो उनके माध्यम से परिवार, समाज एवं राष्ट्र जागरूक होगा। युवाओं की उर्जा को सकारात्मक दिशा देकर हम एक स्वस्थ, सबल एवं समृद्ध भारत का निर्माण कर सकते हैं। नए भारत का निर्माण कर सकते हैं।

पोपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी ॠषु प्रकाश ने कहा कि एनएसएस के माध्यम से युवाओं के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार के सवालों पर निरंतर संवाद करने की जरूरत है।

विशिष्ट अतिथि एनएसएस समन्वयक डॉ. अभय कुमार ने एनएसएस की स्थापना, इसके उद्देश्य एवं कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला

टी. पी. कॉलेज, मधेपुरा के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. स्वर्ण मणि ने कहा कि एनएसएस स्वयंसेवकों द्वारा आपदाकाल में आम लोगों के जानमाल की सुरक्षा हेतु किया जाने वाला प्रयास सराहनीय है। हाल के दिनों में भी स्वयंसेवकों ने कोरोना वारियर्स की तरह काम किया है।

सीएम साइंस कॉलेज, मधेपुरा के कार्यक्रम पदाधिकारी
डॉ. संजय कुमार परमार ने कहा कि एनएसएस हमें अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति सजग करता है। आज सब लोग सिर्फ अपने अधिकार की बात करते हैं, अपने कर्तव्य को भूल जाते हैं। हमें अपने कर्तव्य का पालन करना होगा।

के. पी. कॉलेज, मुरलीगंज के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. अमरेंद्र कुमार ने कहा कि एनएसएस हमें सामाजिक दायित्वों से जोड़ता है। हमें समाज से बहुत कुछ मिलता है, हमें समाज को वापस भी करना चाहिए।

मधेपुरा काॅलेज, मधेपुरा की कार्यक्रम पदाधिकारी आरती ने कहा कि एनएसएस युवाओं में देशप्रेम की भावना को बढ़ावा देता है।

कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी सारंग तनय ने किया। इसके पूर्व कार्यक्रम की शुरूआत प्रांगण रंगमंच की गायिका तनुजा कुमारी ने सरस्वती वंदना से की। उन्होंने कई राष्ट्रभक्ति गीत गाकर भी लोगों का दिल जीत लिया। उनके गीत ‘दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए’ के माध्यम से युवाओं में देशभक्ति का प्रसार किया। साथ ही ‘नफरत की दुनिया को छोड़कर प्यार की दुनिया में खुश रहना मेरे यार’ गीत के माध्यम से प्रेम एवं भाईचारा का संदेश दिया। उन्होंने बिहारी लोकगीतों के माध्यम से भी लोगों को सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूक किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने किया। संचालन शोधार्थी सारंग तनय एवं स्वयंसेवक सांतनु यदुवंशी ने किया।

इसके पूर्व कार्यक्रम की शुरूआत प्रांगण रंगमंच की गायिका तनुजा कुमारी ने सरस्वती वंदना से की। उन्होंने कई राष्ट्रभक्ति गीत गाकर भी लोगों का दिल जीत लिया। उनके गीत ‘दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए’ के माध्यम से युवाओं में देशभक्ति का प्रसार किया। साथ ही ‘नफरत की दुनिया को छोड़कर प्यार की दुनिया में खुश रहना मेरे यार’ गीत के माध्यम से प्रेम एवं भाईचारा का संदेश दिया। उन्होंने बिहारी लोकगीतों के माध्यम से भी लोगों को सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूक किया।

इस अवसर पर शोधार्थी द्वय माधव कुमार एवं सौरव कुमार चौहान, अभिषेक आचार्य, प्रिंस कुमार आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर तहसिन अख्तर, अमरेंद्र झा, चन्द्र शेखर मिश्रा, ज्योति कुमारी, नैना आदि उपस्थित थे।

BNMU दर्शन के बगैर अधूरा है जीवन

*दर्शन के बगैर अधूरा है जीवन*

दर्शन यथार्थ की परख के लिए एक दृष्टिकोण है और यह दृष्टिकोण सभी व्यक्तियों में पाया जाता है। सिर्फ दर्शन पढ़ाने वाले दार्शनिक नहीं हैं, बल्कि सभी व्यक्ति दार्शनिक हैं।

यह बात शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की स्वायत्त संस्था भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् द्वारा प्रायोजित विश्व दर्शन दिवस के दौरान सामने आई।

विश्व दर्शन दिवस मनाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा वर्ष 2002 से की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य दार्शनिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन है। इसके अंतर्गत दार्शनिक विरासत को साझा करने के लिए विश्व के सभी लोगों को प्रोत्साहित करना और विभिन्न विचारों के लिए खुलापन लाना तथा समकालीन चुनौतियों से लड़ने के लिए विचार-विमर्श को प्रेरित करना शामिल है।

इस अवसर पर आईसीपीआर, नई दिल्ली के अध्यक्ष *प्रो. (डाॅ.) रमेशचन्द्र सिन्हा* ने कहा कि उन्होंने कहा कि दर्शन प्राचीनतम विषय है और यह आधुनिक जीवन में भी प्रासंगिक है। कोई भी संस्कृति दर्शन के बगैर जीवित नहीं रह सकती है।

उन्होंने कहा कि दार्शनिक चिन्तन मूलतः जीवन की अर्थवत्ता की खोज का पर्याय है।  विश्व दर्शन दिवस हमारे लिए कर्तव्यबोध का दिवस है। इसका संदेश है कि हम दर्शन के प्रति प्रतिबद्ध हों और दर्शन को समाज के अंतिम व्यक्ति से जोड़ें।

*कुलपति प्रो. (डाॅ.) आर. के. पी. रमण* ने कहा कि दर्शन जीवन का आधार है। दर्शन के आधार पर ही हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं।

*प्रति कुलपति प्रो. (डाॅ.) आभा सिंह* ने कहा कि दर्शनशास्त्र के अध्ययन-अध्यापन को बढ़ावा देने की जरूरत है।

अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के अध्यक्ष *प्रो. (डाॅ.) जटाशंकर* (प्रयागराज) ने कहा कि विश्व की दर्शन में दुनिया की सभी समस्याओं का समाधान निहित है। समाज के अंतिम व्यक्ति का विकास ही दर्शन का मुख्य उद्देश्य है।

भारतीय महिला दार्शनिक परिषद् की अध्यक्ष *प्रो (डाॅ.) राजकुमारी सिन्हा (राँची)* ने कहा कि दार्शनिकों को अपने आंचलिक समाज एवं संस्कृति का अध्ययन करना चाहिए और हाशिए पर खड़े लोगों को भी दर्शन से जोड़ना चाहिए।

रामकृष्ण मिशन, मुजफ्फरपुर के सचिव *स्वामी भावात्मानंद जी महाराज* ने कहा कि दर्शन को नए संदर्भों में व्याख्यायित करने की जरूरत है। हम लोगों में जनकल्याण की भावना जागृत करें और भारतीय दार्शनिक विचारों को जन-जन तक पहुँचाएँ।

BNMU विश्वविद्यालय के सभी अंगीभूत महाविद्यालय के प्रधानाचार्यों की बैठक

विश्वविद्यालय के सभी अंगीभूत महाविद्यालय के प्रधानाचार्यों की बैठक कुलपति प्रोफेसर डाॅ. आर. के. पी. रमण की अध्यक्षता में संपन्न हुई।

बैठक में यह बताया गया कि विशेष रूप से बिहार सरकार के पत्र के आलोक में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और सभी वर्ग की छात्राओं से नामांकन के समय शुल्क नहीं लेने से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया।

सभी महाविद्यालयों को क्षतिपूर्ति की राशि की गणना कर 5 अक्टूबर तक विश्वविद्यालय में जमा कराना है।

निर्णयानुसार स्नातक प्रथम खंड 2020-21 में नामांकन की प्रक्रिया का सुचारू संचालन किया जाएगा। सभी अंगीभूत महाविद्यालयों में एक समान विकास शुल्क के निर्धारण पर विचार चल रहा है।

सभी प्रधानाचार्यों को यह निदेशित किया गया कि परीक्षा प्रपत्र में को त्रुटि नहीं रहे। महाविद्यालय में विद्यार्थियों से एनएसएस और खेलकूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के मद में ली जाने वाली राशि का विश्वविद्यालय अंश ससमय जमा कराया जाए।

इस अवसर पर प्रति कुलपति प्रोफेसर डाॅ. आभा सिंह, डीएसडब्लू डाॅ. अशोक कुमार यादव, कुलानुशासक डाॅ. विश्वनाथ विवेका, कुलसचिव डाॅ. मिहिर कुमार ठाकुर, अकादमिक निदेशक डाॅ. एम. आई. रहमान, आईक्यूएसी निदेशक डाॅ. मोहित कुमार घोष, एनएसएस समन्वयक डाॅ. अभय कुमार, खेल सचिव डाॅ. अबुल फजल, उप सचिव डाॅ. शंकर कुमार मिश्र, जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर और विभिन्न महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य उपस्थित थे।

BNMU निजीकरण देश की बहुसंख्यक जनता के साथ धोखा और भारतीय संविधान का खुलेआम उलंघन है।

आज निजीकरण के नाम पर देश में सभी सरकारी एवं सार्वजनिक उपक्रमों को कौड़ियों के भाव निजी हाथों में बेचा जा रहा है। यह देश की बहुसंख्यक जनता के साथ धोखा और भारतीय संविधान का खुलेआम उलंघन है।

यह बात टी. पी. काॅलेज, मधेपुरा में स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान के अध्यक्ष डाॅ. जवाहर पासवान ने कही। वे गुरूवार को निजीकरण के खतरे एवं विकल्प विषयक सेमिनार की अध्यक्षता कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि निजीकरण से देश में असमानता फैली है। निजी उद्योगों में लोगों को पूर्ण वेतन नहीं मिलता है। इसमें कर्मचारियों से अत्यधिक काम लिया जाता है, लेकिन पेंशन एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा जाता है।

उन्होंने कहा कि संविधान में बेगारी प्रथा को प्रतिबंधित किया गया है।

लेकिन निजीकरण में लोगों को पूँजीपतियों की बेगारी करनी पड़ती है।

कार्यक्रम के उद्घाटनकर्ता गणित विभागाध्यक्ष सह प्रभारी प्रधानाचार्य डाॅ. एम. एस. पाठक ने कहा कि निजीकरण के विभिन्न पहलुओं का सम्यक् मूल्यांकन करने की जरूरत है।

मुख्य अतिथि हिंदी विभागाध्यक्ष डाॅ. वीणा कुमारी ने कहा कि भारत जैसे प्रजातांत्रिक देश में सार्वजनिक उपक्रम के अनेक लाभ हैं।

इसके देश आर्थिक एवं सामाजिक रूप से मजबूत होता है। इसके विपरीत निजीकरण के कई खतरे हैं।

विशिष्ट अतिथि जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने कहा कि वैश्विककरण, उदारीकरण एवं निजीकरण बहुसंख्यक जनता के खिलाफ है।

देश को इन नीतियों से बचाने की जरूरत है। सभी क्षेत्रों में आम लोगों को केन्द्र में रखकर की नीतियाँ बनाने की जरूरत है।

शोधार्थी तुरबसु ने कहा कि निजीकरण की चकाचौंध के पीछे घनघोर अंधेरा है। इसमें आम लोगों का शोषण एवं दोहन होता है।

धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव डाॅ. रोहिणी ने किया।

इस अवसर पर डाॅ. राजकुमार, माधव कुमार, सारंग तनय, सौरभ कुमार, सौरभ कुमार चौहान, आनंद कुमार भूषण, राजहंस राज, दीपक कुमार, राजेश कुमार, विक्रम कुमार, चंद किशोर कुमार, कनकलाता कुमारी, रुचि कुमारी, रिमझिम कुमारी, अभिषेक कुमार, संतोष कुमार सुमन, मंटू कुमार, नंदनी कुमारी, प्रिया कुमारी, प्रियंका कुमारी, नंदकुमार, अनिल कुमार, सुमित कुमार, मोनी कुमारी, दीपक राम, कुंदन कुमार, अंशु कुमारी, मोहम्मद शौकत, मोहम्मद फारुख, संतोष कुमार सिंह, साजन कुमार, सूरज कुमार आदि उपस्थित थे।

BNMU पदसृजन, अंतर्लीनीकरण एवं सेवा संपुष्टि समिति की बैठक 24 सितंबर, 2021 को

BNMU पदसृजन, अंतर्लीनीकरण एवं सेवा संपुष्टि समिति की बैठक 24 सितंबर, 2021 को

 

WPD विश्व दर्शन दिवस पर वेबिनार का आयोजन

*व्याख्यान माला आयोजन*

दर्शन यथार्थ की परख के लिए एक दृष्टिकोण है और यह दृष्टिकोण सभी व्यक्तियों में पाया जाता है। सिर्फ दर्शन पढ़ाने वाले दार्शनिक नहीं हैं, बल्कि सभी व्यक्ति दार्शनिक हैं।

यह बात आईसीपीआर,  नई दिल्ली के अध्यक्ष *प्रो. (डाॅ.) रमेशचन्द्र सिन्हा* ने कही। वे विश्व दर्शन दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित वेबिनार का उद्घाटन कर रहे थे।

कार्यक्रम शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की स्वायत्त संस्था भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् द्वारा प्रायोजित था।

उन्होंने कहा कि दर्शन प्राचीनतम विषय है और यह आधुनिक जीवन में भी प्रासंगिक है। कोई भी संस्कृति दर्शन के बगैर जीवित नहीं रह सकती है।

उन्होंने कहा कि दार्शनिक चिन्तन मूलतः जीवन की अर्थवत्ता की खोज का पर्याय है। अतः विश्व दर्शन दिवस हमारे लिए कर्तव्यबोध का दिवस है। इसका संदेश है कि हम दर्शन के प्रति प्रतिबद्ध हों और दर्शन को समाज के अंतिम व्यक्ति से जोड़ें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए *कुलपति प्रो. (डाॅ.) आर. के. पी. रमण* ने कहा कि आज जितनी भी चुनौतियाँ एवं समस्याएं है, उसका समाधान भारतीय दर्शन में है। यह दर्शन “वसुधैव कुटुंबकम” का संदेश देता है। आज संयुक्त परिवार समाप्त हो गया है और हमारा समाज विखंडित हो रहा है। हम लोग संकीर्ण हो गए हैं। भाई-भाई,  पिता-बेटा एवं पति-पत्नि में विवाद है।  आज हम विज्ञान के क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ गए हैं, लेकिन नैतिकता के क्षेत्र में काफी पीछे हो गए हैं।

उन्होंने कहा कि आज प्रत्येक व्यक्ति अंतद्वंद में जी रहा है और वह सही-गलत का निर्णय नहीं ले पा रहा है। हमें नैतिक मूल्य ही सही- गलत का बोध करा सकते हैं। इसके लिए हमें भारतीय नैतिक दर्शन को अपने जीवन में आत्मसात करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन नैतिकता पर आधारित है। इसके आधार पर हम अपने और संपूर्ण चराचर जगत का कल्याण कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अपने लिए तो सब जीते हैं, लेकिन जो दूसरों के लिए जीते हैं, उनका ही जीवन सार्थक होता है।

उन्होंने कहा कि अंतर्मन की शक्ति को जागृत करना दर्शन का उद्देश्य है। जब भी हमारे जीवन में द्वंद आए हमें अंतर्मन की पुकार के आधार पर ही कार्य करना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान दर्शनशास्त्र के विभिन्न पहलुओं से संबंधित चार व्याख्यान हुआ।

*प्रति कुलपति प्रो. (डाॅ.) आभा सिंह* ने उत्तर कोरोनाकालीन जीवन दर्शन विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से पूरी दुनिया त्रस्त है। इस महामारी ने किसी को भी नहीं छोड़ा है। इसने हमारे जीवन में भूचाल ला दिया है। कोरोना ने न केवल स्वास्थ्य, शिक्षा एवं अर्थशास्त्र को प्रभावित किया है, बल्कि यह शांति एवं सहअस्तित्व के लिए भी बड़ा खतरा बनकर सामने आया है।

उन्होंने कहा कि  सभी व्यक्ति एक-दूसरे से जुड़े हैं- सभी संपूर्ण सृष्टि से जुड़े हैं। प्रत्येक मानव प्रकृति-पर्यावरण और चराचर जगत से जुड़ा हुआ है। मानव ब्रह्मांड में होने वाली सभी घटनाओं से प्रभावित होता है और मानव का हर कर्म भी संपूर्ण संसार को प्रभावित करता है। मानव का अच्छा कर्म संसार को विकास के मार्ग पर ले जाता है, जबकि उसका बुरा कर्म संपूर्ण चराचर जगत के विनाश का कारण बनता है।

उन्होंने कहा कि हमारा स्वास्थ्य भी वैश्विक संतुलन पर निर्भर है। यदि प्रकृति-पर्यावरण संतुलित एवं सामंजस्यपूर्ण स्थिति में रहेगा, तभी हम सही मायने में स्वस्थ रह सकेंगे। अतः हमें अपने अलावा दूसरों का भी ख्याल रखना चाहिए।

रामकृष्ण मिशन, मुजफ्फरपुर के सचिव *स्वामी भावात्मानंद जी महाराज* नव वेदांत समसामयिक संदर्भ विषय पर व्याख्यान दिया।

उन्होंने कहा कि वेदांत एक सनातन जीवन-दर्शन है। इसमें प्राचीन ऋषियों की अनुभूतियाँ हैं। विवेकानंद ने वेदांत के इस युगांतकारी विचारों को आधुनिक संदर्भों में व्याख्यायित किया और इसे जन-जन से जोड़ने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि विवेकानंद के विचारों में राष्ट्रीय एकता एवं विश्वबंधुता के सूत्र निहित हैं। यदि हम विवेकानंद की तरह सभी धर्मों की मूल भावनाओं को समझें और उसे मानवता के व्यापक हित के संदर्भों में व्याख्यायित करें, तो धार्मिक वैमनस्य एवं आतंकवाद का अंत हो जाएगा। हमें यह याद रहे कि स्वीकार्यता, सहिष्णुता एवं समभाव की भावना से ही न्याय, शांति एवं विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।

उन्होंने लोगों में जनकल्याण की भावना जागृत करने और विवेकानंद के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने पर बल दिया।

भारतीय महिला दार्शनिक परिषद् की अध्यक्ष *प्रो (डाॅ.) राजकुमारी सिन्हा (राँची)* के व्याख्यान का विषय मानव शास्त्रीय दार्शनिक अध्ययन समय की मांग था उन्होंने कहा कि दर्शन को आम लोगों से जोड़ने की जरूरत है।

उन्होंने दार्शनिकों का आह्वान किया कि वे अपने आंचलिक समाज एवं संस्कृति को अपने अध्ययन का विषय बनाएँ और हाशिए पर खड़े लोगों को भी दर्शन से जोड़ने का प्रयास करें।

अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के अध्यक्ष *प्रो. (डाॅ.) जटाशंकर* (प्रयागराज) ने समसामयिक समस्याएं : वेदांती समाधान विषय पर व्याख्यान दिया।


उन्होंने कहा कि आज मानव स्वार्थी हो गया है। वह भोगवाद के वशीभूत होकर कर्तव्य-अकर्तव्य को भूल गया है। अपने अस्तित्व पर मंडरा रहे संकटों के बावजूद वह अपनी जिद छोड़ने को तैयार नहीं है।

उन्होंने कहा कि वेदांत विश्व में एकत्व की दृष्टि का प्रतिपादन करता है । इसी दृष्टि में में विश्व की सभी समस्याओं का समाधान निहित है। यदि हम वेदांती जीवन दृष्टि को आत्मसात करेंगे, तो हम सभी समस्याओं से मुक्त हो सकते हैं ।

उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति का विकास ही दर्शन का मुख्य उद्देश्य है। हमें जीवन में उतना ही संग्रह करना चाहिए, जिससे हमारा जीवन सुचारू रूप से संचालित हो सके। आवश्यकता से अधिक संग्रह करना पाप है।

कार्यक्रम का संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. सुधांशु शेखर (आयोजन सचिव) और धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष शोभाकांत कुमार ने किया। अतिथियों का स्वागत स्वागत मोमेंटो एवं पुष्पगुच्छ से किया गया। प्रांगण रंगमंच की तनुजा सोनी ने स्वागत गीत एवं गणेश वंदना प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ हुआ

कार्यक्रम में उत्तर भारत दर्शन परिषद् के अध्यक्ष डाॅ. सभाजीत मिश्र, पटना विश्वविद्यालय, पटना की डाॅ. पूनम सिंह, कुलसचिव डॉ. मिहिर कुमार ठाकुर, सिंडिकेट सदस्य डाॅ. जवाहर पासवान, विकास पदाधिकारी डाॅ. ललन प्रसाद अद्री, उप खेल सचिव डाॅ. शंकर कुमार मिश्र, के. पी.  काॅलेज, मुरलीगंज के डाॅ. अमरेन्द्र कुमार, कुलपति के निजी सहायक शंभु नारायण यादव, केंद्रीय पुस्तकालय के सिद्दु कुमार, माया के अध्यक्ष राहुल यादव, सीनेटर रंजन यादव, शोधार्थी सारंग तनय, माधव कुमार, दिलीप कुमार दिल,  सौरभ कुमार चौहान, लक्ष्मण कुमार, शशि कुमार, राजहंस राज, बिमल कुमार, नीतीश कुमार, सुधांशु कुमार, फिरोज मंसूरी, डाॅ. आर. एस. यादव, उज्ज्वल कुमार, मो. अलमान अली, आशीष कुमार, संगीत कुमार, एम. एस. भास्कर, लव कुमार, रोशन कुमार, चंदन कुमार, सुमन कुमार, सुभाष कुमार सुमन, सुधीर कुमार विद्यार्थी, विकास कुमार, रुसी कुमारी, रूचि, स्नेहा, रवीन्द्र कुमार पासवान, अमरनाथ कुमार साह, दीपक कुमार, धीरज कुमार, लक्ष्मण कुमार,  निखिल कुमार, अभिमन्यु कुमार, रूपेश कुमार, फूल कुमारी, वंदना कुमारी, प्रियंका कुमारी, रचना भारती, ओम ज्योति, स्मृति कुमारी, आयसा खातुन, प्रियंका राज, नीतू कुमारी, गुरूदेव कुमार, पिंटू कुमार, राजकुमार, बिरबल कुमार, विकास कुमार, प्रभाकर कुमार, निधि कुमारी, प्रियंका कुमारी, जगन राम आदि ने भाग लिया।

मालूम हो कि विश्व दर्शन दिवस के आयोजन हेतु शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् से अनुदान भी प्राप्त हुआ है।

विश्व दर्शन दिवस के आयोजन हेतु शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् से अनुदान भी प्राप्त हुआ है। परिषद् के निदेशानुसार यह आयोजन सुप्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में नवंबर 2020 के तीसरे गुरूवार को ही होना था। लेकिन कोरोना संक्रमण के खतरों के कारण आयोजन में विलंब हुआ।

विश्व दर्शन दिवस मनाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा वर्ष 2002 से की गई है।

विश्व दर्शन दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य दार्शनिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन है। इसके अंतर्गत दार्शनिक विरासत को साझा करने के लिए विश्व के सभी लोगों को प्रोत्साहित करना और विभिन्न विचारों के लिए खुलापन लाना तथा समकालीन चुनौतियों से लड़ने के लिए विचार-विमर्श को प्रेरित करना शामिल है।