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BNMU पूर्व कुलपति डॉ. जयकृष्ण यादव के निधन पर शोक

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पूर्व कुलपति के निधन पर शोक

बीएनएमयू के पूर्व कुलपति डॉ. जयकृष्ण यादव के निधन से ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा में शोक व्याप्त है।

प्रधानाचार्य डॉ. कैलाश प्रसाद यादव ने बताया कि डॉ. जयकृष्ण का सोमवार को प्रातः लगभग 10:00 बजे निधन हो गया। इससे शिक्षा जगत को अपूर्णीय क्षति हुई है।

दर्शनशास्त्र विभाग में प्राध्यापक डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि डॉ. जयकृष्ण टीपी कॉलेज, मधेपुरा में दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष तथा पार्वती विज्ञान महाविद्यालय, मधेपुरा में प्रधानाचार्य भी रहे थे। अपनी सेवाकाल के अंतिम वर्षों में उन्हें विश्वविद्यालय की कुलपति के रूप में सेवा का अवसर मिला था। वे अभी भी विश्वविद्यालय के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होकर उसकी शोभा बढ़ाते थे।

अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. मिथिलेश कुमार अरिमर्दन ने बताया कि डॉ. जयकृष्ण का पार्थिव मंगलवार को पू. 10:00 महाविद्यालय परिसर में दर्शनार्थ लाया जाएगा। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को उपस्थित रहने का निदेश दिया गया है।

BNMU जंतु विज्ञान विभाग के अध्यक्ष बने प्रो. नरेंद्र श्रीवास्तव

विभागाध्यक्ष बने प्रो. नरेंद्र श्रीवास्तव
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बीएनएमयू के पूर्व डीएसडब्ल्यू एवं पूर्व कुलसचिव प्रो. (डॉ.) नरेंद्र श्रीवास्तव विश्वविद्यालय जंतु विज्ञान विभाग के अध्यक्ष बनाए गए हैं। उन्होंनेने सोमवार को कुलसचिव प्रो. मिहिर कुमार ठाकुर को आपना योगदान समर्पित किया।

इस अवसर पर विकास पदाधिकारी डॉ. ललन प्रसाद अद्री, उप कुलसचिव (स्थापना) डॉ. सुधांशु शेखर, माया के अध्यक्ष राहुल यादव, सीएस पांडेय आदि उपस्थित थे‌।

उप कुलसचिव स्थापना डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि प्रो. नरेंद्र श्रीवास्तव ने 8 नवंबर, 1996 को असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में अपने शैक्षणिक कैरियर की शुरुआत की है। वे 2007 टी. पी. कालेज, मधेपुरा में बीसीए के समन्वयक बने। 2010 में विश्वविद्यालय कम्प्यूटर शेल के निदेशक बने।‌ वे 2010 उप कुलसचिव (वोकेशनल एवं प्रोफेशन कोर्स) और 2011 में उप कुलसचिव (शैक्षणिक) बने। दिसंबर 2017 से जुलाई 2018 तक कुलसचिव और उसके बाद अध्यक्ष, छात्र कल्याण भी रहे हैं।

उन्होंने बताया कि प्रो. श्रीवास्तव ने राजभवन, पटना द्वारा बनाई गई बायोटेक्नोलॉजी सीबीसीएस पाठ्यक्रम समिति के सदस्य (2018), इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कमिटी आफ यूनिवर्सिटी ऑफ बिहार के सदस्य भी रहे हैं।

उन्होंने बताया कि प्रो. श्रीवास्तव की तीन पुस्तकें और 20 शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं। इन्होंने लगभग दो दर्जन राष्ट्रीय सेमिनारों में शोध पत्र प्रस्तुत किया है और इंडियन साइंस कांग्रेस के दो बार (मैसूर एवं मणिपुर अधिवेशन में) इन्वाइटेड स्पीकर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि प्रो. श्रीवास्तव इंडियन साइंस कांग्रेस, जूलोजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया, नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज एंड जूलाजिकल सोसायटी ऑफ इस्टर्न इंडिया के आजीवन सदस्य हैं। इन्हें भारत गौरव समिति, दिल्ली द्वारा लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

उन्होंने बताया कि 31 जनवरी को प्रो. (डॉ.) अरुण कुमार की सेवानिवृति के फलस्वरुप जन्तु विज्ञान के वरिष्ठ प्रोफेसर के रूप में डॉ. नरेंद्र श्रीवास्तव को यह जिम्मेदारी दी गई है।

BNMU बीएनएमयू में भी खुला मुख्यमंत्री व्यवसायिक पाठयक्रम मार्गदर्शन एवं उत्प्रेरण केन्द्र

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बीएनएमयू में भी खुला मुख्यमंत्री व्यवसायिक पाठयक्रम मार्गदर्शन एवं उत्प्रेरण केन्द्र
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बिहार सरकार ने राज्य के छ: विश्वविद्यालयों में मुख्यमंत्री व्यावसायिक पाठ्यक्रम मार्गदर्शन एवं उत्प्रेरण केंद्र की स्वीकृति प्रदान की है। इनमें भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के अलावा पटना विश्वविद्यालय, पटना, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा एवं भीमराव अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के नाम शामिल हैं।

*कुलपति ने जताई प्रसन्नता*
कुलपति प्रो. आर. के. पी. रमण ने बीएनएमयू में इस केंद्र की स्वीकृति मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की है और इसके लिए बिहार सरकार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, उर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर और पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अनीता देवी के प्रति आभार व्यक्त किया है।

*प्रतिभाओं को मिलेगा अवसर*

कुलपति ने बताया कि यह केंद्र बिहार राज्य पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (बिहार स्टेट बैकवर्ड क्लासेज फाइनेंस एंड डेवलपमेंट काॅरपोरेशन) के अंतर्गत संचालित है। इसकी शुरुआत उच्च शैक्षणिक संस्थानों में शैक्षणिक पदों पर नियुक्ति में पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है। इसके तहत संबंधित प्रतियोगिता परीक्षाएं यथा- एनईटी, जेआरएफ, जीएटीई, पीएटी, पीएचडी आदि की परीक्षा पूर्व निःशुल्क प्रशिक्षण
(कोचिंग) दी जाएगी। इससे इस क्षेत्र की प्रतिभाओं को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे आने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने इस केंद्र की स्थापना के लिए निगम के प्रधान सचिव पंकज कुमार एवं विशेष सचिव डॉ. बिरेन्द्र प्रसाद यादव सहित सभी पदाधिकारियों को भी साधुवाद दिया है और विद्यार्थियों से अपील की है कि वे इस केंद्र का अधिकाधिक लाभ उठाएं।

*28 फरवरी, 2023 तक आवेदन आमंत्रित*

कुलसचिव डॉ. मिहिर कुमार ठाकुर ने बताया कि केंद्र में नामांकन हेतु 28 फरवरी, 2023 तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।आवेदन केंद्र या उप कुलसचिव स्थापना कार्यालय से नि: शुल्क प्राप्त किया जा सकता है अथवा निगम की वेबसाइट से डाउनलोड भी किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि फिलहाल यह केंद्र पुराने स्नातकोत्तर हिंदी विभाग में प्राक् प्रशिक्षण केंद्र के साथ चलेगा। विद्यार्थी यहां स्वयं आकर भी आवेदन जमा करा सकते हैं अथवा निबंधित डाक से भी आवेदन भेज सकते हैं। पता है- निदेशक, मुख्यमंत्री व्यावसायिक पाठ्यक्रम मार्गदर्शन एवं उत्प्रेरण केंद्र, पुरानी हिंदी विभाग, ओल्ड कैम्पस, भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, लालूनगर मधेपुरा-852113 (बिहार)।


*कुल 60 सीटों पर होगा नामांकन*
उप कुलसचिव (स्थापना) डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि केन्द्र में कुल 60 छात्र -छात्राओं का एक बैच (प्रशिक्षण अवधि 06 माह) संचालित कराया जाएगा। इसमें प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए कुल उपलब्ध सीटों (60) में से 40 प्रतिशत (24) पिछड़ा वर्ग तथा 60 प्रतिशत (36) अति पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए अनुमान्य होगा। अति पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं की अनुपलब्धता की स्थिति में पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं को एवं पिछड़ा वर्ग के
छात्र-छात्राओं की अनुपलब्धता की स्थिति में अति पिछड़ा वर्ग के छात्र- छात्राओं का नामांकन किया जाएगा। दोनों कोटियों में छात्राओं के लिए 33 प्रतिशत छैतिज आरक्षण अनुमान्य है।

उन्होंने बताया कि केंद्र में नामांकन के लिए विद्यार्थियों का चयन संबंधित परीक्षाओं के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम
के अनुरूप विषय के बहु-विकल्पीय लिखित परीक्षा या काउंसिलिंग के माध्यम से चयन किया
जाएगा। विद्यार्थियों की आयु सीमा एवं न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता संबंधित कोर्स के अंतर्गत होने वाली
प्रतियोगिता परीक्षा के लिए निर्धारित न्यूनतम अर्हता के अनुरूप होनी चाहिए।छात्र-छात्रा एवं उनके अभिभावक की कुल वार्षिक आय तीन लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए।

विभागाध्यक्ष नियुक्त

बीएनएमयू, मधेपुरा के दो स्नातकोत्तर विभागों में विभागाध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। दोनों के शनिवार को योगदान करने की संभावना है।

उप कुलसचिव (स्थापना) डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि जंतु विज्ञान विभाग के वरिष्ठतम प्रोफेसर डॉ. नरेंद्र श्रीवास्तव को विश्वविद्यालय जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वे डॉ. अरूण कुमार का स्थान लेंगे, जो 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हुए हैं। इधर, एम. एल. टी. कॉलेज, सहरसा के डॉ. शंभू प्रसाद सिंह को विश्वविद्यालय दर्शनशास्त्र का विभागाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वे सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष शोभाकांत कुमार का स्थान लेंगे।

समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष बने डॉ. राणा सुनील कुमार सिंह

एसएनआरकेएस कॉलेज, सहरसा के डॉ. राणा सुनील कुमार सिंह विश्वविद्यालय समाजशास्त्र विभाग के नए अध्यक्ष बनाए गए हैं। उन्होंने डॉ. कुलदीप कुमार का स्थान लिया है, जो 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हुए हैं।

डॉ. राणा ने शुक्रवार को कुलसचिव प्रो. मिहिर कुमार ठाकुर के समक्ष अपना योगदान समर्पित किया और कुलपति प्रो. आर. के. पी. रमण से भी शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर कुलानुशासक डॉ. बीएन विवेका, हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. उषा सिन्हा, विकास पदाधिकारी डॉ. ललन प्रसाद अद्री, पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. राजीव रंजन, आर. एम. कॉलेज, सहरसा में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कविता कुमारी, कुलपति के निजी सहायक शंभू नारायण यादव एवं उप कुलसचिव (स्थापना) डॉ. सुधांशु शेखर आदि उपस्थित थे।

उप कुलसचिव (स्थापना) डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि नवनियुक्त विभागाध्यक्ष डॉ. राणा का जन्म 9 जनवरी, 1962 को जमुई जिलांतर्गत मलयपुर ग्राम में हुआ है। इन्होंने तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर से प्रथम श्रेणी में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की और ‘भारत में कागज उद्योग के श्रमिक : सामाजिक-आर्थिक पहलू का एक अध्ययन’ विषय पर पीएचडी (1995) की उपाधि प्राप्त की।

उन्होंने बताया कि डॉ. राणा ने अपने शैक्षणिक कैरियर की शुरुआत 10 फरवरी, 1987 को एसएनआरकेएस कॉलेज, सहरसा में व्याख्याता के रूप में की थी। वे विगत तेरह साल से रमेश झा महिला महाविद्यालय, सहरसा में प्रतिनियोजित थे, जहां वे समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे।

उन्होंने बताया कि डॉ. राणा की तीन पुस्तकें ह्यूमेन अवेयरनेस इन कामन मास इन इंडिया, सोसल चेंज इंड इट्स प्रेस्पेक्टिव एवं सामाजिक शोध की पद्धति प्रकाशित हुई हैं। इन्होंने चार रिफ्रेशर कोर्स में भाग लिया है।

इनका 30 राष्ट्रीय सेमिनार में अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया। ये बिहार सोशियोलॉजिकल सोसायटी और इंडियन सोशियोलॉजिकल सोसायटी के आजीवन सदस्य भी हैं।

BNMU परीक्षा नियंत्रक बने डॉ. गजेन्द्र

परीक्षा नियंत्रक बने डॉ. गजेन्द्र
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बीएनएमयू के महाविद्यालय निरीक्षक (कला एवं वाणिज्य) डॉ. गजेन्द्र कुमार ने शुक्रवार को परीक्षा नियंत्रक का अतिरिक्त प्रभार ग्रहण किया। शुक्रवार को कुलसचिव प्रो. मिहिर कुमार ठाकुर के समक्ष अपना योगदान समर्पित किया और कुलपति प्रो. आर. के. पी. रमण से भी शिष्टाचार भेंट की। कुलपति ने डॉ. कुमार को शुभकामनाएं दीं और सत्र-नियमितिकरण हेतु हरसंभव कदम उठाने का निदेश दिया। डॉ. कुमार ने कहा कि वे विश्वविद्यालय प्रशासन की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की हरसंभव कोशिश करेंगे और पूर्व परीक्षा नियंत्रक के अधूरे कार्यों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा है कि वे सबको साथ लेकर कार्य करेंगे और छात्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे। उन्होंने सत्र नियमितीकरण को अपनी पहली प्राथमिकता बताते हुए इसमें सभी पदाधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से सहयोग की अपेक्षा की है।

इस अवसर पर पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. परमानंद यादव, डॉ. वैद्यनाथ, विकास पदाधिकारी डॉ. ललन प्रसाद अद्री, पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. राजीव रंजन, डॉ. उपेंद्र प्रसाद यादव, कुलपति के निजी सहायक शंभू नारायण यादव, डॉ. विनोद कुमार यादव एवं उप कुलसचिव (स्थापना) डॉ. सुधांशु शेखर आदि उपस्थित थे।

उप कुलसचिव (स्थापना) डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि डॉ. गजेन्द्र ने अपने शैक्षणिक कैरियर की शुरुआत 1985 ई. में बी. एन. एम. भी. कॉलेज, मधेपुरा से की। वहां से उनका वर्ष 2010 में ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा में तबादला हुआ। वे वहां इतिहास विभाग के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। वे महाविद्यालय के नोडल पदाधिकारी, परिसंपदा पदाधिकारी एवं उप प्रधानाचार्य और टाटा आयरन एंड स्टील हास्टल के अधीक्षक भी रहे हैं।

उन्होंने बताया कि डॉ. कुमार को वर्ष 2020 में विश्वविद्यालय के परिसंपदा पदाधिकारी की जिम्मेदारी दी गई थी। इस रूप में उन्होंने दिन रात एक कर काफी सराहनीय कार्य किया। पुनः उन्हें महाविद्यालय निरीक्षक (कला एवं वाणिज्य) की जिम्मेदारी मिली। इधर, गत 29 जनवरी की रात तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रो. आर. पी. राजेश के आकस्मिक निधन के बाद अगले आदेश अथवा नियमित नियुक्ति होने तक यह प्रभार प्रदान किया गया है।

उन्होंने बताया कि डॉ. कुमार की पहचान विश्वविद्यालय के लिए समर्पित पदाधिकारी के रूप में है और इन्हें आज तक जो भी जिम्मेदारी मिली है, उसका इन्होंने सफलतापूर्वक निर्वहन किया है। ऐसे में यह आशा व्यक्त की जा सकती है कि ये परीक्षा नियंत्रक के पद की चुनौतियों का भी बखूबी सामना करेंगे और विश्वविद्यालय को एक नई पहचान दिलाने में सफल हो सकेंगे।

BNMU ‘किडनीज ऑफ द लैंडस्केप’ है वेटलैंड्स

आर्द्रभूमि (वैटलैंड) में जल पर्यावरण और संबंधित पौधे एवं पशु जीवन को नियंत्रित करने वाला प्राथमिक कारक होता है।
यह स्थलीय एवं जलीय पारिस्थितिकी प्रणालियों के बीच की संक्रमणकालीन भूमि है। यहाँ जल आमतौर पर सतह पर होता है या भूमि उथले पानी से ढकी होती है।

यह बात जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. नरेंद्र श्रीवास्तव ने कही।

वे गुरुवार को अपने विभाग द्वारा आयोजित वर्ल्ड वैटलैंड डे कार्यक्रम में बोल रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन नार्थ कैम्पस के विज्ञान संकाय सभागार में मधेपुरा यूथ एसोसिएशन (माया) के सौजन्य से किया गया।

उन्होंने बताया कि भारत में सैकड़ों प्राकृतिक एवं कुछ कृत्रिम वैटलैंड भी हैं। ये वैटलैंड 12 लाख 50 हजार 361 हेक्टेयर क्षेत्र में वैटलैंड फैले हैं। इनमें से 64 वेटलैंड्स को विश्व स्तर पर रामसर कन्वेंशन से मान्यता प्राप्त है। आजादी के अमृत काल में इस संख्या को पचहत्तर करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने बताया कि 2 फरवरी 1971 को विश्व के विभिन्न देशों ने ईरान के रामसर में विश्व के वेटलैंड्स के संरक्षण हेतु एक संधि पर हस्ताक्षर किये थे, इसीलिये इस दिन विश्व वेटलैंड्स दिवस का आयोजन किया जाता है। वर्ष 2015 तक के आँकड़ों के अनुसार अब तक 169 दल रामसर कन्वेंशन के प्रति अपनी सहमति दर्ज़ करा चुके हैं जिनमें भारत भी एक है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में 2200 से अधिक वेटलैंड्स हैं, जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की वेटलैंड्स की रामसर सूची में शामिल किया गया है और इनका कुल क्षेत्रफल 2.1 मिलियन वर्ग किलोमीटर से भी अधिक है।

उन्होंने कहा कि वेटलैंड्स को ‘किडनीज ऑफ द लैंडस्केप’ (भू-दृश्य के गुर्दे) भी कहा जाता है। जिस प्रकार से हमारे शरीर में जल को शुद्ध करने का कार्य किडनी द्वारा किया जाता है, ठीक उसी प्रकार वेटलैंड का तंत्र जल-चक्र द्वारा जल को शुद्ध करता है और प्रदूषण अवयवों को निकाल देता है।

उन्होंने एक टीम के साथ पिछले हफ्ते घेलाड़ ब्लॉक में
दो वेस्टलैंड के किए गए सर्वे की विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि मधेपुरा के वैटलैंड अत्यधिक महत्वपूर्ण है। यह प्रवासी पक्षियों के आश्रय स्थल और मखाना की खेती की दृष्टि से काफी उपयोगी है।

उन्होंने बताया कि भारत सरकार भी वैटलैंड के संरक्षण पर जोर दे रही है और हाल ही में प्रस्तुत आम बजट में भी इसके लिए प्रावधान किया गया है।

कार्यक्रम में विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. नवीन कुमार ने कार्यक्रम के कुशल संचालन एवं कार्यक्रम के विषय वस्तु के चयन के लिए शुभकामना दीं। उन्होंने कहा कि वेटलैंड (आर्द्रभूमि) एक विशिष्ट प्रकार का पारिस्थितिकीय तंत्र है तथा जैव-विविधता का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। जलीय एवं स्थलीय जैव-विविधताओं का मिलन स्थल होने के कारण यहाँ वन्य प्राणी प्रजातियों व वनस्पतियों की प्रचुरता होने से वेटलैंड समृ़द्ध पारिस्थतिकीय तंत्र है।

रसायनशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार यादव ने कहा कि वैटलैंड का जलसंरक्षण एवं जैव विविधता की दृष्टि से काफी महत्व है। यह उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक जीवन में मानव जीवन को सबसे बड़ा खतरा जलवायु परिवर्तन से है और ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि हम अपनी जैव-विविधता का सरंक्षण करें।


जंतु विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार ने वेटलैंड की उपयोगिता और इस पर अवेयरनेस प्रोग्राम आयोजित करने की जरूरत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नमी या दलदली भूमि वाले क्षेत्र को आर्द्रभूमि या वेटलैंड (wetland) कहा जाता है। दरअसल वेटलैंड्स वैसे क्षेत्र हैं जहाँ भरपूर नमी पाई जाती है और इसके कई लाभ भी हैं।

वनस्पति विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ रमेश कुमार ने कहा कि विभाग को इस कार्यक्रम के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि विभाग और विश्वविद्यालय को समय-समय पर इस तरीके के आयोजन करते रहना चाहिए।

कार्यक्रम में वनस्पति विज्ञान के डॉ. बी. के. दयाल ने वेटलैंड के पारिस्थितिक तंत्र में उपयोगिता पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि आर्द्रभूमि जल को प्रदूषण से मुक्त बनाती है।


आर्द्रभूमि वह क्षेत्र है जो वर्ष भर आंशिक रूप से या पूर्णतः जल से भरा रहता है। भारत में आर्द्रभूमि ठंडे और शुष्क इलाकों से होकर मध्य भारत के कटिबन्धीय मानसूनी इलाकों और दक्षिण के नमी वाले इलाकों तक फैली हुई है।

वनस्पति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पंचानन मिश्रा ने वेटलैंड के एक्वेटिक एंड टेरेटेरियल इकोसिस्टम पर अपना विचार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का संचालन जंतु विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. बी. बी. मिश्रा ने की। धन्यवाद ज्ञापन माया के अध्यक्ष राहुल यादव ने किया।

इस अवसर पर डॉ. कामेश्वर कुमार, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. विमल सागर, डॉ. अबुल फजल, उप कुलसचिव (स्थापना ) डॉ. सुधांशु शेखर, माया के संरक्षक डॉ. अमिताभ, तुरबसु, प्रशांत, डॉ. राखी भारती, शोधार्थी आनंद कुमार, डेविड कुमार, सौरव कुमार, पूजा आनंद, अशोक केशरी, रविंद्र कुमार, भवानी सिंह आदि उपस्थित थे‌।

ICPR स्टडी सर्किल योजनान्तर्गत 10वां संवाद आयोजित* *भारतीय दर्शन में भारतीय क्या है विषय पर संवाद एवं परिचर्चा

*स्टडी सर्किल योजनान्तर्गत 10वां संवाद आयोजित*

*भारतीय दर्शन में भारतीय क्या है विषय पर संवाद एवं परिचर्चा*

भारतीय एवं पाश्चात्य दोनों ही दर्शनों में प्रमाणमीमांसा, तत्त्वमीमांसा एवं आचारमीमांसा विषयक विचार प्राप्त होते हैं। इस रूप में दोनों एक जैसे लगते हैं।

कुछ लोगों का यह भी मानना है कि जैसे विज्ञान भारतीय एवं पाश्चात्य नहीं होता है, वैसे ही दर्शन भी भारतीय एवं पाश्चात्य नहीं होता है। लेकिन यदि हम मूल विशेषताओं को देखें, तो भारतीय एवं पाश्चात्य दोनों दर्शन को एक जैसा नहीं मान सकते हैं।

यह बात भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् (आईसीपीआर), नई दिल्ली के सदस्य-सचिव प्रो. (डॉ.) सच्चिदानंद मिश्र ने कही।

वे बुधवार को भारतीय दर्शन में भारतीय क्या है विषयक संवाद में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन दर्शनशास्त्र विभाग, बीएनएमयू, मधेपुरा के तत्वावधान में आईसीपीआर, नई दिल्ली की स्टडी सर्किल योजनान्तर्गत किया गया।

उन्होंने कहा कि भारत के दार्शनिक एवं भारतीय दार्शनिक में अंतर है। किसी व्यक्ति के सिर्फ भारत में जन्म लेने मात्र से उनका दर्शन भारतीय दर्शन नहीं हो जाता है।

वस्तुत: भारतीय दर्शन को भारतीय बनाने वाली मुख्यता दो विशेषताएं हैं। एक यहां पर दर्शन समग्रता में विकसित होता है और दार्शनिक ज्ञान उद्देश्यपूर्ण है। लेकिन पश्चिमी दर्शन में ऐसी बात नहीं है।

उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन में ज्ञान केवल बौद्धिक विलास नहीं है, बल्कि यह मोक्ष या निर्वाण का साधन है। इसके विपरीत पश्चिमी दर्शन में दर्शन का कोई उद्देश्य नहीं है।

उन्होंने कहा कि भारत में व्यक्ति दर्शन के केन्द्र में नहीं है, अपितु विचार केन्द्रित है और यहां विचार के अनुरूप आचरण पर जोर दिया गया है।

भारत में दर्शन सम्प्रदाय के रूप में विकसित होते हैं। इस कारण दर्शनों में गम्भीरता रहती है और यह अधिक विकसित भी होता है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि दर्शनशास्त्र विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) के पूर्व अध्यक्ष सह अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) जटाशंकर ने कहा कि सत्य को समग्रता में देखता है।

इसमें लौकिक एवं पारलौकिक दोनों सत्यों की चर्चा है और प्रेय एवं श्रेय दोनों की प्राप्ति पर बल दिया गया है। यहां विभिन्न दर्शन भी एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि अनुपुरक हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता दर्शनशास्त्र विभाग, पटना विश्वविद्यालय, पटना के पूर्व अध्यक्ष सह आईसीपीआर, नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रमेशचंद्र सिन्हा ने कहा कि भारतीय दर्शन मात्र तार्किकता पर आधारित नहीं है, बल्कि यह आस्था एवं धर्म प्रधान है।

अतिथियों का स्वागत एवं कार्यक्रम का संचालन दर्शनशास्त्र विभाग, पटना विश्वविद्यालय, पटना की पूर्व अध्यक्ष सह दर्शन परिषद्, बिहार की अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) पूनम सिंह ने किया।

धन्यवाद ज्ञापन दर्शनशास्त्र विभाग, ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुधांशु शेखर ने की।

कार्यक्रम में विशेष रूप से टिप्पणी एवं प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन भी किया गया। इसमें स्वयं प्रिया, अरविंद, प्रताप निर्भय सिंह, अशोक, नोजीउल, डॉ. राजीव कुमार आदि ने प्रश्न पुछकर संवाद को जीवंत बनाया।
तकनीकी पक्ष शोधार्थी द्वय सौरभ कुमार चौहान एवं सारंग तनय ने संभाला।

इस अवसर पर पूर्व कुलपति प्रो. कुसुम कुमारी, प्रो. आशा मुदगल, डॉ. नीरज प्रकाश, निशा, अभिनंदन कुमार, निरंजन कुमार, आभा मिश्रा, अभिनंदन कुमार, अक्षय सिद्धांत, अहमद अर्चना कुमारी, अली अहमद, अशोक कुमार, अवनीश, शंकर, विनोदानंदन ठाकुर, देवेंद्र कुमार, दिलीप कुमार दिल, माधव कुमार, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. अरुण कुमार सिन्हा, डॉ. प्रमोद कुमार सिंह, प्रतिभा झा, डॉ. राजीव, रंजन झा, यशवंत कुमार झा, गौतम कुमार, गौरव कुमार सिंह, संजय दुबे, आनंद, सागर प्रकाश कुमार, हिना, डॉ. हेमकांत पंडित, डॉ. हिमांशु शेखर सिंह, रंजन कुमार, जयप्रकाश कुमार, जूही कुमारी, ज्योति कुमारी, मीना कुमार, केशव कुमार, वैष्णव, आरती कुमारी, ललित कुमार, मनीष पाठक, मनोज कुमार, राजकिशोर सिंह, नवीन कुमार आदि उपस्थित थे।

*जानेमाने दार्शनिक हैं डॉ. सच्चिदानंद मिश्र*
डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि संवाद के मुख्य वक्ता भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् (आईसीपीआर), नई दिल्ली के सदस्य-सचिव प्रो. (डॉ.) सच्चिदानंद मिश्र का नाम देश के जानेमाने दार्शनिकों में शूमार हैं। इन्हें 2009 के लिए महर्षि बादरायण व्यास सम्मान (राष्ट्रपति पुरस्कार) और 2012 में सोरबोन नोबेल विश्वविद्यालय, पेरिस में प्रतिष्ठित संस्कृत चेयर के लिए आईसीसीआर द्वारा चुने जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि डॉ. मिश्रा वर्ष 2010 से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में दर्शनशास्त्र एवं धर्म के प्रोफेसर हैं। इन्होंने भारतीय तर्कशास्त्र एवं ज्ञानमीमांसा, नव्य-न्याय एवं अद्वैत वेदांत, शुद्धा-द्वैत वेदांत, कश्मीरी शैव दर्शन एवं भारतीय सौंदर्य-शास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इन्होंने लगभग एक दर्जन पुस्तकों का लेखन एवं संपादन किया है।‌ विभिन्न पत्रिकाओं में इनके 50 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हैं। इन्होंने दर्जनों सेमिनार, सम्मेलनों, कार्यशालाओं एवं विशेष व्याख्यान कार्यक्रमों में विशेषज्ञ वक्ता के रूप में भाग लिया है।

*हो चुके हैं नौ संवाद*
आयोजन सचिव डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि बीएनएमयू, मधेपुरा में अप्रैल 2022 से स्टडी सर्किल कार्यक्रम की शुरुआत हुई है। इसके अंतर्गत सांस्कृतिक स्वराज, गीता का दर्शन, मानवता के लिए योग, भारतीय दर्शन में जीवन-प्रबंधन, प्रौद्योगिकी एवं समाज, समाज- परिवर्तन का दर्शन, गांधीवाद : सिद्धांत एवं प्रयोग, युवाओं के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश एवं वैदिक दर्शन का मानवतावादी दृष्टिकोण विषयक संवाद हो चुके हैं। इन संवादों के वक्ता क्रमशः प्रो. रमेशचन्द्र सिन्हा (नई दिल्ली), प्रो. जटाशंकर, (प्रयागराज), प्रो. एन. पी. तिवारी (पटना), प्रो. इंदु पांडेय खंडुरी (गढ़वाल), डॉ. आलोक टंडन (हरदोई), प्रो. पूनम सिंह (पटना), डॉ. मनोज कुमार (वर्धा), माधव तुरूमेला (लंदन) एवं डॉ. गोविन्द शरण उपाध्याय (नेपाल) थे। इसी कड़ी में दसवां (इस वर्ष का पहला) संवाद बुधवार को सुनिश्चित है।

*मार्च 2023 तक चलेगा कार्यक्रम*
उन्होंने बताया कि आगे स्टडी सर्किल के अंतर्गत 28 फरवरी, 2023 को सुप्रसिद्ध दार्शनिक एवं पूर्व प्रति कुलपति प्रो. (डॉ.) सभाजीत मिश्र (गोरखपुर) का और मार्च में सुप्रसिद्ध लेखिका एवं पूर्व कुलपति प्रो. (डॉ.) नीलिमा सिन्हा (बोधगया) का व्याख्यान होगा। विषयों का निर्धारण दोनों वक्ताओं की सहमति से किया जाएगा।

ICPR स्टडी सर्किल योजनान्तर्गत आनलाइन संवाद में जुड़ें

*स्टडी सर्किल योजनान्तर्गत आनलाइन संवाद में जुड़ें*

दर्शनशास्त्र विभाग, बीएनएमयू, मधेपुरा के तत्वावधान में 25 जनवरी (बुधवार) को अ. 4 बजे से भारतीय दर्शन में भारतीय क्या है विषयक संवाद एवं परिचर्चा आयोजित है। यह भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् (आईसीपीआर), नई दिल्ली के स्टडी सर्किल योजनान्तर्गत 10वां आयोजन है। आयोजन सचिव डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि कार्यक्रम का आफलाइन सत्र टी. पी. कालेज, मधेपुरा में और आनलाइन गूगल मीट प्लेटफार्म पर आयोजित होगा।‌

*आईसीपीआर के पूर्व अध्यक्ष करेंगे अध्यक्षता*
डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि कार्यक्रम कार्यक्रम का आमंत्रण पत्र जारी कर दिया गया है। तदनुसार इसकी अध्यक्षता दर्शनशास्त्र विभाग, पटना विश्वविद्यालय, पटना के पूर्व अध्यक्ष सह आईसीपीआर, नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रमेशचंद्र सिन्हा करेंगे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि दर्शनशास्त्र विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) के पूर्व अध्यक्ष सह अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) जटाशंकर होंगे। अतिथियों का स्वागत दर्शनशास्त्र विभाग, पटना विश्वविद्यालय, पटना की पूर्व अध्यक्ष सह दर्शन परिषद्, बिहार की अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) पूनम सिंह करेंगी। कार्यक्रम में विशेष रूप से टिप्पणी एवं प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन भी किया जाएगा।

*जानेमाने दार्शनिक हैं डॉ. सच्चिदानंद मिश्र*

डॉ. शेखर ने बताया कि संवाद के मुख्य वक्ता भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् (आईसीपीआर), नई दिल्ली के सदस्य-सचिव प्रो. (डॉ.) सच्चिदानंद मिश्र का नाम देश के जानेमाने दार्शनिकों में शूमार है। इन्हें 2009 के लिए महर्षि बादरायण व्यास सम्मान (राष्ट्रपति पुरस्कार) और 2012 में सोरबोन नोबेल विश्वविद्यालय, पेरिस में प्रतिष्ठित संस्कृत चेयर के लिए आईसीसीआर द्वारा चुने जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि डॉ. मिश्रा वर्ष 2010 से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में दर्शनशास्त्र एवं धर्म के प्रोफेसर हैं। इन्होंने भारतीय तर्कशास्त्र एवं ज्ञानमीमांसा, नव्यन्याय एवं अद्वैत वेदांत, शुद्धा-द्वैत वेदांत, कश्मीरी शैव दर्शन एवं भारतीय सौंदर्य-शास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इन्होंने लगभग एक दर्जन पुस्तकों का लेखन एवं संपादन किया है।‌ विभिन्न पत्रिकाओं में इनके 50 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हैं। इन्होंने दर्जनों सेमिनार, सम्मेलनों, कार्यशालाओं एवं विशेष व्याख्यान कार्यक्रमों में विशेषज्ञ वक्ता के रूप में भाग लिया है।

सादर आमंत्रण
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https://meet.google.com/zkt-fqqj-ctb

कृपया,
25 जनवरी, 2023 (बुधवार) को अ. 04 : 00 बजे से 06 : 00 बजे तक हमसे *ऑनलाइन* संवाद एवं प्रश्नोत्तर कार्यक्रम में जुड़ें।

विषय : *भारतीय दर्शन में भारतीय क्या है?*

*ऑनलाइन लिंक* :
https://meet.google.com/zkt-fqqj-ctb

Jannayak छात्रावास में याद किए गए जननायक कर्पूरी ठाकुर

छात्रावास में याद किए गए जननायक कर्पूरी ठाकुर
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जननायक कर्पूरी ठाकुर सादा जीवन एवं उच्च विचार के प्रतिक थे। उनके कार्यों एवं विचारों को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

यह बात मधेपुरा के जिला कल्याण पदाधिकारी ने कही। वे मंगलवार को जननायक कर्पूरी ठाकुर की सौवीं जयंती पर आयोजित समारोह में उद्घाटन कर्ता के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन जननायक कर्पूरी ठाकुर छात्रावास, मधेपुरा कालेज, मधेपुरा में किया गया।

उन्होंने कहा कि कर्पूरी के जीवन में टीम वर्क देखने को मिलता है। हम उससे प्रेरणा लें और अपने समाज एवं राष्ट्र के लिए कुछ करें।

उन्होंने छात्रावास के विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे सरकारी सुविधाओं का बेहतर इस्तेमाल करें और अच्छा रिजल्ट दें। सरकार एवं जिला प्रशासन की ओर से आवश्यक सुवाधाओं में कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि मधेपुरा में जननायक कर्पूरी ठाकुर छात्रावास के अलावा राजकीय अंबेडकर कल्याण छात्रावास भी है। साथ ही परिसर में लंबे समय से प्राप्त प्रशिक्षण केंद्र कार्य कर रहा है। वहां मुख्यमंत्री परामर्श एवं प्रशिक्षण केंद्र की भी स्वीकृति मिल गई है। इस केंद्र के माध्यम से विद्यार्थियों को एनईटी एवं पीएचडी आदि की तैयारी कराई जाएगी।

के. पी. कालेज, मुरलीगंज के प्रधानाचार्य डॉ. जवाहर पासवान ने कहा कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। जो लोग मानवता के लिए जीते हैं, उन्हीं का जीवन सही मायने में सार्थक होता है।

उप कुलसचिव (स्थापना) डॉ. सुधांशु शेखर ने कहा फिल्म स्टार एवं क्रिकेटर समाज के असली रोल माडल नहीं हैं। असली रोल माडल गांधी, अंबेडकर एवं कर्पूरी जैसे लोग हैं। हमारे कमरे में इनकी किताबें एवं तस्वीरें होनी चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थापक प्रधानाचार्य डॉ. डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने पिछड़े समाज को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस जिले में कर्पूरी छात्रावास का होना गौरव की बात है। विद्यार्थ इसकी सुविधाओं का लाभ लें और जीवन में सफलता प्राप्त करें।

सर्वप्रथम कर्पूरी ठाकुर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित करछात्रावास में याद किए गए जननायक कर्पूरी ठाकुर
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जननायक कर्पूरी ठाकुर सादा जीवन एवं उच्च विचार के प्रतिक थे। उनके कार्यों एवं विचारों को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

यह बात मधेपुरा के जिला कल्याण पदाधिकारी रामकृपाल प्रसाद ने कही। वे मंगलवार को जननायक कर्पूरी ठाकुर की सौवीं जयंती पर आयोजित समारोह में उद्घाटन कर्ता के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन जननायक कर्पूरी ठाकुर छात्रावास, मधेपुरा कालेज, मधेपुरा में किया गया।

उन्होंने कहा कि कर्पूरी के जीवन में टीम वर्क देखने को मिलता है। हम उससे प्रेरणा लें और अपने समाज एवं राष्ट्र के लिए कुछ करें।

उन्होंने छात्रावास के विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे सरकारी सुविधाओं का बेहतर इस्तेमाल करें और अच्छा रिजल्ट दें। सरकार एवं जिला प्रशासन की ओर से आवश्यक सुवाधाओं में कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि मधेपुरा में जननायक कर्पूरी ठाकुर छात्रावास के अलावा राजकीय अंबेडकर कल्याण छात्रावास भी है। साथ ही परिसर में लंबे समय से प्राप्त प्रशिक्षण केंद्र कार्य कर रहा है। वहां मुख्यमंत्री परामर्श एवं प्रशिक्षण केंद्र की भी स्वीकृति मिल गई है। इस केंद्र के माध्यम से विद्यार्थियों को एनईटी एवं पीएचडी आदि की तैयारी कराई जाएगी।

के. पी. कालेज, मुरलीगंज के प्रधानाचार्य डॉ. जवाहर पासवान ने कहा कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। जो लोग मानवता के लिए जीते हैं, उन्हीं का जीवन सही मायने में सार्थक होता है।

उप कुलसचिव (स्थापना) डॉ. सुधांशु शेखर ने कहा फिल्म स्टार एवं क्रिकेटर समाज के असली रोल माडल नहीं हैं। असली रोल माडल गांधी, अंबेडकर एवं कर्पूरी जैसे लोग हैं। हमारे कमरे में इनकी किताबें एवं तस्वीरें होनी चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थापक प्रधानाचार्य डॉ. डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने पिछड़े समाज को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस जिले में कर्पूरी छात्रावास का होना गौरव की बात है। विद्यार्थ इसकी सुविधाओं का लाभ लें और जीवन में सफलता प्राप्त करें।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अतिथियों का अंगवस्त्रम्, पुष्पगुच्छ एवं पार्क से स्वागत किया गया।अतिथियों का अंगवस्त्रम्, पुष्पगुच्छ एवं पार्क से स्वागत किया गया। सबों ने कर्पूरी ठाकुर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। संचालन छात्रावास अधीक्षक डॉ. अभय कुमार किय। धन्यवाद ज्ञापन छात्र नायक नीरज कुमार ने किया।
इस अवसर पर भूगोल विभाग के विवेकानंद कुमार माया के अध्यक्ष राहुल यादव, शोधार्थी सौरभ कुमार चौहान, प्रवीण कुमार, विनीत कुमार योगेश कुमार विकास कुमार दीपक कुमार धीरज कुमार राहुल कुमार प्रभात रंजन आकाश कुमार प्रवीण कुमार सुमित कुमार ठाकुर सिकंदर कुमार सुनील कुमार धीरज कुमार सुमित कुमार सोनू कुमार बालकृष्ण कुमार प्रिंस राजा कुमार रोहित कुमार धर्मेंद्र कुमार विजय कुमार साह संतोष कुमार, अजीत कुमार राहुल कुमार मनीष कुमार गुड्डू कुमार नीतीश कुमार आनंद कुमार घनश्याम कुमार कुमार साह आदि उपस्थित थे।