Home Blog

BNMU नवनियुक्त कुलसचिव डाॅ. मिहिर कुमार ठाकुर को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ

0

नवनियुक्त कुलसचिव डाॅ. मिहिर कुमार ठाकुर को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ

 

BNMU के. पी. काॅलेज, मुरलीगंज में मनाया गया योग दिवस

0

21 जून 2021 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर के .पी महाविद्यालय मुरलीगंज के एनएसएस इकाई द्वारा योग दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रोफेसर डॉ. राजीव रंजन ने की।

संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए योग आवश्यक है। वैश्विक महामारी के इस दौर में कोरोना के कारण पूरे देश में चिंता और भय का वातावरण बना हुआ है। इस विषम परिस्थिति में वर्तमान समय में योग की भूमिका और भी अधिक बढ़ जाती है। योग स्वस्थ रहने के साथ-साथ तनाव मुक्त रहने में भी मदद करता है। भाग-दौड़ की जिंदगी में हर व्यक्ति तनाव व चिंता से ग्रसित है। इसलिए मानव योग करके ही निरोग रह सकता है।विश्व योग दिवस प्रति वर्ष 21 जून को मनाया जाता है ।यह दिन वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है और योग भी मनुष्य को दीर्घ जीवन प्रदान करता है।

महाविद्यालय के एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. अमरेंद्र कुमार ने कहां की 2021 में आयोजित यह सातवां विश्व योग दिवस है। इस बार योग दिवस की थीम”योग फोर वैलनेस”है। इस अवसर पर एनएसएस पदाधिकारी के नेतृत्व में महाविद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मियों के द्वारा योगाभ्यास किया गया।


इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षक श्री महेंद्र मंडल, डॉ. शिवा शर्मा, डॉ. चंद्रशेखर आजाद, डॉ. प्रतीक कुमार, डॉ. त्रिदेव निराला, डॉ. सिकंदर कुमार, डॉ. अरुण कुमार साह, डॉ. सज्जाद अख्तर, प्रधान सहायक नीरज कुमार निराला, देवाशीष देव, गजेंद्र दास, प्रभाकर मंडल, अभिषेक कुमार, रात्रि प्रहरी नीरज कुमार, सिंटू, महेश राम, संत कुमार, अभिमन्यु कुमार, सूरज मल्लिक आदि उपस्थित थे

BNMU अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन। योग विश्व को भारत की बहुमूल्य देन है : कुलपति। योग ही है संपूर्ण स्वास्थ्य की प्राप्ति का श्रेयष्कर मार्ग : प्रति कुलपति

0

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन।
कुलपति एवं प्रति कुलपति भी शामिल
—-

योग हमारे शरीर, मन एवं आत्मा के बीच समन्वय स्थापित करता है। इसके माध्यम से हम दीर्घकाल तक निरोगी जीवन जी सकते हैं और भौतिक एवं आध्यात्मिक उन्नति के शिखर पर पहुंच सकते है। यह बात बीएनएमयू कुलपति प्रोफेसर डाॅ. आर. के. पी. रमण ने कही।

वे सोमवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में आयोजित योगाभ्यास कार्यक्रम का उद्घाटन कर रहे थे।

कुलपति ने कहा कि योग विश्व को भारत की बहुमूल्य देन है। आज पूरी दुनिया योग की ओर आकर्षित है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस योग की वैश्विक महत्ता का प्रमाण है।

कुलपति ने बताया कि वे नियमित रूप से योगाभ्यास करते हैं और इसका उनके व्यक्तिगत जीवन में काफी लाभ हुआ है। आज कोरोनाकाल में योग की महत्ता एवं उपयोगिता और भी बढ़ गई है।

कुलपति ने कहा कि योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए भारत सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बधाई एवं प्रशंसा के पात्र हैं। प्रधानमंत्री के ही प्रस्ताव पर 2015 से वैश्विक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की शुरूआत हुई है। विश्वविद्यालय स्तर पर भी प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में योग दिवस मनाया जाता रहा है। विश्वविद्यालय में पीजी डिप्लोमा इन योगा कोर्स भी शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

प्रति कुलपति प्रोफेसर डाॅ. आभा सिंह ने कहा कि योग एकात्म का बोध कराता है। यह शरीर को मन से, आत्मा को परमात्मा से और व्यष्टि को समष्टि से जोड़ता है। योग भारतीय दर्शन, संस्कृति एवं परंपरा में आदिकाल से शामिल है। महर्षि पतंजलि के हजारों वर्ष पूर्व भी भारत में योग की विभिन्न पद्धतियों का उल्लेख मिलता है।

प्रति कुलपति ने कहा कि दुनिया में रोगमुक्ति को दो अर्थ में लिया जाता है। जब हम रोगी हों, तो हमारे इलाज की व्यवस्था हो जाए, यह नकारात्मक अर्थ है। लेकिन हम पहले से वैसा उपाय करें कि हमें कभी रोग हो ही नहीं, यह सकारात्मक अर्थ है। योग इसी सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ सदियों से मानवता के लिए वरदान की तरह है। भारतीय ॠषि-मुनि योग के इस महात्म्य को जानते थे और वे योगशक्ति के बल पर दीर्घजीवी होते थे।

प्रति कुलपति ने कहा कि आज कोरोनाकाल में यह साबित हो गया कि अस्पताल खोलकर संसार को रोगमुक्त करना दुष्कर है। आज आमेरिका जैसे विकसित देश भी सभी लोगों को समुचित चिकित्सीय सुविधा नहीं दे पाए। अतः यह साबित हो गया कि योग ही संपूर्ण स्वास्थ्य की प्राप्ति का श्रेयष्कर मार्ग है, जो पहले से ही रोग को आने से रोकने का उपाय सुझाता है।

योग शिक्षिका डाॅ. सपना जायसवाल ने कहा कि योग करेंगे, तो कोरोना से बचेंगे। सांस लेने में कठिनाई नहीं होगी और कभी ऑक्सिजन सिलिंडर भी नहीं लगेगा।

एनएसएस समन्वयक डाॅ. अभय कुमार ने कहा किइस वर्ष 7वां योग दिवस दिवस का थीम ‘योग के साथ रहें, घर पर रहें’ है। इस थीम के अनुरूप सोशल डिस्टेंशिंग का पालन करते हुए योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इसके पूर्व दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरूआत की गई। कुलपति के सानिध्य एवं योग शिक्षिका के मार्गदर्शन में सबों ने योगाभ्यास किया। विभिन्न योगासनों के अलावा कपालभाति, भ्रामरी आदि प्राणायामों का अभ्यास किया गया।

इस अवसर पर वित्तीय परामर्शी नरेंद्र प्रसाद सिन्हा, कुलानुशासक डाॅ. विश्वनाथ विवेका, डाॅ. अशोक कुमार यादव, डाॅ. अभय कुमार, डाॅ. नरेश कुमार, डाॅ. सुधांशु शेखर, डाॅ. पवन कुमार, डाॅ. दीनानाथ मेहता, बी. पी. यादव, आरपीएम काॅलेज के डाॅ. एन. के. निराला, डाॅ. अरूण कुमार यादव, वैद्यनाथ यादव, मीना देवी, साक्षी कुमारी, डाॅली कुमारी, करिश्मा कुमारी, शांतनु यदुवंशी, अंकेश कुमार आदि उपस्थित थे।

BNMU स्नातक प्रथम खंड का परीक्षाफल प्रकाशित

0

स्नातक प्रथम खंड का परीक्षाफल प्रकाशित

बीएनएमयू, मधेपुरा के स्नातक प्रथम खंड 2020 का परीक्षाफल प्रकाशित कर दिया गया है। इसमें कुल 35 हजार 335 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। इनमें से 34 हजार 940 परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए हैं और मात्र 395 अनुत्तीर्ण हुए हैं। उत्तीर्ण परीक्षार्थियों में से 28 हजार 398 प्रतिष्ठा के साथ उत्तीर्ण हुए हैं और 4 हजार 21 प्रमोटेड हुए हैं। परीक्षाफल की खास बात यह है कि मात्र 158 परीक्षार्थियों का परीक्षाफल पेंडिंग है। यह भी परीक्षार्थियों के द्वारा गलत विषय समूह चुनने के कारण हुआ है। विद्यार्थियों से आवेदन मिलने के बाद इस समस्या का समाधान किया जाएगा।

जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि वर्ष-2021 के लाॅकडाउन में भी विश्वविद्यालय द्वारा 7वाँ परीक्षाफल प्रकाशित किया गया है। इसके पूर्व 5 जून को स्नातकोत्तर प्रथम सेमस्टर सीबीसीएस दिसंबर 2018 और 18 मई को स्नातक तृतीय खंड 2020 का परीक्षाफल प्रकाशित किया गया था। इन विपरीत परिस्थितियों में भी हजारों विद्यार्थियों का परीक्षाफल प्रकाशित करने के लिए पूरा परीक्षा विभाग बधाई का पात्र है।

डॉ. शेखर ने बताया कि कोरोनाकाल में भी कुलपति प्रोफेसर डाॅ. राम किशोर प्रसाद रमण एवं प्रति कुलपति प्रोफेसर डाॅ. आभा सिंह लगातार विश्वविद्यालय में सत्र-नियमितिकरण हेतु प्रयासरत हैं। इसी कड़ी में परीक्षा नियंत्रक डाॅ. नवीन कुमार एवं उप कुलसचिव (परीक्षा) शशिभूषण छात्रहित में दिनरात अथक परिश्रम कर लगातार परीक्षाफल प्रकाशन का कार्य पूरा करा रहे हैं। इसमें सभी टेबलेटरों तथा परीक्षा विभाग एवं कम्प्यूटर सेल के सभी कर्मचारियों का योगदान भी सराहनीय है।

BNMU डॉ. शंकर कुमार मिश्र बने दो जर्नल्स के संपादक सौजन्य मंडल के सदस्य

0

बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर एवं बीपीएससी सेलेक्टेड टीचर्स फोरम के उपाध्यक्ष डॉ. शंकर कुमार मिश्र को दो महत्वपूर्ण जर्नल का संपादक सौजन्य मंडल का सदस्य बनाया गया है। ये जर्नल हैं- ‘बिहार का आर्थिक परिदृश्य’ और ‘अनुचिंतन विमर्श’।

दोनों आर्थिक, सामाजिक, मानविकी एवं पर्यावरणीय विषयों से जुड़ी शोध पत्रिका है। दोनों का आईएसएसएन नंबर क्रमशः 0974-9969 तथा 0976-2671 है। दोनों जर्नल्स के प्रधान संपादक सुप्रसिद्ध शिक्षाविद् प्रोफेसर डॉ. ए. डी. एन. बाजपेई और संपादक अर्थशास्त्र विभाग, ए. एस. कॉलेज, देवघर (झारखंड) के डॉ. अनिल ठाकुर हैं।

डॉ. मिश्र जुलाई 2017 से बीएनएमयू, मधेपुरा में कार्य कर रहे हैं। इसके पूर्व वे कोशी काॅलेज, खगड़िया में अतिथि व्याख्याता एवं यूवीके कॉलेज, करामा में भी व्याख्याता रह चुके हैं। इनकी तीन पुस्तकें पर्सनालिटी एडजेस्टमेंट, साइकोलॉजी ऑफ लोनलीनेस, केस स्टडी ऑफ इंटरेक्शन एण्ड अल्कोहल, अल्कोहलिज्म एंड द नूरल कोरिलेट ऑफ इमोशन प्रकाशित हैं। इन्होंने कई स्मारिकाओं का संपादन किया है। इनके राष्ट्रीय जर्नल में 15 और अंतरराष्ट्रीय जर्नल में एक आलेख प्रकाशित हैं। ये करीब 28 राष्ट्रीय सेमिनारो में अपना आलेख प्रस्तुत कर चुके हैं।

संप्रति डाॅ. मिश्र पीजी इकाई, राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम पदाधिकारी तथा विश्वविद्यालय क्रीड़ा एवं सांस्कृतिक परिषद् के संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं।

BNMU अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में होगा राष्ट्रीय व्याख्यानमाला, आयोजन हेतु आईसीपीआर से मिला अनुदान

0

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में होगा राष्ट्रीय व्याख्यानमाला, आयोजन हेतु आईसीपीआर से मिला अनुदान
—-

योग विश्व को भारत की बहुमूल्य देन है और आज इसे पूरी दुनिया स्वीकार कर रही है। इसी कड़ी में योग की महत्ता को वैश्विक स्तर पर प्रचारित-प्रसारित करने के लिए प्रत्येक वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन हेतु शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् (आईसीपीआर), नई दिल्ली विभिन्न संस्थानों को अनुदान भी देती है। इसी कड़ी में इस वर्ष स्नातकोत्तर दर्शनशास्त्र विभाग, बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा को भी राष्ट्रीय व्याख्यान-माला के आयोजन हेतु सत्रह हजार रूपए अनुदान प्राप्त हुआ है।

*दर्शनशास्त्र विभाग में पहली बार होगा यह आयोजन*

दर्शनशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर सह जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने बताया कि विश्वविद्यालय को आईसीपीआर से योग दिवस मनाने हेतु पहली बार अनुदान मिला है और इस संदर्भ में कार्यक्रम पदाधिकारी डाॅ. सरोज कांत कार ने ई. मेल के माध्यम से उन्हें सूचना दी है।

डाॅ. शेखर ने बताया कि इस वर्ष 7वां योग दिवस दिवस का थीम ‘योग के साथ रहें, घर पर रहें’ है। इस थीम के अनुरूप आईसीपीआर से प्राप्त अनुदान राशि से योग के विभिन्न पहलुओं और इसकी महत्ता के संबंध में ऑनलाइन राष्ट्रीय व्याख्यान-माला का आयोजन किया जाएगा। इसके अंतर्गत देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के चार प्रतिष्ठित विद्वानों का व्याख्यान होगा। इनमें अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के अध्यक्ष प्रोफेसर डाॅ. जटाशंकर (इलाहाबाद), भारतीय महिला दार्शनिक परिषद् की अध्यक्ष प्रोफेसर डाॅ. राजकुमारी सिन्हा (राँची), हेमवतीनंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर-गढ़वाल की प्रोफेसर डाॅ. इंदु पाण्डेय खंडूरी और नवनालंदा महाविहार, नालंदा के प्रोफेसर डाॅ. सुशीम दुबे के नाम शामिल हैं। इन चारों विद्वानों से बातचीत कर व्याख्यानों की तिथि सुनिश्चित की जाएगी।

*कुलपति करेंगे अध्यक्षता*

ऑनलाइन राष्ट्रीय व्याख्यान-माला का उद्घाटन भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. रमेशचंद्र सिन्हा करेंगे। बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के कुलपति प्रोफेसर डाॅ. आर. के. पी. रमण कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे और प्रति कुलपति प्रोफेसर डाॅ. आभा सिंह मुख्य अतिथि होंगी।

*नैक मूल्यांकन में मदद*

डाॅ. शेखर ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हेतु आईसीपीआर से अनुदान मिलना विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है। इस आयोजन से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ेगा और इससे नैक मूल्यांकन में भी मदद मिलेगी।

*पहले भी मिला था अनुदान*

मालूम हो कि स्नातकोत्तर दर्शनशास्त्र विभाग को आईसीपीआर, नई दिल्ली से पहले भी अन्य आयोजनों के लिए अनुदान मिल चुका है। आईसीपीआर के अनुदान से ही कुछ दिनों पूर्व 25 मार्च, 2021 को विश्व दर्शन दिवस पर तीन व्याख्यानों का आयोजन किया गया था। इसके पूर्व 30 अगस्त, 2019 को आयोजित भारतीय दार्शनिक दिवस के लिए भी अनुदान प्राप्त हुआ था। बीएनएमयू, मधेपुरा जैसे साधनविहीन विश्वविद्यालय को विभिन्न आयोजनों के लिए अनुदान स्वीकृत करने हेतु आईसीपीआर के अध्यक्ष सुप्रसिद्ध दार्शनिक प्रोफेसर डाॅ. रमेशचंद्र सिन्हा एवं सदस्य-सचिव प्रोफेसर डाॅ. सच्चिदानंद मिश्र साधुवाद के पात्र हैं।

*प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिया था प्रस्ताव*

डाॅ. शेखर ने बताया कि योग भारत की प्राचीन परम्परा का एक बहुमूल्य उपहार है। यह महज एक व्यायाम नहीं है। यह मन एवं शरीर की एकता और मनुष्य एवं प्रकृति के बीच सामंजस्य का प्रतीक है। आज कोरोनाकाल में योग की महत्ता एवं उपयोगिता और भी बढ़ गई है। योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए भारत सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बधाई एवं प्रशंसा के पात्र हैं। प्रधानमंत्री के ही प्रस्ताव पर 2015 से वैश्विक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की शुरूआत हुई है। विश्वविद्यालय स्तर पर भी प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में योग दिवस मनाया जाता रहा है। लेकिन वर्ष 2021 में पहली बार दर्शनशास्त्र विभाग के तत्वावधान में योग दिवस के उपलक्ष्य में एक राष्ट्रीय आयोजन होगा।

*बीएनएमयू भी भारत सरकार के साथ*

डाॅ. शेखर ने बताया कि भारत सरकार की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 सितम्बर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की जरूरत बताई थी। उनके प्रस्ताव पर 11 दिसम्बर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र के 177 सदस्यों द्वारा 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने को मंजूरी मिली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस प्रस्ताव को 90 दिन के अंदर पूर्ण बहुमत से पारित किया गया। यह संयुक्त राष्ट्र संघ में किसी दिवस प्रस्ताव के लिए सबसे कम समय का एक रिकार्ड है, जो योग की वैश्विक स्वीकार्यता का भी द्योतक है। भारत सरकार और आईसीपीआर भी दर्शनशास्त्र और योग को लोकप्रिय बनाने के लिए निरंतर सक्रिय है। इसमें बीएनएमयू, मधेपुरा भी भारत सरकार एवं आईसीपीआर के साथ है।

BNMU एक समान विकास शुल्क के निर्धारण हेतु समिति का गठन

0

*एक समान विकास शुल्क के निर्धारण हेतु समिति का गठन*

बीएनएमयू, मधेपुरा में एक समान विकास शुल्क के निर्धारण पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। इस संबंध में विद्वत परिषद् की बैठक 23.12. 2020 की का. सं. 19 में लिए गए निर्णय के आलोक में विभिन्न पहलुओं का गहन अध्ययन कर समुचित सुझाव देने हेतु एक समिति का गठन किया गया है।

जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने बताया कि समिति में प्रति कुलपति डाॅ. आभा सिंह अध्यक्ष और वित्त पदाधिकारी रामबाबू महतो सदस्य-सचिव बनाए गए हैं। वित्तीय परामर्शी नरेंद्र प्रसाद सिन्हा, डीएसडब्लू डाॅ. अशोक कुमार यादव, निदेशक (अकादमिक) डाॅ. एम. आई. रहमान, निदेशक (आईक्यूएसी) डाॅ. मोहित कुमार घोष, सीसीडीसी डाॅ. इम्तियाज अंजूम, विकास पदाधिकारी डाॅ. गजेंद्र कुमार एवं कुलसचिव डाॅ. कपिलदेव प्रसाद इसके सदस्य बनाए गए हैं।

समिति में चार अंगीभूत महाविद्यालयों और तीन सम्बद्ध महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों को भी स्थान दिया गया है।

इनमें अंगीभूत महाविद्यालयों से डाॅ. के. पी. यादव (टी. पी. काॅलेज, मधेपुरा), डाॅ. राजीव सिन्हा (पी. एस. काॅलेज, मधेपुरा), डाॅ. संजीव कुमार (बी. एस. एस. काॅलेज, सुपौल) एवं डाॅ. सूर्यमणि कुमार (आर. जे. एम. काॅलेज, सहरसा) को समिति में स्थान दिया गया है।

संबद्ध महाविद्यालयों से डाॅ. अशोक कुमार यादव (मधेपुरा काॅलेज, मधेपुरा), डाॅ. माधवेन्द्र झा (यूभीके काॅलेज, कड़ामा-मधेपुरा) एवं डाॅ. जयदेव प्रसाद यादव (ए. एल. वाई. काॅलेज, त्रिवेणीगंज-सुपौल) को समिति में शामिल किया गया है।

डाॅ. शेखर ने बताया कि समिति से निदेशानुसार संबंधित मामलों के सभी पहलुओं का गहन अध्ययन कर अपनी अनुशंसा सहित प्रतिवेदन अकादमिक शाखा कार्यालय में अग्रेतर कार्यार्थ जमा कराने का अनुरोध किया गया है। इस प्रतिवेदन के आधार पर अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी।

BNMU बीएनएमयू, मधेपुरा में पीएच. डी. पंजीयन प्रपत्र पर पंजीयन तिथि के साथ-साथ पीएच. डी. पंजीयन संख्या अंकित करने के संबंध में आवश्यक निर्णय हेतु समिति का गठन

0

समिति का गठन

बीएनएमयू, मधेपुरा में पीएच. डी. पंजीयन प्रपत्र पर पंजीयन तिथि के साथ-साथ पीएच. डी. पंजीयन संख्या अंकित करने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। इस संबंध में विद्वत परिषद् की बैठक 23.12. 2020 की का. सं. 09 में लिए गए निर्णय के आलोक में विभिन्न पहलुओं का गहन अध्ययन कर समुचित सुझाव देने हेतु एक समिति का गठन किया गया है। विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रोफेसर डाॅ. अशोक कुमार यादव इसके अध्यक्ष और उप कुलसचिव (अकादमिक) डाॅ. सुधांशु शेखर सचिव बनाए गए हैं।

समिति में मानविकी संकायाध्यक्ष डाॅ. उषा सिन्हा, सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष डाॅ. राजकुमार सिंह, वाणिज्य संकायाध्यक्ष लम्बोदर झा, परीक्षा नियंत्रक डाॅ. नवीन कुमार, कुलसचिव डाॅ. कपिलदेव प्रसाद एवं उप कुलसचिव (पंजीयन) डाॅ. दीनानाथ मेहता समिति के सदस्य बनाए गए हैं।

उप कुलसचिव (अकादमिक) डाॅ. सुधांशु शेखर ने बताया कि समिति निदेशानुसार संबंधित मामलों के सभी पहलुओं का गहन अध्ययन कर आपसी विचार-विमर्श के बाद अपनी अनुशंसा सहित प्रतिवेदन अकादमिक शाखा कार्यालय में अग्रेतर कार्यार्थ जमा कराएगी।

Philosophy मधुमती का यशदेव शल्य विशेषांक

0

मधुमती के विशेष स्मरण अंकों की शृंखला में एक और उल्लेखनीय अध्याय जुड़ने जा रहा है। मधुमती का जून-2021 अंक अप्रतिम दार्शनिक यशदेव शल्य पर एकाग्र है।राजस्थान से दर्शन की एक त्रयी बनती है जिसमें यशदेव शल्य, मुकुंद लाठ और प्रोफेसर दयाकृष्ण की गिनती होती है। अगर इसे चतुष्टयी के रूप में देखना हो, तो यह मध्यप्रदेश के पदमश्री रमेशचंद्र शाह से पूरी होती है।

संयोग से मधुमती ने इस त्रयी में से अपने प्रदेश के दो शिखर व्यक्तित्वों क्रमशः मुकुंद लाठ और यशदेव शल्य पर अपने अंक एकाग्र करने का गौरव हासिल किया है।

यशदेव शल्य हिंदी भाषा एवं संस्कृति का स्वाभिमान हैं।उन्होंने हिंदी में मौलिक चिंतन और विचार की नींव भराई का काम किया है।

इस अंक के उन पर केंद्रित बारह आलेखों से उनके चिंतन की विविध छटाएँ खिल और खुल उठेंगी।

अंक की सबसे मूल्यवान सामग्री शल्यजी के कला का सत्य विषयक व्याख्यान का प्रथम बार प्रकाशन है, जो उन्होंने निर्मल स्मृति व्याख्यानमाला के अवसर दिया था।शल्यजी का यह आलेख असंकलित और अप्रकाशित है।इस सामग्री हेतु हम गगन गिल के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं।

इस अंक में आपको श्री रमेशचंद्र शाह, अम्बिकादत्त शर्मा, ईश्वर सिंह दोस्त, कमलनयन शल्य, प्रचंड प्रवीर, सुधीर कुमार, राजेश चौरसिया, प्रदीप खरे, आलोक टंडन, जयंत उपाध्याय, मुदित मिश्र एवं सुधांशु शेखर के मूल्यवान आलेख पढ़ने को मिलेंगे।

इस अंक में हम श्री रमेशचंद्र शाह की ओर से उपलब्ध करवाए यशदेव शल्य के रमेशचंद्र शाह को लिखे गए एक महत्त्वपूर्ण पत्र का भी पहली बार प्रकाशन कर रहे हैं। इस पत्र को उपलब्ध करवाने के लिए अकादमी परिवार श्री रमेशचंद्र शाह के प्रति आभारी है।

अंक का लिंक इस प्रकार से है-

https://rsaudr.org/show_artical.php?id=1620

BNMU बीएनएमयू में होगी गाँधी विचार की पढ़ाई

0

बीएनएमयू में होगी गाँधी विचार की पढ़ाई

भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में गाँधी विचार की पढ़ाई का मार्ग प्रशस्त होने जा रहा। जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने बताया कि विद्वत परिषद् की बैठक 23. 12. 2020 में लिए गए निर्णय के आलोक में कुलपति प्रोफेसर डाॅ. आर. के. पी. रमण के आदेशानुसार स्नातकोत्तर एवं स्नातक स्तर पर गाँधी विचार की पढ़ाई करने हेतु नियम-परिनियम एवं पाठ्यक्रम निर्माण समिति का गठन किया गया है।

समिति में प्रति कुलपति प्रोफेसर डाॅ. आभा सिंह को अध्यक्ष और अस्सिटेंट प्रोफेसर (दर्शनशास्त्र) डाॅ. सुधांशु शेखर को सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। समिति में दर्शनशास्त्र विभाग, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर के अध्यक्ष डाॅ. राजेश रंजन तिवारी, महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के डाॅ. मनोज कुमार एवं गाँधी विचार विभाग, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर के अध्यक्ष अध्यक्ष डाॅ. विजय कुमार बाह्य विशेषज्ञ-सदस्य हैं। समिति में दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष शोभाकांत कुमार, निदेशक अकादमिक डाॅ. एम. आई. रहमान एवं परीक्षा नियंत्रक डाॅ. नवीन कुमार भी सदस्य के रूप में शामिल हैं।

कुलसचिव डाॅ. कपिलदेव प्रसाद ने इस आशय की अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना में समिति से निदेशानुसार अनुरोध है कि अपना विस्तृत प्रतिवेदन पंद्रह दिनों के अंदर अकादमिक शाखा कार्यालय में अग्रेतर कार्यार्थ जमा कराने का कष्ट करें।

डाॅ. शेखर ने बताया कि वे विगत चार वर्षों से विश्वविद्यालय में गाँधी विचार की पढ़ाई शुरू करने का प्रयास कर रहे हैं। इस संबंध में एक दिसंबर 2018 को स्नातकोत्तर दर्शनशास्त्र विभाग की विभागीय परिषद् की बैठक संख्या-5 के माध्यम से विश्वविद्यालय को प्रस्ताव भेजा गया था। बैठक में महात्मा गाँधी के 150वीं जयंती वर्ष (2018-19) के उपलक्ष्य में भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में गाँधी विचार में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की शुरूआत करने हेतु प्रस्ताव भेजने पर सहमति बनी थी।

प्रस्ताव में कहा गया था कि पर्यावरण असंतुलन, आतंकवाद, सांप्रदायिकता, बेरोजगारी, विषमता आदि समस्याओं के समाधान हेतु महात्मा गाँधी के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने की जरूरत है और इस दृष्टि से गाँधी विचार में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की महती उपादेयता है। पड़ोस के तिलकामाँझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर में गाँधी विचार (स्नातकोत्तर) काफी लोकप्रिय है और यह बीएनएमयू में भी सफल होगा।

डाॅ. शेखर ने बताया कि तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की प्रेरणा और पूर्व सांसद, पूर्व कुलपति एवं गाँधीवादी विचारक पद्मश्री प्रोफेसर डाॅ. रामजी सिंह के प्रयास से वर्ष 1980 में गाँधी विचार विभाग की स्थापना हुई थी। आज यह विभाग देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है।

डाॅ. शेखर ने बताया कि तिलकमाँझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर के गाँधी विचार विभाग से अब तक लगभग दो हजार विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर और सौ से अधिक विद्यार्थियों को पीएच. डी. की उपाधि प्राप्त हो चुकी है। साथ ही विभाग के लगभग तीन दर्जन विद्यार्थी नेट एवं एक दर्जन जेआरएफ की पात्रता प्राप्त कर चुके हैं। वहाँ 1996 में तीन और 2017 में चार असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति हो चुकी है। पुनः वर्ष 2020 में बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग से दो पदों पर नियुक्ति हेतु आवेदन जमा कराया गया है। विभाग के कई पूर्ववर्ती विद्यार्थी विभिन्न उच्च पदों पर आसीन हैं।

23,977FansLike
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest posts